Category : कविता

कविता

‘ पांव में छाले आंख में आंसू पीड़ा भरी कहानी लिख/मजदूरों के साथ हुई जो सत्ता की मनमानी लिख ’

समकालीन जनमत
लखनऊ.  कोरोना काल में बड़ी मात्रा में कविताएं रची जा रही हैं। मानव संकट सृजन के लिए आधार बनता है। आज की रचनाओं में भावों...
कविता

कविता कृष्णपल्लवी की कविताएँ बाहरी कोलाहल और भीतरी बेचैनी से अर्जित कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी साहित्यिक एक्टिविज्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली पोस्टर-कविता, हमेशा से विरोध प्रदर्शनों का अहम् हिस्सा रही हैं. सबसे सघन समय में...
कविता

‘मजदूर थे वो जब तक सबके ही काम आए/मजबूर हो गए तो सबको ही खल रहे हैं’

समकालीन जनमत
लखनऊ। लोग कोरोना की चपेट में ही नहीं हैं बल्कि लाॅक डाउन से पैदा हुई अव्यवस्था के भी शिकार हुए हैं, हो रहे हैं। लोगों...
कविता

पंकज की कविताएँ जाति-संरचना के कठोर सच की तीखी बानगी हैं

समकालीन जनमत
सुशील मानव पंकज चौधरी की कविताएँ दरअसल विशुद्ध जाति विमर्श (कास्ट डिस्कोर्स) की कविताएँ हैं। जो अपने समय की राजनीति, संस्कृति ,समाज, अर्थशास्त्र न्याय व्यवस्था...
कविता

कोरोना समय में कविता :  ‘लहू से सनी रोटियां दुनिया देख रही है ’

समकालीन जनमत
लखनऊ. यह समय अभिधा का है। जो व्यंजना में कविता की बात करते हैं, कहीं न कहीं उनके अवचेतन में डर है। सत्ता का आतंक...
कविता

उर्दू-हिंदी की साझा संस्कृति के शायर संजय कुमार कुंदन

समकालीन जनमत
ख़ुर्शीद अक़बर संजय कुमार कुन्दन उर्दू-हिन्दी के ऐसे एकमात्र कवि-शायर हैं , जो साझा- संस्कृति के सशक्त प्रतिनिधि ( नुमाइनदा) की हैसियत रखते हैं और...
कविता

‘ फ्री कालिंग है पर बातचीत के हालात नहीं हैं ‘

समकालीन जनमत
आठ मई की शाम समकालीन जनमत द्वारा आयोजित फ़ेसबुक लाइव में जब कवि पंकज चतुर्वेदी अपने कविता पाठ के लिए प्रस्तुत हुए तो काफ़ी देर...
कविता पुस्तक

जीवन, मानवीय संबंध और संघर्षों की निरंतरता की कविताएँ

डॉ. अली इमाम खाँ बलभद्र का कविता-संग्रह ” समय की ठनक ” को पढ़ने, समझने और महसूस करने का मौक़ा मिला। इन कविताओं से गुज़रते...
कविता

कोरोना काल में कविता संवाद : पहले चार लाठियां मिलती हैं / फिर दो रोटियां / सुन्दरपुर दूर है अभी

लखनऊ. जन संस्कृति मंच की ओर से फेसबुक पर चलाये जा रहे ‘कविता संवाद’ लाइव कार्यक्रम के तहत 3 मई को  आठ रचनाकारों की कोरोना...
कविता

कथाओं में जीवन को बुनता कवि वसंत सकरगाए

संजीव कौशल कविता कुछ ना कुछ बचाने की कोशिश है कोई आँसू कोई मुस्कान कुछ उम्मीद कुछ निराशा कुछ दर्द ताकि मुश्किल वक्त में कुछ...
कविता

चंद्र की कविताएँ बोलती भी हैं और भेद भी खोलती हैं

“चंद्र मेरी आज तक की जानकारी में पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो खेती-बाड़ी में, मजूरी में पिसते अंतिम आदमी का जीवन जीते हुए पढ़ना-लिखना व...
कविता

दिनेश कुमार शुक्ल ने किया अपनी कविताओं का लाइव पाठ

दीपक सिंह
समकालीन जनमत से मजदूर दिवस के लाइव कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में आज 1 मई को सांय 4 बजे से हिन्दी जगत को ‘जाग मेरे...
कविता

भूख दुनिया की सबसे पहली महामारी है

आज 1 मई है, जिसे पूरी दुनिया में मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है. मजदूरों के सम्मान, उनके हक और उनके संघर्षों को...
कविता

मैं इस श्रम को, आग को और पानी को बचा लेना चाहता हूँ

मजदूर दिवस पर अंजन कुमार  का काव्य पाठ. अंजन कुमार जन संस्कृति मंच, भिलाई इकाई के सचिव हैं । आज 1 मई को मजदूर दिवस...
कविता

कोरोना काल में स्त्री कविता :  ‘ये खाई सदियों पुरानी है/यह सूखी रोटी और पिज्जा के बीच की खाई है’

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच की ओर से फेसबुक पर चलाये जा रहे ‘कविता संवाद’ लाइव कार्यक्रम के तहत 26 अप्रैल को सात कवयित्रियों  की रचनाएं सुनाई...
कविता

यातना का साहस भरा साक्षात्कार हैं लाल्टू की कविताएँ

आशुतोष कुमार
धरती प्रकृति ने बनाई है. लेकिन दुनिया आदमी ने बनाई हैं. दुनिया की बीमारियाँ , पागलपन और विक्षिप्तियाँ भी आदमी ने बनाई हैं. लेकिन कविता,...
कविता

कोरोना काल में कविता :  ‘ रिसते दिखे पाँवों से खून, इस पर क्या लिखूं / दिखे आंखों से बहते खून…..

समकालीन जनमत
कविता अपने समय को रचती है  और समय  भी अपने कवि को बनाता है। कोरोना काल मानव जाति के लिए बड़ा  संकट का काल है।...
कविता

दिव्या की कविताएँ काव्य जगत के आपसी संचार की टूटन को जोड़ने का प्रयास करती हैं

समकालीन जनमत
सुघोष मिश्र _________________________________________ अभिव्यक्ति किसी रचना का पहला सोपान है। हम अपने सुख, दुःख, आशा, निराशा, भय, क्रोध, स्वप्न और संदेश विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त...
कविता शख्सियत

मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा

समकालीन जनमत
ममता मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा, जनकवि  रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 5 दिसम्बर...
कविता

कोरोना काल में कविता : ‘ प्रेम संवाद की भाषा बन जाए ’

समकालीन जनमत
यह कोरोना काल है। पूरी दुनिया इस महामारी के खिलाफ जंग लड़ रही है। लाॅक डाउन चल रहा है। लोग घरों में हैं। सामाजिक व...