समकालीन जनमत

Category : कविता

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साहित्य, साम्राज्य और पर्यावरण

गोपाल प्रधान
2025 में द यूनिवर्सिटी आफ़ शिकागो प्रेस से अमिताभ घोष की किताब ‘ वाइल्ड फ़िक्शंस : एसेज आन लिटरेचर, एम्पायर, ऐंड द एनवायरनमेन्ट ’ का...
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‘ देश द्रोह की हांडी ’ : रक्त रंजित समय में लिखी जाती है धारदार कविता

कौशल किशोर
मीता दास के कविता संग्रह ‘देशद्रोह की हांडी’ की कविताओं को पढ़ते हुए राजेंद्र यादव का एक पुराना इंटरव्यू याद हो आया जो उन्होंने कवि-लेखक...
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गरिमा सिंह की कविताएँ स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित हैं

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सुमन शेखर गरिमा सिंह की कविताएँ मूलतः स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित एक ऐसी संवेदनात्मक भूमि है, जहाँ स्त्री-अस्मिता, अस्तित्वगत बेचैनी और काव्य-रूढ़ियों...
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बलराम कांवट की कविताएँ एक समावेशी दुनिया का ख़्वाब रचती हैं

उमा राग
 मनीष कुमार यादव ”जंगल में दूर किसी टहनी पर झूलती बया अब तक इसी भरोसे पर सहती आयी है इस विपदा को कि थोड़ी देर...
कवितानई क़लम

सत्यव्रत की कविताएँ आदिम संवेदनाओं का एक कोलाज हैं।

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विनय सौरभ सत्यव्रत की इन कविताओं से गुज़रते हुए यह स्पष्ट होता है कि ये कविताएँ आधुनिक जीवन की विडंबनाओं, महानगर के दमघोंटू यथार्थ और...
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सत्या शर्मा ‘कीर्ति’ की कविताएँ स्त्री जीवन की जटिल सच्चाइयों को सहजता से उद्घाटित करती हैं

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता “तीस पार की नदियां” और ‘सीझते हुए सपने’ संग्रह की कवयित्री सत्या शर्मा कीर्ति की कविताओं में स्त्रियों का जीवन पूरी संवेदना के...
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शम्भु बादल की कविताएँ लोक-अनुभव और वैश्विक चेतना का रसायन हैं

समकालीन जनमत
सुशील कुमार शम्भु बादल की कविताएँ समकालीन हिंदी कविता में उस धरातल का प्रतिनिधित्व करती हैं जहाँ भाषा, दृश्य और नैतिक आग्रह एकाकार होकर एक...
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जगदीश पंकज के नवगीतों में समकालीन चेतना और सामाजिक प्रतिरोध

समकालीन जनमत
 अशोक शर्मा ‘कटेठिया’ जगदीश पंकज समकालीन हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ नवगीतकार हैं। उनके नवगीत अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय परिस्थितियों पर मुखर होकर...
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खुरदरी ज़िंदगी की मनुष्यता को तरजीह देने वाले कवि बलभद्र

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शैलेन्द्र कुमार शुक्ल बीती सदी के नवें दसक में उभरी नई पीढ़ी के एक महत्वपूर्ण कवि बलभद्र जनवादी काव्यशैली और लोकभाषिक अस्मिता के साथ हिंदी...
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सुमन शेखर की कविताएँ प्रयोगधर्मी और लंबी साँस की कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
आदित्य शुक्ला सुमन शेखर की ये कविताएँ लंबी साँस की कविताएँ हैं। जैसे किसी चित्रकार ने एक लंबी साँस में एक चित्र खींच दिया हो।...
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सत्यपाल सहगल की कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन है

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अरुण आदित्य सत्यपाल सहगल की कविताएँ सहज में सुंदर की अनुभूति की कविताएँ हैं। इन कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन...
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दुर्गेश की कविताऍं कच्ची-पक्की स्मृतियों की ताज़ी व पहली तोड़ हैं

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नीरज हमारे इर्द-गिर्द हमेशा अनुत्तरित आत्माभिव्यक्तियों के गुबार मौजूद होते हैं जिन्हें केवल सहृदय ही महसूस कर पाते हैं, कवि-हृदय इस मामले में सबसे सहज...
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शचीन्द्र आर्य की कविताएँ वापस लौट आने की संभावना हैं

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राग रंजन शचीन्द्र आर्य की कविताएँ आज की हिंदी कविता में एक ऐसे हस्तक्षेप के रूप में पढ़ी जानी चाहिए, जो तेज़ आवाज़ में नहीं,...
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कवि जितेंद्र विसारिया की कविताएँ समाज और सत्ता के खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं।

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रौशन कुमार कवि जितेंद्र विसारिया जी की कविताएँ समाज और सत्ता के दोहरेपन तथा खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं। इनकी कविताएँ धर्म, मिथक, इतिहास और...
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चंदन सिंह की कविताएँ आत्मयात्रा के अनुभवों को आकार देने की कोशिश हैं

गौरव पाण्डेय चंदन मूलतः युवा चित्रकार हैं और कविताएँ लिखते हैं। चंदन के पास ऐसी भाषा है जो बोलने से ज़्यादा सुनने और ठहरने की...
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जयमाला की कविताएँ मनुष्य की बेचैनी और विस्थापन की कथा कहती हैं।

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प्रज्ञा गुप्ता जयमाला की कविताएँ आज के समय की विडंबना एवं सच्चाई को मार्मिकता से सामने लाती हैं। इन कविताओं को पढ़कर हम यह सोचने...
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कंचन सिंह की कविताएँ स्त्री-मन, स्त्री-पीड़ा की मौलिक अभिव्यक्ति हैं।

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अजय दुर्ज्ञेय   कंचन सिंह की कविताओं से यह मेरी संभवत पहली मुलाक़ात है और पहली ही मुलाक़ात में उनकी कविताओं के विषय और विषयगत...
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विनोद कुमार ‘हंस’ की कविताएँ सामाजिक रूढ़ियों के प्रति विद्रोह दर्ज करती हैं

हरे प्रकाश उपाध्याय विनोद कुमार ‘हंस’ कविता की दुनिया में बिलकुल अभी-अभी दाखिल हो रहे कवि हैं। फ़िलहाल उनका स्वागत और स्वीकार इसी रूप में...
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पूर्णिमा साहू की कविताएँ दृष्टि संपन्नता की पूंजी लेकर आई हैं

समकालीन जनमत
अणु शक्ति सिंह पूर्णिमा साहू की कविताओं पर पहली दृष्टि पड़ते ही उनकी राजनीतिक समझ की झलक आ जाती है। ऐसे समय में जब स्त्री...
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प्रियंका यादव की कविताएँ प्रेम में स्त्री-मन की उधेड़बुन से रूपाकार ग्रहण करती हैं

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अनुराग यादव कविता भावों का एक संसार निर्मित करने की संभावना स्वयं में समेटे रहती है, उसे आवश्यकता होती है एक सहृदय पाठक की |...
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