समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

पुस्तक

गुलामी के प्रतिरोध में स्त्री

गोपाल प्रधान
2020 में वर्सो से स्टेला दाज़्दी की किताब ‘ए किक इन द बेली: वीमेन, स्लेवरी ऐंड रेजिस्टेन्स’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका ने नौ साल...
चित्रकला

समकालीन कला का विस्तार और उमेश सिंह की कलाकृतियां

नई पीढ़ी के कलाकारों में उमेश सिंह एक महत्वपूर्ण प्रयोगधर्मी रचनाकार के रुप में उभर कर सामने आए हैं | नई पीढ़ी के कलाकारों की...
कविता

रोज़ी कामेई की कविताएँ सभ्यता को स्त्री की नज़र से देखने का प्रस्ताव हैं

समकालीन जनमत
बसंत त्रिपाठी रोज़ी की कविताओं का संसार एक स्त्री की असंख्य उलझनों, सपनों और उम्मीदों में डूबते-उतराते निर्मित हुआ है. प्रेम इन कविताओं के केन्द्र...
पुस्तक

‘दर्द के काफ़िले’ संग कविता का सफर

प्रशांत जैन दर्द का समंदर शायरी में जितना गहरा होता है, जीवन में उसकी अनुभूति उससे भी ज्यादा गहरी होती है। इस कोरोना काल से...
स्मृति

योगेश्वर गोप को याद करने का मतलब

कौशल किशोर
जन्म दिवस, 01 जनवरी  पर समाजिक परिवर्तन का संघर्ष ऐसे शख्सियतों को पैदा करता है जो जनता के सामाजिक संघर्ष की अमूल्य निधि हैं। उनका...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

कुल्ली भाट: निराला की रचना-धर्मिता और व्यक्तित्व में एक मोड़

दुर्गा सिंह
कुल्ली भाट, निराला की ऐसी रचना है, जो खुद उनके लेखन में भू-चिन्ह  की तरह है। इसका रचनाकाल 1937-38 ईसवी का है। पुुुस्तिका के रूप...
स्मृति

शम्सुरर्हमान फ़ारूक़ी की याद में

समकालीन जनमत
सिराज अजमली शम्सुरर्हमान फ़ारूक़ी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ (अब मऊ) के कोईरिया पार गाँव में हुआ ।उनके पिता मौलवी ख़लीलुर्रहमान फ़ारूक़ी शिक्षा विभाग...
कविता

उज्ज्वल भट्टाचार्य की कविताएँ जनविरोधी व्यवस्था में ख़ुद के होने की शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
संजय कुंदन हिंदी कविता की सुपरिचित मुख्यधारा के भीतर कई नियमित-अनियमित अंतर्धाराएं हैं, जो बिना मुखर हुए हिंदी कविता को विस्तृत कर रही हैं। उज्ज्वल...
कविता

लाल्टू की दो कवितायें

समकालीन जनमत
(कवि लाल्टू की  कविता में  समकालीन विषय प्रमुखता से जगह पाते हैं . पिछले एक महीने से दिल्ली के  सीमांत  पर चल रहे किसान आन्दोलन...
कविता

श्रम संस्कृति में रचा पगा जीवन का काव्य

सुशील मानव
श्रम मनुष्य जीवन के उद्विकास की मूलाधार प्रक्रिया है। श्रम प्रक्रिया के तहत ही मनुष्य सामूहिक और समाजिक बना। श्रम की प्रक्रिया के तहत ही...
कविता

अंचित की कविताएँ मौजूदा दौर के संकटों की शिनाख़्त करती हैं

समकालीन जनमत
रमण कुमार सिंह हाल के समय में हिंदी कविता में जिन कुछ नए युवा कवियों ने अपनी कविता से ध्यान आकृष्ट किया है, उनमें अंचित...
पुस्तक

जनविरोधी सत्ता के ख़िलाफ़ नाटक का हथियार

समकालीन जनमत
सुधाकर रवि बचपन से दो गीत सुनता आ रहा हूँ। दोनों गीत काफी महशूर हैं. पहला है- पढ़ना लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालों। दूसरा...
स्मृति

´´ हम तारों से आये हैं और तारों में ही चले जायेंगे वापस ´´

प्रणय कृष्ण
विलक्षण कवि -लेखक, सम्पादक, अनुवादक, जन संस्कृति मंच के संस्थापक सदस्य और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कामरेड और सबसे बढ़कर एक दुर्लभ इंसान के रूप में हमारी स्मृतियों...
कविता

आलोक की कविताएँ यथार्थ के धरातल पर उम्मीद के फूल हैं

समकालीन जनमत
अच्युतानंद मिश्र   कविता लिखना, दुनिया को देखने जानने और समझने का एक संजीदा और जरूरी काम है। ऐसे में किसी युवा  कवि से यह...
स्मृति

ज़िंदा शहीद कॉमरेड दर्शन दुसांझ – किसान आंदोलन के बहाने स्मरण

समकालीन जनमत
सतीश छिम्पा शहीदों की चिंताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले…… मुझे खंजर से मारो या सूली पर लटका दो मैं मरकर भी चारों तरफ बिखर...
साहित्य-संस्कृति

अल्पना मिश्र की कहानी के बहाने कुछ बातें

समकालीन जनमत
निकिता यदि हम अल्पना मिश्रा की कहानी ‘सुनयना! तेरे नैन बड़े बेचैन’ को पढ़ते हैं, तो हमें उस कहानी में कई चीजें सामने आती दिखती...
कविता

रेखा चमोली की कविताएँ हाशिए की आवाज़ हैं

समकालीन जनमत
आशीष कुमार कविता अपने बचाव में हथियार उठाने का विचार है साहस की सीढ़ियां है कविता उमंग है उत्साह है खुद में एक बच्चे को...
साहित्य-संस्कृति

रणेन्द्र को श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान

समकालीन जनमत
विनय सौरभ 5 दिसम्बर का दिन कुछ खास रहा। दोपहर के बाद दो सकारात्मक खबरें एक साथ आयीं। झारखंड में निवास करने वाले लेखक रणेन्द्र...
कविता

भारत की कविताएँ कोमलता को कुचल देने वाली तानाशाही कठोरता का प्रतिकार हैं

समकालीन जनमत
 विपिन चौधरी अपना रचनात्मक स्पेस अर्जित करने के बाद हर युवा रचनाकार पहले अपनी देखी, समझी हुई उस सामाजिक समझ को पुख्ता करता है जिससे...
कविता

हर्ष की कविताएँ रचनात्मक आश्वस्ति देती हैं

समकालीन जनमत
हर्ष अपनी कविताओं के जरिए एक रचनात्मक आश्वस्ति देते हैं बेहतर भविष्य को बुनने का. उनका दखल केवल विषयों के सटीक चयन तक ही नहीं...
Fearlessly expressing peoples opinion