समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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साहित्य-संस्कृति

जातिमुक्त लोकतांत्रिक भारत : बाबासाहब का विज़न

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डॉ. आंबेडकर की 136वीं जयंती पर ‘हम देखेंगे’ : अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान की विचारगोष्ठी रपट — सौरभ कुमार बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की...
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जसम, छत्तीसगढ़ का पहला राज्य सम्मेलन सम्पन्न

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  बुद्धिजीवी तो वहीं है, जो सूरज के धब्बे को भी उंगली दिखाकर कहेगा कि वहां धब्बा है- रामजी राय रायपुर. न्याय आज्ञाकारिता से ऊपर...
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फासीवाद के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ जसम का पहला राज्य सम्मेलन 12 अप्रैल को

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देश के नामचीन लेखक, साहित्यकार, प्रबुद्धजन और विचारक जुटेंगे सम्मेलन में. रायपुर. फासीवाद के ख़िलाफ़- सृजन और प्रतिरोध जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित जन संस्कृति...
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जन संस्कृति मंच, झारखण्ड का पांचवां राज्य सम्मेलन नयी कार्यकारिणी के चुनाव तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ सम्पन्न

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सुरेंद्र बेदिया झारखंड जन संस्कृति मंच के नये सचिव, शंभु बादल अध्यक्ष और जावेद इस्लाम कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये 71 सदस्यीय राज्य परिषद, 25 सदस्यीय...
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झारखंड जन संस्कृति मंच का पाँचवा राज्य सम्मेलन का आरंभ

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जन संस्कृति सामूहिकता से पैदा होती है: मेघनाथ रामगढ : 4 अप्रैल 2026 आज रामगढ में आयोजित झारखंड जन संस्कृति मंच के दो दिवसीय पाँचवे...
कविता

गरिमा सिंह की कविताएँ स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित हैं

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सुमन शेखर गरिमा सिंह की कविताएँ मूलतः स्मृति और अनुभव के परिष्कार से निर्मित एक ऐसी संवेदनात्मक भूमि है, जहाँ स्त्री-अस्मिता, अस्तित्वगत बेचैनी और काव्य-रूढ़ियों...
कवितानई क़लम

सत्यव्रत की कविताएँ आदिम संवेदनाओं का एक कोलाज हैं।

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विनय सौरभ सत्यव्रत की इन कविताओं से गुज़रते हुए यह स्पष्ट होता है कि ये कविताएँ आधुनिक जीवन की विडंबनाओं, महानगर के दमघोंटू यथार्थ और...
कविता

सत्या शर्मा ‘कीर्ति’ की कविताएँ स्त्री जीवन की जटिल सच्चाइयों को सहजता से उद्घाटित करती हैं

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प्रज्ञा गुप्ता “तीस पार की नदियां” और ‘सीझते हुए सपने’ संग्रह की कवयित्री सत्या शर्मा कीर्ति की कविताओं में स्त्रियों का जीवन पूरी संवेदना के...
साहित्य-संस्कृति

शमशेर बहादुर सिंह जयंती समारोह : बात बोलेगी, हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही

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प्रगतिशील कविता के सबसे अनोखे और प्रयोगधर्मी कवि शमशेर बहादुर सिंह के पैतृक गाँव कस्बा एलम जिला शामली में 2023 से ‘शमशेर बहादुर कला मंच’...
कविता

शम्भु बादल की कविताएँ लोक-अनुभव और वैश्विक चेतना का रसायन हैं

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सुशील कुमार शम्भु बादल की कविताएँ समकालीन हिंदी कविता में उस धरातल का प्रतिनिधित्व करती हैं जहाँ भाषा, दृश्य और नैतिक आग्रह एकाकार होकर एक...
कविता

जगदीश पंकज के नवगीतों में समकालीन चेतना और सामाजिक प्रतिरोध

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 अशोक शर्मा ‘कटेठिया’ जगदीश पंकज समकालीन हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ नवगीतकार हैं। उनके नवगीत अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय परिस्थितियों पर मुखर होकर...
कविता

खुरदरी ज़िंदगी की मनुष्यता को तरजीह देने वाले कवि बलभद्र

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शैलेन्द्र कुमार शुक्ल बीती सदी के नवें दसक में उभरी नई पीढ़ी के एक महत्वपूर्ण कवि बलभद्र जनवादी काव्यशैली और लोकभाषिक अस्मिता के साथ हिंदी...
कविता

सुमन शेखर की कविताएँ प्रयोगधर्मी और लंबी साँस की कविताएँ हैं

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आदित्य शुक्ला सुमन शेखर की ये कविताएँ लंबी साँस की कविताएँ हैं। जैसे किसी चित्रकार ने एक लंबी साँस में एक चित्र खींच दिया हो।...
पुस्तक

पहाड़ों की ठंडी हवा सरीखी कविताएँ :अशोक कुमार के काव्य संग्रह ‘रिक्तियों में पहाड़’ की पुस्तक समीक्षा

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आलोक कुमार मिश्रा हिन्द युग्म प्रकाशन से कवि अशोक कुमार का नया काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है- ‘रिक्तियों में पहाड़।’ संग्रह के नाम में ही...
कविता

सत्यपाल सहगल की कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन है

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अरुण आदित्य सत्यपाल सहगल की कविताएँ सहज में सुंदर की अनुभूति की कविताएँ हैं। इन कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन...
कविता

दुर्गेश की कविताऍं कच्ची-पक्की स्मृतियों की ताज़ी व पहली तोड़ हैं

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नीरज हमारे इर्द-गिर्द हमेशा अनुत्तरित आत्माभिव्यक्तियों के गुबार मौजूद होते हैं जिन्हें केवल सहृदय ही महसूस कर पाते हैं, कवि-हृदय इस मामले में सबसे सहज...
कविता

शचीन्द्र आर्य की कविताएँ वापस लौट आने की संभावना हैं

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राग रंजन शचीन्द्र आर्य की कविताएँ आज की हिंदी कविता में एक ऐसे हस्तक्षेप के रूप में पढ़ी जानी चाहिए, जो तेज़ आवाज़ में नहीं,...
कविता

कवि जितेंद्र विसारिया की कविताएँ समाज और सत्ता के खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं।

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रौशन कुमार कवि जितेंद्र विसारिया जी की कविताएँ समाज और सत्ता के दोहरेपन तथा खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं। इनकी कविताएँ धर्म, मिथक, इतिहास और...
जनमत

संविधान निर्माता डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन

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  सुल्तानपुर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन आइसा के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक द्वारा सुल्तानपुर के बरामदपुर गांव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस...

‘काँस के फूलों ने कहा, जोहार !’: देशज सौंदर्य और स्त्री चेतना के विविध स्वर

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डॉ. जिन्दर सिंह मुंडा ‘काँस के फूलों ने कहा, जोहार !’ डॉ प्रज्ञा गुप्ता का पहला काव्य- संग्रह है । सद्य: प्रकाशित इस काव्य- संग्रह...
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