समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कहानी

‘रोटी के चार हर्फ़’ सामायिक घटनाओं और सामाजिक विभेद की सरोकारी रचना है

समकालीन जनमत
गति उपाध्याय “रोटी के चार हर्फ़ ” सिर्फ एक कहानी ही नहीं बल्कि एक कथाचित्र है | कहानी पाठकों के दिलदिमाग़ में चित्र खींचती है...
कविता

सुधाकर रवि की कविता अपने समय से जुड़ने की एक ईमानदार कोशिश है

समकालीन जनमत
अंचित अच्छी कविताओं की निर्मिति में तीन चीज़ें लगती हैं – विचारधारा, भाषा, और जीवन दृष्टि. अच्छी कविताएँ हमेशा वैसी होती हैं, जिनसे अपना दुःख,...
कविता

अभिनव निरंजन की कविताएँ एक घर्षण हैं जिसके ताप से कवि अपने समय का बुख़ार नापता है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवि अभिनव निरंजन अपनी कविताओं में रूपकों, स्थितियों एवं दृश्यों का विभेदन कर उसमें से कविता अर्जित करते हैं। उनके लिए ये...
चित्रकला

भारतीय चित्रकला परंपरा और अमृता शेरगिल  

अशोक भौमिक
अमृता शेरगिल का भारतीय कला इतिहास में सबसे बड़ा अवदान यही है कि उन्होंने पहली बार आम जन को चित्र में स्थान देते हुए चित्रों...
साहित्य-संस्कृति

‘ एक तख्तनशीं आज भी इतराया हुआ है , वो ही खुदा है सबको ये समझाया हुआ है ’

समकालीन जनमत
गोरख स्मृति आयोजन के दूसरे दिन सत्रह कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया पटना. ‘‘ किसान की मेहनत के महत्व का सम्मान...
कविता

गोरख पाण्डेय की कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’ 

समकालीन जनमत
समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’         ...
कविता

गोरख पाण्डेय की ग़ज़ल ‘ रफ़्ता-रफ़्ता नज़रबंदी का जादू घटता जाए है ’

समकालीन जनमत
समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी ग़ज़ल ‘रफ़्ता रफ़्ता नज़रबंदी का जादू घटता जाए है’...
साहित्य-संस्कृति

किसान की आंखों से दुनिया को देखते हैं बलभद्र

गोरख स्मृति आयोजन के पहले दिन बलभद्र के कविता संग्रह ‘समय की ठनक’ पर परिचर्चा आयोजित हुई पटना। 5वें गोरख स्मृति आयोजन के पहले दिन...
साहित्य-संस्कृति

लखनऊ में प्रतिभा कटियार की ‘ मारीना ’ : विमोचन और चर्चा

कौशल किशोर
‘ मारीना ’ कवि-कथाकार-पत्रकार प्रतिभा कटियार की हिन्दी के पाठकों के लिए खोज है। यह उस कवि की तलाश है जो अपने देश रूस से...
सिनेमा

The Social Dilemma : नए बाज़ार और शोषण के आधुनिकीकरण को उजागर करती फ़िल्म

समकालीन जनमत
' The Social Dilemma' वर्तमान समय में सोशल मीडिया की लत, सर्विलांस कैपिटलिज़्म, data-mining, सोशल मीडिया का राजनीतिक ध्रुवीकरण में इस्तेमाल, बढ़ते मानसिक रोग, आत्महत्याओं...
कविता

उम्मीद की दूब के ज़िंदा रहने की कामना से भरी ज्योति रीता की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुंदन सिद्धार्थ   “जब धरती पर सारी संवेदनाएँ समाप्ति पर होंगी तब बचा लेना प्रेम अपनी हथेली पर कहीं जब धरती बंजरपन की ओर अग्रसर...
सिनेमा

पाताललोकः सत्ता के षड्यंत्रकारी चरित्र को लक्षित करती वेब श्रृंखला

दुर्गा सिंह
‘पाताललोक‘ अमेज़न प्राइम वीडियो पर आयी वेब श्रृंखला है। पिछले वर्ष मई में प्रसारित हुई यह श्रृंखला अपराध की छिपी हुई दुनिया और उसकी हकीकत...
चित्रकला

‘ आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान , जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर देगा ’

समकालीन जनमत
तुम देखोगे सामने तुम्हारे आँखों के, खलता की खेती हरी तुम्हारी डूबेगी/आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान, जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर...
चित्रकला

तस्वीरों में किसान आंदोलन (टिकरी बॉर्डर)

समकालीन जनमत
भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू, नई दिल्ली में अध्ययनरत आमिर ने किसान आंदोलन के ये चित्र टिकरी बार्डर पर लिए हैं और इसे विशेष तौर पर...
कविता

उस चाँद पर अब ख़ून के धब्बे हैं ..

समकालीन जनमत
(आलोचना पत्रिका में प्रकाशित फ़रीद ख़ाँ की कविताओं पर एक नज़र) मोहम्मद उमर इस बार की हिंदी त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ के ‘अक्टूबर-दिसम्बर 2020’ के अंक...
कविता

मिथिलेश के नए कविता संग्रह से गुजरना ग्रामीण भारत की आत्मा को पढ़ना है

समकालीन जनमत
आलोक कुमार मिश्रा कवि मिथिलेश कुमार राय अपने पहले काव्य संग्रह- ‘ओस पसीना बारिश फूल’ से ही समकालीन कविता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बना...
कविता

राही डूमरचीर आदिवासी समाज और जीवन के गहरे कंसर्न के कवि हैं

समकालीन जनमत
विनय सौरभ राही डूमरचीर की कविताएँ पढ़ते हुए कुछ साधारण चीज़ें असाधारण तरीक़े से उनकी कविताओं में आती दिखती हैं। जैसे उनकी कविताओं के विषय।...
पुस्तक

पूंजीवाद क्या है

गोपाल प्रधान
2020 में हेमार्केट बुक्स से हदास थिएर की किताब ‘ ए पीपुल’स गाइड टु कैपिटलिज्म: ऐन इंट्रोडक्शन टु मार्क्सिस्ट इकोनामिक्स ’ का प्रकाशन हुआ ।...
कविता

प्रदीपिका की कविताएँ मानवीय आकांक्षाओं की तरफ़ खुली हुई खिड़कियाँ हैं

समकालीन जनमत
सिद्धार्थ गिगू प्रदीपिका की कविताएँ किसी एक सांचे-ढांचे में नहीं बंधती. दूसरे शब्दों में कहें तो यहां उनकी भावनाओं में पर्याप्त विविधता और उतना ही...
पुस्तक

गुलामी के प्रतिरोध में स्त्री

गोपाल प्रधान
2020 में वर्सो से स्टेला दाज़्दी की किताब ‘ए किक इन द बेली: वीमेन, स्लेवरी ऐंड रेजिस्टेन्स’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका ने नौ साल...
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