कहानी ‘रोटी के चार हर्फ़’ सामायिक घटनाओं और सामाजिक विभेद की सरोकारी रचना हैसमकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 2021 by समकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 202102477 गति उपाध्याय “रोटी के चार हर्फ़ ” सिर्फ एक कहानी ही नहीं बल्कि एक कथाचित्र है | कहानी पाठकों के दिलदिमाग़ में चित्र खींचती है...
कविता सुधाकर रवि की कविता अपने समय से जुड़ने की एक ईमानदार कोशिश हैसमकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 2021 by समकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 202102362 अंचित अच्छी कविताओं की निर्मिति में तीन चीज़ें लगती हैं – विचारधारा, भाषा, और जीवन दृष्टि. अच्छी कविताएँ हमेशा वैसी होती हैं, जिनसे अपना दुःख,...
कविता अभिनव निरंजन की कविताएँ एक घर्षण हैं जिसके ताप से कवि अपने समय का बुख़ार नापता हैसमकालीन जनमतJanuary 31, 2021January 31, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 31, 2021January 31, 202101812 निरंजन श्रोत्रिय युवा कवि अभिनव निरंजन अपनी कविताओं में रूपकों, स्थितियों एवं दृश्यों का विभेदन कर उसमें से कविता अर्जित करते हैं। उनके लिए ये...
चित्रकला भारतीय चित्रकला परंपरा और अमृता शेरगिल अशोक भौमिकJanuary 30, 2021January 31, 2021 by अशोक भौमिकJanuary 30, 2021January 31, 202102374 अमृता शेरगिल का भारतीय कला इतिहास में सबसे बड़ा अवदान यही है कि उन्होंने पहली बार आम जन को चित्र में स्थान देते हुए चित्रों...
साहित्य-संस्कृति ‘ एक तख्तनशीं आज भी इतराया हुआ है , वो ही खुदा है सबको ये समझाया हुआ है ’समकालीन जनमतJanuary 30, 2021January 30, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 30, 2021January 30, 202102027 गोरख स्मृति आयोजन के दूसरे दिन सत्रह कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया पटना. ‘‘ किसान की मेहनत के महत्व का सम्मान...
कविता गोरख पाण्डेय की कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’ समकालीन जनमतJanuary 29, 2021January 27, 2024 by समकालीन जनमतJanuary 29, 2021January 27, 20240955 समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’ ...
कविता गोरख पाण्डेय की ग़ज़ल ‘ रफ़्ता-रफ़्ता नज़रबंदी का जादू घटता जाए है ’समकालीन जनमतJanuary 29, 2021January 29, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 29, 2021January 29, 202101454 समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी ग़ज़ल ‘रफ़्ता रफ़्ता नज़रबंदी का जादू घटता जाए है’...
साहित्य-संस्कृति किसान की आंखों से दुनिया को देखते हैं बलभद्रसमकालीन जनमतJanuary 29, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 29, 202101686 गोरख स्मृति आयोजन के पहले दिन बलभद्र के कविता संग्रह ‘समय की ठनक’ पर परिचर्चा आयोजित हुई पटना। 5वें गोरख स्मृति आयोजन के पहले दिन...
साहित्य-संस्कृति लखनऊ में प्रतिभा कटियार की ‘ मारीना ’ : विमोचन और चर्चाकौशल किशोरJanuary 26, 2021January 26, 2021 by कौशल किशोरJanuary 26, 2021January 26, 20210944 ‘ मारीना ’ कवि-कथाकार-पत्रकार प्रतिभा कटियार की हिन्दी के पाठकों के लिए खोज है। यह उस कवि की तलाश है जो अपने देश रूस से...
सिनेमा The Social Dilemma : नए बाज़ार और शोषण के आधुनिकीकरण को उजागर करती फ़िल्मसमकालीन जनमतJanuary 25, 2021January 26, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 25, 2021January 26, 20210630 ' The Social Dilemma' वर्तमान समय में सोशल मीडिया की लत, सर्विलांस कैपिटलिज़्म, data-mining, सोशल मीडिया का राजनीतिक ध्रुवीकरण में इस्तेमाल, बढ़ते मानसिक रोग, आत्महत्याओं...
कविता उम्मीद की दूब के ज़िंदा रहने की कामना से भरी ज्योति रीता की कविताएँसमकालीन जनमतJanuary 24, 2021January 24, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 24, 2021January 24, 202101827 कुंदन सिद्धार्थ “जब धरती पर सारी संवेदनाएँ समाप्ति पर होंगी तब बचा लेना प्रेम अपनी हथेली पर कहीं जब धरती बंजरपन की ओर अग्रसर...
सिनेमा पाताललोकः सत्ता के षड्यंत्रकारी चरित्र को लक्षित करती वेब श्रृंखलादुर्गा सिंहJanuary 22, 2021January 23, 2021 by दुर्गा सिंहJanuary 22, 2021January 23, 202101504 ‘पाताललोक‘ अमेज़न प्राइम वीडियो पर आयी वेब श्रृंखला है। पिछले वर्ष मई में प्रसारित हुई यह श्रृंखला अपराध की छिपी हुई दुनिया और उसकी हकीकत...
चित्रकला ‘ आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान , जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर देगा ’समकालीन जनमतJanuary 22, 2021January 22, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 22, 2021January 22, 20210594 तुम देखोगे सामने तुम्हारे आँखों के, खलता की खेती हरी तुम्हारी डूबेगी/आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान, जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर...
चित्रकला तस्वीरों में किसान आंदोलन (टिकरी बॉर्डर)समकालीन जनमतJanuary 21, 2021January 21, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 21, 2021January 21, 20210984 भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू, नई दिल्ली में अध्ययनरत आमिर ने किसान आंदोलन के ये चित्र टिकरी बार्डर पर लिए हैं और इसे विशेष तौर पर...
कविता उस चाँद पर अब ख़ून के धब्बे हैं ..समकालीन जनमतJanuary 19, 2021January 19, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 19, 2021January 19, 202101174 (आलोचना पत्रिका में प्रकाशित फ़रीद ख़ाँ की कविताओं पर एक नज़र) मोहम्मद उमर इस बार की हिंदी त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ के ‘अक्टूबर-दिसम्बर 2020’ के अंक...
कविता मिथिलेश के नए कविता संग्रह से गुजरना ग्रामीण भारत की आत्मा को पढ़ना हैसमकालीन जनमतJanuary 17, 2021January 17, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 17, 2021January 17, 202102605 आलोक कुमार मिश्रा कवि मिथिलेश कुमार राय अपने पहले काव्य संग्रह- ‘ओस पसीना बारिश फूल’ से ही समकालीन कविता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बना...
कविता राही डूमरचीर आदिवासी समाज और जीवन के गहरे कंसर्न के कवि हैंसमकालीन जनमतJanuary 17, 2021January 17, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 17, 2021January 17, 202102222 विनय सौरभ राही डूमरचीर की कविताएँ पढ़ते हुए कुछ साधारण चीज़ें असाधारण तरीक़े से उनकी कविताओं में आती दिखती हैं। जैसे उनकी कविताओं के विषय।...
पुस्तक पूंजीवाद क्या हैगोपाल प्रधानJanuary 15, 2021January 15, 2021 by गोपाल प्रधानJanuary 15, 2021January 15, 202101506 2020 में हेमार्केट बुक्स से हदास थिएर की किताब ‘ ए पीपुल’स गाइड टु कैपिटलिज्म: ऐन इंट्रोडक्शन टु मार्क्सिस्ट इकोनामिक्स ’ का प्रकाशन हुआ ।...
कविता प्रदीपिका की कविताएँ मानवीय आकांक्षाओं की तरफ़ खुली हुई खिड़कियाँ हैंसमकालीन जनमतJanuary 10, 2021January 10, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 10, 2021January 10, 202101914 सिद्धार्थ गिगू प्रदीपिका की कविताएँ किसी एक सांचे-ढांचे में नहीं बंधती. दूसरे शब्दों में कहें तो यहां उनकी भावनाओं में पर्याप्त विविधता और उतना ही...
पुस्तक गुलामी के प्रतिरोध में स्त्रीगोपाल प्रधानJanuary 10, 2021January 10, 2021 by गोपाल प्रधानJanuary 10, 2021January 10, 202101800 2020 में वर्सो से स्टेला दाज़्दी की किताब ‘ए किक इन द बेली: वीमेन, स्लेवरी ऐंड रेजिस्टेन्स’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका ने नौ साल...