ख़बर

‘ किसान आन्दोलन संविधान, लोकतंत्र और जन अधिकारों की रक्षा के लिए जनता के संघर्ष की आधारशिला ’

समकालीन जनमत
नई दिल्ली। भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर परेड की सफलता पर किसानों को बधाई देते हुए आन्दोलन पर आन्दोलन पर दमन...
ख़बर

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर माले ने निकाला मशाल जुलूस, तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग

पटना। भाकपा-माले के राज्यव्यापी आह्वान पर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग पर सोमवार को पूरे राज्य में...
साहित्य-संस्कृति

लखनऊ में प्रतिभा कटियार की ‘ मारीना ’ : विमोचन और चर्चा

कौशल किशोर
‘ मारीना ’ कवि-कथाकार-पत्रकार प्रतिभा कटियार की हिन्दी के पाठकों के लिए खोज है। यह उस कवि की तलाश है जो अपने देश रूस से...
सिनेमा

The Social Dilemma : नए बाज़ार और शोषण के आधुनिकीकरण को उजागर करती फ़िल्म

समकालीन जनमत
' The Social Dilemma' वर्तमान समय में सोशल मीडिया की लत, सर्विलांस कैपिटलिज़्म, data-mining, सोशल मीडिया का राजनीतिक ध्रुवीकरण में इस्तेमाल, बढ़ते मानसिक रोग, आत्महत्याओं...
कविता

उम्मीद की दूब के ज़िंदा रहने की कामना से भरी ज्योति रीता की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुंदन सिद्धार्थ   “जब धरती पर सारी संवेदनाएँ समाप्ति पर होंगी तब बचा लेना प्रेम अपनी हथेली पर कहीं जब धरती बंजरपन की ओर अग्रसर...
ज़ेर-ए-बहस

किसानों का साथ देने सड़कों पर उतरे लेखक और बुद्धिजीवी

सुशील मानव
आज किसान आंदोलन को दो महीने (60 दिन) पूरे हो गये। इत्तेफाक से आज स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ़ सशस्त्र जंग छेड़ने वाले...
सिनेमा

पाताललोकः सत्ता के षड्यंत्रकारी चरित्र को लक्षित करती वेब श्रृंखला

दुर्गा सिंह
‘पाताललोक‘ अमेज़न प्राइम वीडियो पर आयी वेब श्रृंखला है। पिछले वर्ष मई में प्रसारित हुई यह श्रृंखला अपराध की छिपी हुई दुनिया और उसकी हकीकत...
ज़ेर-ए-बहस

सांप्रदायिक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है बाबा खान की याद में बने अस्पताल का नाम बदलना

राम पुनियानी हाल में हरियाणा के मुख्यमंत्री एम.एल. खट्टर की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद के खान...
चित्रकला

‘ आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान , जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर देगा ’

समकालीन जनमत
तुम देखोगे सामने तुम्हारे आँखों के, खलता की खेती हरी तुम्हारी डूबेगी/आ रहा फावड़ा लिए समय का यह किसान, जो तुझे काटकर मुझे पाटकर भर...
दुनिया

पूंजीवाद के उदय और विकास की कहानी हदास थिएर की जुबानी

गोपाल प्रधान
सबसे पहले वे इस झूठ का भंडाफोड़ करती हैं कि पूंजीवाद कोई स्वाभाविक या शाश्वत चीज है । जो भी लोग ऐसा मानते हैं उनका...

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