समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

चार कविता संग्रह का लोकार्पण, कविता पाठ और परिचर्चा

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लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से 11 अक्टूबर को  ‘चार कवि – चार किताबें’ के अंतर्गत शैलेश पंडित, उमेश पंकज, विमल किशोर तथा...
साहित्य-संस्कृति

‘ समय, समाज और साहित्य ’ का विमोचन और चर्चा

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लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से राष्ट्रीय पुस्तक मेला के साहित्यिक मंच पर कौशल किशोर की किताब ‘ समय, समाज साहित्य’ का विमोचन...
स्मृति

“ सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक रूप से उपेक्षित लोगों की आवाज़ थे डॉ रामविलास भारती ”

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मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ और जन संस्कृति मंच की ओर से शिक्षक एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रामविलास भारती के असामयिक निधन पर राहुल...
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कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में ‘ वीरेनियत-08’ 09 अक्टूबर को

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नई दिल्ली। हिन्दी के चर्चित कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में आयोजित वार्षिक काव्य-पाठ ‘वीरेनियत’ का आठवाँ आयोजन 9 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे से...
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फासीवादी सत्ता संस्कृति के खिलाफ संघर्ष के संकल्प के साथ जसम बिहार का सम्मेलन सम्पन्न

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जितेन्द्र कुमार अध्यक्ष तथा दीपक सिन्हा सचिव चुने गए समस्तीपुर । जन संस्कृति मंच (जसम) का दो दिवसीय सातवां बिहार राज्य सम्मेलन 26 व 27...
साहित्य-संस्कृति

‘ साझी संस्कृति का परचम बुलंद करते हैं राही मासूम रज़ा ’

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लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से उर्दू शायर तशना आलमी के नौंवे स्मृति दिवस के मौके पर 20 सितंबर को यूपी प्रेस क्लब...
साहित्य-संस्कृति

अस्तित्व और व्यक्तित्व की साहित्यकार हैं महादेवी वर्मा : प्रो. प्रज्ञा पाठक

इलाहाबाद।  कोरस इलाहाबाद द्वारा 12 सितंबर को हिन्दुस्तानी एकेडमी में महादेवी वर्मा छठा स्मृति समारोह का आयोजन किया गया । समारोह में  “महादेवी वर्मा की...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

भारत को बचाने की गांधीवादी कोशिश का दस्तावेज़  

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आलोक कुमार श्रीवास्तव   महात्मा गांधी उन चुनिंदा शख़्सियतों में से एक हैं जिनके उल्लेख के बिना आधुनिक विश्व का इतिहास अधूरा लगता है। उन्होंने...
साहित्य-संस्कृति

डॉ उषा राय की किताब “ कविताएं बदलाव की : सौंदर्य और वैचारिकी ” का लोकार्पण

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लखनऊ। शीरोज हैंग आउट, हजरतगंज में , 19 अगस्त को कवि-कथाकार डॉ उषा राय की हाल में प्रकाशित आलोचनात्मक कृति “कविताएं बदलाव की : सौंदर्य...
साहित्य-संस्कृति

‘ राष्ट्र का वर्तमान और प्रेमचंद ’ : “ हम देखेंगे ” की गोष्ठी में उठे कई नाज़ुक सवाल

समकालीन जनमत
देश भर में चल रहे प्रेमचंद जयंती कार्यक्रमों की कड़ी में आठ अगस्त को दिल्ली के सुरजीत भवन में अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘...
पुस्तक

उमर ख़ालिद: ज़मीर का क़ैदी

समकालीन जनमत
[यह शुरुआती वक्तव्य क्लिफ्टन डी’रोज़ारियो ने 28 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु में आयोजित ‘उमर खालिद एंड हिज़ वर्ल्ड: एन एंथोलॉजी’ किताब पर हुई परिचर्चा में...
पुस्तक

दक्षिणपंथ और फ़्रैंकफ़र्त स्कूल

गोपाल प्रधान
2026 में वर्सो से ए जे ए वुड्स की किताब ‘ द कल्चरल मार्क्सिज्म कनस्पिरेसी : ह्वाइ द राइट ब्लेम्स द फ़्रैंकफ़र्त स्कूल फ़ार द...
साहित्य-संस्कृति

कोरस ने अपनी यात्रा के दस वर्ष पूरे होने पर पटना में किया कविता पाठ का आयोजन 

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कोरस ने अपनी यात्रा के 10 वर्ष पूरे होने पर 26 जुलाई 2026 को पटना में कविता पाठ का आयोजन किया। यह पाठ पटना के...
ग्राउन्ड रिपोर्टसिने दुनिया

आदिवासियत : एक यात्रा (आखिरी किस्त)

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(अखड़ा राँची और औराविल फिल्म इंस्टिट्यूट की ओर से चौबीस दिवसीय डॉक्यूमेन्ट्री रिट्रीट एंड वर्कशॉप “आदिवासियत” की यह रिपोर्ट केवल सिनेमा वर्कशाप की रिपोर्ट नहीं...
साहित्य-संस्कृति

प्रेम के लिए लिखा गया एक प्रेम-पत्र है ‘ हज़ारों निशान ’

समकालीन जनमत
इलाहाबाद। बाल भारती स्कूल सिविल लाइन में 11 जुलाई को कोरस इलाहाबाद द्वारा युवा चर्चित कवि शिवांगी गोयल का काव्य संग्रह ” हजारो निशान ”...
साहित्य-संस्कृति

‘अजय कुमार का पूरा लेखन एक वृहत सांस्कृतिक आंदोलन है ’

समकालीन जनमत
स्मृति दिवस पर अजय कुमार की किताब  ‘ राग जौनपुरी ‘ पर चर्चा जौनपुर। कवि, लेखक, चित्रकार, अनुवादक अजय कुमार के पहले स्मृति दिवस पर...
ग्राउन्ड रिपोर्टसाहित्य-संस्कृतिसिने दुनिया

आदिवासियत : एक यात्रा (दूसरी किस्त)

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(अखड़ा राँची और औराविल फिल्म इंस्टिट्यूट की ओर से चौबीस दिवसीय  डॉक्यूमेन्ट्री रिट्रीट एंड वर्कशॉप “आदिवासियत” की यह रिपोर्ट केवल सिनेमा वर्कशाप की रिपोर्ट नहीं...
कविता

लोक से उपजी कविताओं का संग्रह ‘ दूर से दिख जाती है बारिश ’

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आलोक मिश्र   इस साल प्रकाशित हुए नए कविता संग्रहों में से जिन-जिन को पढ़ पाया उनमें ‘दूर से दिख जाती है बारिश’ अपनी तासीर...
साहित्य-संस्कृति

जनतंत्र को बचाने के संघर्ष के इस दौर में प्रासंगिक हैं विजेंद्र अनिल की कहानियां

सुधीर सुमन
विजेंद्र अनिल के कहानी संग्रह ‘फ़र्ज़’ का लोकार्पण  आरा (बिहार)। ‘‘ विजेंद्र अनिल की कहानियाँ सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि संपन्न कहानियाँ हैं। इनमें सामंतवाद, साम्राज्यवाद, सांप्रदायिकता और...
सिने दुनिया

आदिवासियत : एक यात्रा ( पहली किस्त )

समकालीन जनमत
(अखड़ा राँची और औराविल फिल्म इंस्टिट्यूट की ओर से चौबीस दिवसीय  डॉक्यूमेन्ट्री रिट्रीट एंड वर्कशॉप “आदिवासियत” की यह रिपोर्ट केवल सिनेमा वर्कशाप की रिपोर्ट नहीं...
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