समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

डॉ उषा राय की किताब “ कविताएं बदलाव की : सौंदर्य और वैचारिकी ” का लोकार्पण

समकालीन जनमत
लखनऊ। शीरोज हैंग आउट, हजरतगंज में , 19 अगस्त को कवि-कथाकार डॉ उषा राय की हाल में प्रकाशित आलोचनात्मक कृति “कविताएं बदलाव की : सौंदर्य...
साहित्य-संस्कृति

‘ राष्ट्र का वर्तमान और प्रेमचंद ’ : “ हम देखेंगे ” की गोष्ठी में उठे कई नाज़ुक सवाल

समकालीन जनमत
देश भर में चल रहे प्रेमचंद जयंती कार्यक्रमों की कड़ी में आठ अगस्त को दिल्ली के सुरजीत भवन में अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ‘...
पुस्तक

उमर ख़ालिद: ज़मीर का क़ैदी

समकालीन जनमत
[यह शुरुआती वक्तव्य क्लिफ्टन डी’रोज़ारियो ने 28 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु में आयोजित ‘उमर खालिद एंड हिज़ वर्ल्ड: एन एंथोलॉजी’ किताब पर हुई परिचर्चा में...
पुस्तक

दक्षिणपंथ और फ़्रैंकफ़र्त स्कूल

गोपाल प्रधान
2026 में वर्सो से ए जे ए वुड्स की किताब ‘ द कल्चरल मार्क्सिज्म कनस्पिरेसी : ह्वाइ द राइट ब्लेम्स द फ़्रैंकफ़र्त स्कूल फ़ार द...
साहित्य-संस्कृति

कोरस ने अपनी यात्रा के दस वर्ष पूरे होने पर पटना में किया कविता पाठ का आयोजन 

समकालीन जनमत
कोरस ने अपनी यात्रा के 10 वर्ष पूरे होने पर 26 जुलाई 2026 को पटना में कविता पाठ का आयोजन किया। यह पाठ पटना के...
ग्राउन्ड रिपोर्टसिने दुनिया

आदिवासियत : एक यात्रा (आखिरी किस्त)

समकालीन जनमत
(अखड़ा राँची और औराविल फिल्म इंस्टिट्यूट की ओर से चौबीस दिवसीय डॉक्यूमेन्ट्री रिट्रीट एंड वर्कशॉप “आदिवासियत” की यह रिपोर्ट केवल सिनेमा वर्कशाप की रिपोर्ट नहीं...
साहित्य-संस्कृति

प्रेम के लिए लिखा गया एक प्रेम-पत्र है ‘ हज़ारों निशान ’

समकालीन जनमत
इलाहाबाद। बाल भारती स्कूल सिविल लाइन में 11 जुलाई को कोरस इलाहाबाद द्वारा युवा चर्चित कवि शिवांगी गोयल का काव्य संग्रह ” हजारो निशान ”...
साहित्य-संस्कृति

‘अजय कुमार का पूरा लेखन एक वृहत सांस्कृतिक आंदोलन है ’

समकालीन जनमत
स्मृति दिवस पर अजय कुमार की किताब  ‘ राग जौनपुरी ‘ पर चर्चा जौनपुर। कवि, लेखक, चित्रकार, अनुवादक अजय कुमार के पहले स्मृति दिवस पर...
ग्राउन्ड रिपोर्टसाहित्य-संस्कृतिसिने दुनिया

आदिवासियत : एक यात्रा (दूसरी किस्त)

समकालीन जनमत
(अखड़ा राँची और औराविल फिल्म इंस्टिट्यूट की ओर से चौबीस दिवसीय  डॉक्यूमेन्ट्री रिट्रीट एंड वर्कशॉप “आदिवासियत” की यह रिपोर्ट केवल सिनेमा वर्कशाप की रिपोर्ट नहीं...
कविता

लोक से उपजी कविताओं का संग्रह ‘ दूर से दिख जाती है बारिश ’

समकालीन जनमत
आलोक मिश्र   इस साल प्रकाशित हुए नए कविता संग्रहों में से जिन-जिन को पढ़ पाया उनमें ‘दूर से दिख जाती है बारिश’ अपनी तासीर...
साहित्य-संस्कृति

जनतंत्र को बचाने के संघर्ष के इस दौर में प्रासंगिक हैं विजेंद्र अनिल की कहानियां

सुधीर सुमन
विजेंद्र अनिल के कहानी संग्रह ‘फ़र्ज़’ का लोकार्पण  आरा (बिहार)। ‘‘ विजेंद्र अनिल की कहानियाँ सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि संपन्न कहानियाँ हैं। इनमें सामंतवाद, साम्राज्यवाद, सांप्रदायिकता और...
सिने दुनिया

आदिवासियत : एक यात्रा ( पहली किस्त )

समकालीन जनमत
(अखड़ा राँची और औराविल फिल्म इंस्टिट्यूट की ओर से चौबीस दिवसीय  डॉक्यूमेन्ट्री रिट्रीट एंड वर्कशॉप “आदिवासियत” की यह रिपोर्ट केवल सिनेमा वर्कशाप की रिपोर्ट नहीं...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

निराला का  साहित्य-संस्कृति सम्बंधी चिंतन

दुर्गा सिंह
  निराला प्रायः कवि के रूप में समादृत  हुए हैं।  हिंदी की सार्वजनिक दुनिया  में लेखक,  रचनाकार को विशेष पहचान में स्थिर करने की,  विचार...
पुस्तक

पूंजीवाद से बचाव

गोपाल प्रधान
2026 में सिमोन & शूस्टर से क्लारा ई मैत्तेई की किताब ‘एस्केप फ़्राम कैपिटलिज्म: ऐन इंटरवेंशन’ का प्रकाशन हुआ । शुरुआत 1920 में ब्रसेल्स के...
पुस्तक

नाउम्मीदी की राख तले ‘ उम्मीद चिनगारी की तरह ’

  प्रशांत जैन   एक कवि या लेखक, जो अपने मनुष्य होने की मूलभूत पहचान के प्रति सजग होता है, स्वभाव से ही स्वाभिमानी और...
साहित्य-संस्कृति

“ अरुण प्रकाश ने अपने युग की छोटी-छोटी अनुगूँजों को अपनी रचनाओं में सहेजा ”

बेगूसराय। जनवादी लेखक संघ, बेगूसराय जिला इकाई द्वारा हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार अरुण प्रकाश के स्मृति-दिवस पर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ भवन में सेमिनार...
साहित्य-संस्कृति

अपनी स्मृतियों को बचाना वर्तमान के संघर्ष का हिस्सा है : कौशल किशोर

समकालीन जनमत
बिहार की प्रगतिशील सांस्कृतिक विरासत और आज की चुनौतियाँ’ विषय पर केन्द्रित संगोष्ठी- सह काव्य पाठ का आयोजन बेगूसराय । जन संस्कृति मंच (जसम) और...
कविता

साहित्य, साम्राज्य और पर्यावरण

गोपाल प्रधान
2025 में द यूनिवर्सिटी आफ़ शिकागो प्रेस से अमिताभ घोष की किताब ‘ वाइल्ड फ़िक्शंस : एसेज आन लिटरेचर, एम्पायर, ऐंड द एनवायरनमेन्ट ’ का...
कविता

‘ देश द्रोह की हांडी ’ : रक्त रंजित समय में लिखी जाती है धारदार कविता

कौशल किशोर
मीता दास के कविता संग्रह ‘देशद्रोह की हांडी’ की कविताओं को पढ़ते हुए राजेंद्र यादव का एक पुराना इंटरव्यू याद हो आया जो उन्होंने कवि-लेखक...
साहित्य-संस्कृति

मज़दूर दिवस पर कविता पढ़ , गीत गाकर मेहनतकशों के योगदान को याद किया 

रायपुर. ” आज देश की बागडोर उन हाथों में चली गई है जिनका न तो आज़ादी के आंदोलन में कोई योगदान रहा है और न...
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