समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-आठ

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  अखिल भारतीय स्वरूप लेता किसान आंदोलन दिल्ली को घेरे हुए किसानों के पड़ाव के मजबूत होते ही  देश के अन्य भागों में किसान...
कविता

सुशील कुमार की कविताएँ मौजूदा सत्ता संरचना और व्यवस्था का प्रतिपक्ष रचती हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   मुक्तिबोध कालयात्री की बात करते हैं। मतलब कविता अपने काल के साथ सफर करती है । उसका अटूट रिश्ता काल से है...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-सात

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  किसान आन्दोलन का नया मोर्चा- गाजीपुर बार्डर  किसान धीरे-धीरे दिल्ली की सीमा पर जम रहे थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में  मजबूत जनाधार वाली...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-छः

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  पंजाब और हरियाणा की किसान एकता 26 और 27 नवम्बर  की  रात को किसान सिंघु, टीकरी  बॉर्डर की सड़कों पर बैठकर व्यतीत किये।...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-पाँच

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  दिल्ली की सीमा पर किसान  26‌-27 नवंबर, 2020 इस दिन दिल्ली को कुछ और ही देखना था। 26-27 नवंबर को रामलीला मैदान में...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-चार

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  दिल्ली किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि किसान आंदोलन के प्रति केन्द्र की सरकार हो या राज्यों की सरकारें, किसानों के सवाल पर उनका रुख...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-तीन

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  मोदी सरकार जब 2014 के मई में भारत के सत्ता पर काबिज होने के लिए कारपोरेट समर्थन के अदृश्य सहयोग और हिंदुत्व  राष्ट्रवादी...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-दो

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  कृषि संकट का चक्रीय स्वरूप और सत्ता की  प्रतिक्रिया ‌ साठ के दशक के मध्य में कृषि  में संकट के संकेत आने लगे...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

किसान आंदोलनः आठ महीने का गति पथ और उसका भविष्य-एक

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  आठ महीने से किसान दिल्ली की तीन सीमाओं पर और हरियाणा-राजस्थान की सीमा शाहजहांपुर पर डेरा डाल कर बैठे हैं। किसानों ने इस...
कविता

शुभम श्री की कविताएँ: मामूली से दिखने वाले बेहद ज़रूरी सवाल

समकालीन जनमत
दीपशिखा शुभम की कविताएँ हमारे समय और समाज में मौजूद रोज़मर्रा के उन तमाम दृश्यों और ज़रूरतों की भावनात्मक अभिव्यक्ति हैं, जिन्हें आमतौर पर देखते...
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