Tag : Sushil Manav

कविता

श्रम संस्कृति में रचा पगा जीवन का काव्य

सुशील मानव
श्रम मनुष्य जीवन के उद्विकास की मूलाधार प्रक्रिया है। श्रम प्रक्रिया के तहत ही मनुष्य सामूहिक और समाजिक बना। श्रम की प्रक्रिया के तहत ही...
जनमत पुस्तक

सत्य का अनवरत अन्वेषण हैं राकेश रेणु के ‘इसी से बचा जीवन’ की कविताएँ

सुशील मानव
  कविता क्या है और इसका काम क्या है- इस पर अनेक बातें हैं, अनेक परिभाषाएं हैं। लेकिन मौजूदा समय सत्य पर संकट का समय...
कविता

पंकज की कविताएँ जाति-संरचना के कठोर सच की तीखी बानगी हैं

समकालीन जनमत
सुशील मानव पंकज चौधरी की कविताएँ दरअसल विशुद्ध जाति विमर्श (कास्ट डिस्कोर्स) की कविताएँ हैं। जो अपने समय की राजनीति, संस्कृति ,समाज, अर्थशास्त्र न्याय व्यवस्था...
ख़बर

उत्सव के बहाने आदिवासी भाषा, समाज, संस्कृति और पर्यावरण पर आत्मचिंतन 

सुशील मानव
  अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के रजत जयंती वर्ष में नई दिल्ली के इंदिरा गांधी कला केंद्र में दो दिवसीय (10 व 11 अगस्त) कार्यक्रमकी शुरुआत...
जनमत शख्सियत स्मृति

दलित साहित्य को शिल्प और सौंदर्यबोध देने वाले भाषा के मनोवैज्ञानिक थे मलखान सिंह

सुशील मानव
परसों शाम को फोन पर बात हुई, मैंने पूछा था, सर नया क्या लिख रहे हैं इन दिनों। उन्होंने जवाब में कहा था- “ये मेरे...

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