समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

चित्रकला

‘ आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान , जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर देगा ’

समकालीन जनमत
तुम देखोगे सामने तुम्हारे आँखों के, खलता की खेती हरी तुम्हारी डूबेगी/आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान, जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर...
चित्रकला

तस्वीरों में किसान आंदोलन (टिकरी बॉर्डर)

समकालीन जनमत
भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू, नई दिल्ली में अध्ययनरत आमिर ने किसान आंदोलन के ये चित्र टिकरी बार्डर पर लिए हैं और इसे विशेष तौर पर...
कविता

उस चाँद पर अब ख़ून के धब्बे हैं ..

समकालीन जनमत
(आलोचना पत्रिका में प्रकाशित फ़रीद ख़ाँ की कविताओं पर एक नज़र) मोहम्मद उमर इस बार की हिंदी त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ के ‘अक्टूबर-दिसम्बर 2020’ के अंक...
कविता

मिथिलेश के नए कविता संग्रह से गुजरना ग्रामीण भारत की आत्मा को पढ़ना है

समकालीन जनमत
आलोक कुमार मिश्रा कवि मिथिलेश कुमार राय अपने पहले काव्य संग्रह- ‘ओस पसीना बारिश फूल’ से ही समकालीन कविता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बना...
कविता

राही डूमरचीर आदिवासी समाज और जीवन के गहरे कंसर्न के कवि हैं

समकालीन जनमत
विनय सौरभ राही डूमरचीर की कविताएँ पढ़ते हुए कुछ साधारण चीज़ें असाधारण तरीक़े से उनकी कविताओं में आती दिखती हैं। जैसे उनकी कविताओं के विषय।...
पुस्तक

पूंजीवाद क्या है

गोपाल प्रधान
2020 में हेमार्केट बुक्स से हदास थिएर की किताब ‘ ए पीपुल’स गाइड टु कैपिटलिज्म: ऐन इंट्रोडक्शन टु मार्क्सिस्ट इकोनामिक्स ’ का प्रकाशन हुआ ।...
कविता

प्रदीपिका की कविताएँ मानवीय आकांक्षाओं की तरफ़ खुली हुई खिड़कियाँ हैं

समकालीन जनमत
सिद्धार्थ गिगू प्रदीपिका की कविताएँ किसी एक सांचे-ढांचे में नहीं बंधती. दूसरे शब्दों में कहें तो यहां उनकी भावनाओं में पर्याप्त विविधता और उतना ही...
पुस्तक

गुलामी के प्रतिरोध में स्त्री

गोपाल प्रधान
2020 में वर्सो से स्टेला दाज़्दी की किताब ‘ए किक इन द बेली: वीमेन, स्लेवरी ऐंड रेजिस्टेन्स’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका ने नौ साल...
चित्रकला

समकालीन कला का विस्तार और उमेश सिंह की कलाकृतियां

नई पीढ़ी के कलाकारों में उमेश सिंह एक महत्वपूर्ण प्रयोगधर्मी रचनाकार के रुप में उभर कर सामने आए हैं | नई पीढ़ी के कलाकारों की...
कविता

रोज़ी कामेई की कविताएँ सभ्यता को स्त्री की नज़र से देखने का प्रस्ताव हैं

समकालीन जनमत
बसंत त्रिपाठी रोज़ी की कविताओं का संसार एक स्त्री की असंख्य उलझनों, सपनों और उम्मीदों में डूबते-उतराते निर्मित हुआ है. प्रेम इन कविताओं के केन्द्र...
पुस्तक

‘दर्द के काफ़िले’ संग कविता का सफर

प्रशांत जैन दर्द का समंदर शायरी में जितना गहरा होता है, जीवन में उसकी अनुभूति उससे भी ज्यादा गहरी होती है। इस कोरोना काल से...
स्मृति

योगेश्वर गोप को याद करने का मतलब

कौशल किशोर
जन्म दिवस, 01 जनवरी  पर समाजिक परिवर्तन का संघर्ष ऐसे शख्सियतों को पैदा करता है जो जनता के सामाजिक संघर्ष की अमूल्य निधि हैं। उनका...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

कुल्ली भाट: निराला की रचना-धर्मिता और व्यक्तित्व में एक मोड़

दुर्गा सिंह
कुल्ली भाट, निराला की ऐसी रचना है, जो खुद उनके लेखन में भू-चिन्ह  की तरह है। इसका रचनाकाल 1937-38 ईसवी का है। पुुुस्तिका के रूप...
स्मृति

शम्सुरर्हमान फ़ारूक़ी की याद में

समकालीन जनमत
सिराज अजमली शम्सुरर्हमान फ़ारूक़ी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ (अब मऊ) के कोईरिया पार गाँव में हुआ ।उनके पिता मौलवी ख़लीलुर्रहमान फ़ारूक़ी शिक्षा विभाग...
कविता

उज्ज्वल भट्टाचार्य की कविताएँ जनविरोधी व्यवस्था में ख़ुद के होने की शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
संजय कुंदन हिंदी कविता की सुपरिचित मुख्यधारा के भीतर कई नियमित-अनियमित अंतर्धाराएं हैं, जो बिना मुखर हुए हिंदी कविता को विस्तृत कर रही हैं। उज्ज्वल...
कविता

लाल्टू की दो कवितायें

समकालीन जनमत
(कवि लाल्टू की  कविता में  समकालीन विषय प्रमुखता से जगह पाते हैं . पिछले एक महीने से दिल्ली के  सीमांत  पर चल रहे किसान आन्दोलन...
कविता

श्रम संस्कृति में रचा पगा जीवन का काव्य

सुशील मानव
श्रम मनुष्य जीवन के उद्विकास की मूलाधार प्रक्रिया है। श्रम प्रक्रिया के तहत ही मनुष्य सामूहिक और समाजिक बना। श्रम की प्रक्रिया के तहत ही...
कविता

अंचित की कविताएँ मौजूदा दौर के संकटों की शिनाख़्त करती हैं

समकालीन जनमत
रमण कुमार सिंह हाल के समय में हिंदी कविता में जिन कुछ नए युवा कवियों ने अपनी कविता से ध्यान आकृष्ट किया है, उनमें अंचित...
पुस्तक

जनविरोधी सत्ता के ख़िलाफ़ नाटक का हथियार

समकालीन जनमत
सुधाकर रवि बचपन से दो गीत सुनता आ रहा हूँ। दोनों गीत काफी महशूर हैं. पहला है- पढ़ना लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालों। दूसरा...
स्मृति

´´ हम तारों से आये हैं और तारों में ही चले जायेंगे वापस ´´

प्रणय कृष्ण
विलक्षण कवि -लेखक, सम्पादक, अनुवादक, जन संस्कृति मंच के संस्थापक सदस्य और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कामरेड और सबसे बढ़कर एक दुर्लभ इंसान के रूप में हमारी स्मृतियों...
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