समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

‘राजकमल चौधरी और फणीश्‍वर नाथ रेणु दो गुरु हैं मेरे…’ : आलोकधन्वा

समकालीन जनमत
  वरिष्‍ठ कवि आलोक धन्‍वा से कवि-आलोचक कुमार मुकुल की बातचीत   अपनी बातचीत में आप हिंदी कविता, कहानी के महत्‍वपूर्ण हस्‍ताक्षरों राजकमल चौधरी और...
कविता

जमुना बीनी की कविताएँ आदिवासियत की उपेक्षा का प्रतिकार हैं

समकालीन जनमत
कविता कादंबरी आदिवासी अस्मिता पर केंद्रित हिंदी कविताओं में कुछ सामान्य प्रवृत्तियाँ हैं जिसमें प्रकृति के साथ साहचर्य का भाव, ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया पर...
पुस्तक

राजनीतिक प्रतिरोध में अहिंसा की भूमिका

गोपाल प्रधान
किताब में यही बताया गया है कि बीसवीं सदी में जनता ने हिंसा के बगैर सत्ता पर कब्जा करने की क्षमता अर्जित की । लेखकों...
कविता

घुँघरू की कविताएँ प्रेम के अनगढ़ रूप और सामाजिक संवेदना से भरपूर हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय घुँघरू की कविताओं में प्रेम और संवेदनों को लेकर एक अलग-सी कमनीयता है वह भी ज़िद के साथ। एक युवा कवयित्री प्रेम को...
कहानी

बस! बहुत हो चुका !

समकालीन जनमत
(यह लिली पोटपारा द्वारा लिखित स्लोवेनियन भाषा की कहानी है। लिली पोटपरा स्लोवेनियन साहित्य की एक प्रसिद्ध व पुरस्कृत लेखिका व अनुवादिका हैं। इस कहानी...
कहानी

पढिए स्लोवेनियन कहानीकार लिली पोटपारा की कहानी ‘ खिड़की से ’

समकालीन जनमत
 (‘खिड़की से ’लिली पोटपारा द्वारा लिखित स्लोवेनियन भाषा की कहानी है। लिली पोटपरा स्लोवेनियन साहित्य की एक प्रसिद्ध व पुरस्कृत लेखिका व अनुवादिका हैं। उनके...
कहानी

पढिए स्लोवेनियन कहानीकार लिली पोटपारा की कहानी ‘ मोबाइल फ़ोन ’

समकालीन जनमत
(लिली पोटपारा द्वारा लिखित स्लोवेनियन भाषा की यह एक बहुचर्चित कहानी है। लिली पोटपरा स्लोवेनियन साहित्य की एक प्रसिद्ध व पुरस्कृत लेखिका व अनुवादिका हैं।...
कहानी

पढिए स्लोवेनियन कहानीकार लिली पोटपारा की कहानी ‘ झूठ ’

समकालीन जनमत
( ‘लिली पोटपरा स्लोवेनियन साहित्य की एक प्रसिद्ध व पुरस्कृत लेखिका व अनुवादिका हैं। उनके कहानी संग्रह (Bottoms up stories) को 2002 में प्रोफ़ेशनल एसोसिएशन...
कविता

पार्वती तिर्की की कविताएँ आदिवासी समाज और प्रकृति के साहचर्य, सातत्य और सौंदर्य की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
रोज़ी कामेई आदिवासी समुदायों की एक ख़ास विशेषता यह होती है कि वे इंसानों से पहले धरती, समस्त जीव-जगत, प्रकृति एवं सृष्टि के हर सजीव-निर्जीव...
साहित्य-संस्कृति

   प्रगतिशील साहित्य के पक्ष में बहस का एक तेवर : केदारनाथ अग्रवाल का आलोचनात्मक लेखन

गोपाल प्रधान
केदारनाथ अग्रवाल के आलोचनात्मक लेखन पर उनके जीवनकाल में ध्यान नहीं दिया गया । रामविलास शर्मा भी उनके गद्य की तारीफ़ उनकी चिट्ठियों के प्रसंग...
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