Category : सिनेमा

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12वां पटना फिल्मोत्सव : आखिरी दिन फिल्म ‘तीसरी कसम’ दिखाई गई, नाटक ‘सुखिया मर गया भूख से’ का मंचन

समकालीन जनमत
पटना। हिरावल-जन संस्कृति मंच द्वारा स्थानीय कालिदास रंगालय में आयोजित तीन दिवसीय 12वें ‘ पटना फिल्मोत्सव: प्रतिरोध का सिनेमा’ के आखिरी दिन आज महान कथाकार...
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12वां पटना फिल्मोत्सव : दलितों, किसानों, बच्चों, आदिवासियों, बुद्धिजीवियों और संस्कृतिकर्मियों के जीवन के सवालों से रूबरू हुए दर्शक

पटना। 12वें पटना फिल्मोत्सव के दूसरे दिन प्रदर्शित फिल्मों ने भारतीय समाज और व्यवस्था के बुनियादी अंतविर्रोधों को दिखाते हुए विषमता के लिए जिम्मेवार विकास...
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फैज की नज्म ‘इंतेसाब’ के गायन से शुरू हुआ पटना फिल्मोत्सव

पटना। मशहूर शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘इंतेसाब’  के गायन से 12 वें  पटना फिल्मोत्सव की शुरुआत हुई। हिरावल के कलाकारों ने इसे गाया। इस...
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The Social Dilemma : नए बाज़ार और शोषण के आधुनिकीकरण को उजागर करती फ़िल्म

समकालीन जनमत
' The Social Dilemma' वर्तमान समय में सोशल मीडिया की लत, सर्विलांस कैपिटलिज़्म, data-mining, सोशल मीडिया का राजनीतिक ध्रुवीकरण में इस्तेमाल, बढ़ते मानसिक रोग, आत्महत्याओं...
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पाताललोकः सत्ता के षड्यंत्रकारी चरित्र को लक्षित करती वेब श्रृंखला

दुर्गा सिंह
‘पाताललोक‘ अमेज़न प्राइम वीडियो पर आयी वेब श्रृंखला है। पिछले वर्ष मई में प्रसारित हुई यह श्रृंखला अपराध की छिपी हुई दुनिया और उसकी हकीकत...
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औरतों की बहुत सी कहानियाँ हमारा इंतज़ार कर रही हैं

समकालीन जनमत
(कोविड -19 की त्रासदी ने हमारे जीवन के सभी पहलुओं पर असर डाला है . हमारी सिनेमा बिरादरी के क्रियाकलाप पर भी इसका बहुत प्रभाव...
सिनेमा

काली स्लेट पर सफेद चॉक से लिखी दोस्ती की इबारत

समकालीन जनमत
  मनोज कुमार    आदर्श विद्यार्थी के जो पाँच लक्षण हमें बताए गए थे उन लक्षणों में सिनेमा देखना नहीं शामिल था| बगुले की तरह...
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मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ: ज़िंदगी मुख़्तसर सी मिली थी हमें, हसरतें बेशुमार ले के चलें !

आशीष कुमार
यह ‘लैला'(कल्कि कोचलिन)की दुनिया है।लैला यानी ‘सेरेब्रल पॉल्सी’ की शिकार।वह शतरंज खेलती है।फेसबुक चलाती है। संगीत सुनती है। धुने बनाती है। डांस भी करती है।...
सिनेमा

“सरकार कितना ही दमन करे लेकिन हमें लड़ने की जरूरत है”

(पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है ....
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सोनवा के पिंजरा में बंद भईलें तकदीर, चिरईं के जियरा भईलें उदास !            

जनार्दन
सन बासठ में बनारस की छविगृहों में जिन कंठों ने जै गंगा मैया की अलख जगाई-लगाई थी, उसमें बारहों बरन के आदमी थे – खाली...

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