जनमत

प्रवासी मजदूर जिनका कोई वतन नहीं

कोविड-19 को लेकर हुए लॉक डाउन के बाद हमारे देश में प्रवासी श्रमिकों की समस्या सबसे बड़े रूप  में उभर कर सामने आई है. वे...
जेरे बहस स्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
जनमत शिक्षा

स्कूली बच्चे और ऑनलाइन पढ़ाई: क्या हम तैयार हैं?

समकालीन जनमत
डॉ. दीना नाथ मौर्य पिछले दिनों स्पेन में जब 49 दिनों की तालाबंदी के बाद बच्चों को खेलने के लिए पार्कों में ले जाया गया...
खबर जनमत

डूटा के रेफरेंडम से सामने आई ऑनलाइन परीक्षा की हक़ीक़त

समकालीन जनमत
राजीव कुँवर कुछ साल पहले जब आप दिल्ली विश्वविद्यालय आए होंगे तब मैट्रो स्टेशन का नाम था ‘विश्वविद्यालय’। अब उसका नाम बदले हुए रंग में...
कविता

‘ पांव में छाले आंख में आंसू पीड़ा भरी कहानी लिख/मजदूरों के साथ हुई जो सत्ता की मनमानी लिख ’

समकालीन जनमत
लखनऊ.  कोरोना काल में बड़ी मात्रा में कविताएं रची जा रही हैं। मानव संकट सृजन के लिए आधार बनता है। आज की रचनाओं में भावों...
जनमत

कोरोना और ईद-उल-फ़ित्र के बीच प्रवासी मज़दूर

समकालीन जनमत
आरफ़ा अनीस पूरी दुनिया इस वक़्त कोरोना नामक वैश्विक महामारी की चपेट में है। सीमित संसाधनों और ग़लत राजनीतिक नीतियों के बीच भारत में अब...
खबर

सांस्कृतिक-सामाजिक संगठनों ने कहा : मानवाधिकार-कर्मियों और लेखकों-पत्रकारों की गिरफ्तारियों पर रोक लगे

समकालीन जनमत
 जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, प्रतिरोध का सिनेमा, संगवारी, जन नाट्य मंच और जनवादी लेखक संघ ने असहमति...
साहित्य-संस्कृति

नक्सलबाड़ी आंदोलन और भारतीय साहित्य

गोपाल प्रधान
भारतीय साहित्य के इतिहास में नक्सलवादी आंदोलन का एक विशेष स्थान है. सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन के साथ साहित्य में भी नक्सल धारा की उपस्थिति बनी हुई...
पुस्तक

इंडोनेशिया का कत्लेआम

गोपाल प्रधान
2020 में पब्लिक अफ़ेयर्स से विनसेन्ट बेविन्स की किताब ‘ द जकार्ता मेथड : वाशिंगटन’स एन्टीकम्युनिस्ट क्रूसेड & द मास मर्डर प्रोग्राम दैट शेप्ड आवर...
जेरे बहस

दिल्ली पुलिस ने बदला ‘आपदा’ को ‘अवसर’ में

समकालीन जनमत
संजीव कुमार हत्यारों के लिए, हत्यारों के साथ, सदैव! दिल्ली पुलिस ने जिस तरह आपदा को अवसर में बदला है, वह अभूतपूर्व है. कल ‘पिंजरा...
जेरे बहस

मजदूरों की यातना का समाधान है-भूमि सुधार !

समकालीन जनमत
डॉ. आर. राम   महामारी और तालाबंदी से बेरोजगार होकर सड़कों पर बदहाल हालत में पैदल अपने घरों को जाते हुये मरते-खपते   मजदूरों की तस्वीरें...
कविता

कविता कृष्णपल्लवी की कविताएँ बाहरी कोलाहल और भीतरी बेचैनी से अर्जित कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी साहित्यिक एक्टिविज्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली पोस्टर-कविता, हमेशा से विरोध प्रदर्शनों का अहम् हिस्सा रही हैं. सबसे सघन समय में...
इतिहास

भारत में भूमि-व्यवस्था, औपनिवेशिक शासन और खेत मजदूर

दुर्गा सिंह
(यह आलेख मुख्य शीर्षक से सम्बंधित  एक प्रस्तावना जैसा है। कोई अंतिम बात नहीं। इसे इसी रूप में पढ़ा जाय, कोई बहस निकल आये तो,...
ये चिराग जल रहे हैं शिक्षा

शुक्रिया, छंगा मास्साब, बहुत शुक्रिया!

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  पांचवीं  क़िस्त  में  प्रस्तुत  है   नवीन   जोशी ...
खबर

लॉक-डाउन के दौरान मज़दूरों की दुर्दशा और सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ देश भर में प्रदर्शन

Abhishek Kumar
  22 मई, 2020 दिल्ली ऐक्टू समेत अन्य केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों द्वारा आयोजित विरोध-दिवस के मौके पर देश के कई राज्यों में, लॉक-डाउन के...
जेरे बहस

क्या शराब की बिक्री से ही सम्भव होती है कर्मचारियों की तनख्वाह ?

एक जमाने में पंकज उदास की गायी यह गज़ल काफी लोकप्रिय हुई थी : हुई मंहगी बहुत शराब थोड़ी-थोड़ी पिया करो लॉकडाउन में शराब की...
जनमत

निर्धन निर्माण अभिकरणों का योगदान और बेरोजगारी    

जनार्दन
मेहनत करने के बाद भी निर्धनता का विलोपन न होना अप्राकृतिक है. अप्राकृतिक निर्धनता का सर्जन शक्तिशाली संस्थाओं द्वारा होता है, जिसे वह अपनी जन-विरोधी...
सिनेमा

आदिवासी समाज के उत्पीड़न और आक्रोश की कहानी

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक गोविंद निहलानी की आक्रोश । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
खबर

मुजफ्फरपुर में उठी डॉ. कफील खान को रिहा करने की मांग

समकालीन जनमत
मुजफ्फरपुर. उत्तरप्रदेश के जेल में महीनों से बंद प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान की रिहाई के लिए इंसाफ मंच द्वारा 18 मई को...
जनमत

जीवन-संघर्ष का करुण कोलाहल

समकालीन जनमत
श्रमिकों की बदहाल अवस्था और उनकी दुर्दशा के बहाने पूंजीवादी व्यवस्था का वह वीभत्स रूप हमारे सामने है जहाँ निम्न वर्ग के जीवन का कोई...