समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

पुस्तक

‘बलमा जी का स्टूडियो’ लोक की लय से लबरेज़ कहानी संग्रह है

समकालीन जनमत
गति उपाध्याय ‘यशपाल कथा सम्मान’ से सम्मानित कहानी संग्रह ‘बलमा जी का स्टूडियो’ लोक साहित्य और लोक भाषा की महत्वपूर्ण दस्तावेजी कृति है | भविष्य...
सिने दुनिया

दूब : प्रेम और दैहिक इच्छाओं की एक उदास धुन..

फ़िरोज़ ख़ान
आज की फिल्म: दूब (नो बेड ऑफ रोज़ेज़) (बांग्लादेशी)   इरफान खान की अदायगी वाली बांग्लादेशी फिल्म दूब (नो बेड ऑफ रोज़ेज़) अंतत: नेटफ्लिक्स पर...
कविता

रूपाली सिन्हा की कविताओं में स्त्री जीवन की नई राह गढ़ती दिखाई पड़ती है

समकालीन जनमत
कामिनी पिछले दिनों आथर्स प्राइड पब्लिकेशन से रूपाली सिन्हा का कविता संग्रह ‘असुविधा के लिए खेद नहीं है’ प्रकाशित हुआ है | इस संग्रह में...
कहानी

स्लोवेनियन कहानी ‘ सरप्राइज़ ’ 

समकालीन जनमत
(लिली पोटपारा द्वारा लिखित स्लोवेनियन भाषा की यह एक बहुचर्चित कहानी है। लिली पोटपरा स्लोवेनियन साहित्य की एक प्रसिद्ध व पुरस्कृत लेखिका व अनुवादिका हैं।...
कविता

‘ तेरह साल के लड़के ’

उमा राग
समकालीन जनमत पर प्रस्तुत है कवयित्री देवयानी भारद्वाज की कविता ‘तेरह साल के लड़के’। 12 मार्च को गाज़ियाबाद उत्तरप्रदेश में 13 वर्षीय आसिफ़ नामक एक...
स्मृति

साझी जन संस्कृति के झण्डे को बुलन्द करने वाले योद्धा थे कवि ओमप्रकाश मिश्र

लखनऊ। गंगाजमुनी तहजीब के शायर, गजलकार, जनवादी कवि व गीतकार ओमप्रकाश मिश्र नहीं रहे। आज जौनपुर में उनका निधन हुआ। लम्बे समय से वे बीमार...
कविताशख्सियत

कविता में अनामिका की उपस्थिति का अर्थ, प्रसंगः साहित्य अकादमी सम्मान-2020

समकालीन जनमत
रमेश ऋतंभर   प्रतिष्ठित कवयित्री-कथा लेखिका व स्त्री विमर्शिका अनामिका को हिन्दी कविता के लिए 2020 का ‘साहित्य अकादमी सम्मान’ दिये जाने की घोषणा अपने-आप...
कविता

प्रभात प्रणीत की कविताएँ अपने समय की विडंबनाओं की परख हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल जिस तरह चंद्र किसान जीवन के नये कवि हैं उसी तरह प्रभात प्रणीत नागर जीवन की नूतन आवाज हैं। चंद्र की कविताएँ अगर...
पुस्तक

क्रांतिकारी विचारों की दास्तान

गोपाल प्रधान
लेखक ने जोर देकर कहा है कि मार्क्स को समझना बौद्धिक व्यायाम मात्र नहीं है। उनके विचार अधिकाधिक अराजक होती जा रही दुनिया को समझने...
कहानी

‘ ऐ लड़की ’ : परिवार के व्यर्थताबोध की कहानी

सियाराम शर्मा
अपनी सीमाओं के बावजूद ’ऐ लड़की ’ मृत्यु से मुढभेड़ करती, जीवन का उत्सव मनाती एक स्त्री की अदम्य जिजीविषा की कहानी है। यह संसार...
सिने दुनिया

‘ इंटू द वाइल्ड ’ : अंतहीन यात्राओं के मुसाफ़िर भी लौटते हैं एक रोज़…..

फ़िरोज़ ख़ान
वह इस समाज को घटिया समाज मानता था और कहता था कि दुनिया का हर शख्स एकदूसरे से इतनी बुरी तरह पेश क्यों आता है।...
कविता

मनुज देपावत भारतीय कविता परम्परा का कम पहचाना गया बेहद ज़रूरी नाम है

समकालीन जनमत
सतीश छिम्पा   कवि मनुज देपावत हिंदी और राजस्थानी के ही नहीं बल्कि भारतीय भाषाओं के क्रांतिकारी कवि और गीतकार थे। विप्लव के इस कवि...
साहित्य-संस्कृति

रेणु ने कला विधाओं का समुच्चय रचा, समय-यथार्थ व्यक्त किया

कौशल किशोर
‘‘सारे हिंदी लिखकों को गांव में भेजना चाहिए, एकदम ! गांव में किसानों के साथ काम करें और किसी को ‘ उससे ज्यादा कुछ ’...
कविता

हमारी दुनिया की परतें उघाड़ती हैं अविनाश की कविताएँ 

समकालीन जनमत
अंचित कविता का एक काम यह है कि वह हमारे भीतर के तनावों को, हमारी निराशाओं को जगह दे, वह सब कहने का माध्यम बने...
साहित्य-संस्कृति

बाहर से शांत, दिमाग के भीतर धधकती आग थे अनिल सिन्हा- अजय कुमार

लखनऊ। लेखक और पत्रकार अनिल सिन्हा के दसवें स्मृति दिवस के मौके पर जन संस्कृति मंच ने स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया। यह 25 फरवरी...
सिनेमा

क्रिमिनल जस्टिसः बिहाइंड क्लोज़्ड डोर्स- वैवाहिक रिश्ते में अपराध की कथा

दुर्गा सिंह
क्रिमिनल जस्टिसः बिहाइंड क्लोज़्ड डोर्स, डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर प्रसारित हुई  वेब श्रृंखला है। यह पूर्व में प्रसारित क्रिमिनल जस्टिस का सीक्वेल है। इसमें एक...
चित्रकला

कोयले की कालिमा और प्रभाकर पाचपुते की कला

राकेश कुमार दिवाकर
प्रभाकर पांडुरंग पाचपुते एक ऐसे प्रतिभाशाली युवा कलाकार हैं जिसमें समकालीन कला को समृद्ध करने की प्रतिभा भी है और सार्थक दिशा देने की दृष्टि...
पुस्तक

मार्क्सवाद और उत्तर-मार्क्सवाद

गोपाल प्रधान
2021 में रटलेज से अलेक्स कलीनिकोस, स्तातिस कूवेलाकिस और लुचिया प्रादेला के संपादन में ‘ रटलेज हैंडबुक आफ़ मार्क्सिज्म ऐंड पोस्ट-मार्क्सिज्म’ का प्रकाशन हुआ ।...
सिनेमा

12वां पटना फिल्मोत्सव : आखिरी दिन फिल्म ‘तीसरी कसम’ दिखाई गई, नाटक ‘सुखिया मर गया भूख से’ का मंचन

समकालीन जनमत
पटना। हिरावल-जन संस्कृति मंच द्वारा स्थानीय कालिदास रंगालय में आयोजित तीन दिवसीय 12वें ‘ पटना फिल्मोत्सव: प्रतिरोध का सिनेमा’ के आखिरी दिन आज महान कथाकार...
सिने दुनिया

‘ न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड ’ : …..तब भी उम्मीद है कि मरती नहीं

फ़िरोज़ ख़ान
जंग का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होता है, जो बंदूक खरीदते हैं, जंग का बिगुल बजाते हैं और फिर अपने सुरक्षित बंकर में...
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