समकालीन जनमत
कविता

‘ तेरह साल के लड़के ’

समकालीन जनमत पर प्रस्तुत है कवयित्री देवयानी भारद्वाज की कविता ‘तेरह साल के लड़के’। 12 मार्च को गाज़ियाबाद उत्तरप्रदेश में 13 वर्षीय आसिफ़ नामक एक मुसलमान लड़के को सिर्फ़ इसलिए बुरी तरह पीटा गया क्योंकि वह पानी पीने मंदिर के अंदर चला गया था। इस शर्मनाक घटना ने हमारे समाज के भीतर पैवस्त हो रही साम्प्रदायिक नफ़रत की इंतिहा पर से पर्दा हटाया है। इस तकलीफ़ को अपनी कविता में देवयानी भारद्वाज ने अभिव्यक्त किया और उसे आवाज़ दी है उमा राग ने, आइये सुनते हैं कविता ‘ तेरह साल के लड़के ‘

 

तेरह साल के लड़के/ देवयानी भारद्वाज
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तेरह साल के लड़के के पास
दुनिया-जहान की प्यास है

संसार को जानने की
जीवन को जीने की
चांद को छूने की
समंदर को पीने की
झरनों में नहाने की
नदियों में तैरने की

उसके पास हर वर्जित फल को
चखने की प्यास है
ईश्वर को ललकारने की प्यास है

ईश्वर यदि होता तो
मंदिर ही नहीं
आसिफ कहीं भी पानी पी सकता था
आसिफा कहीं भी लंबी तान कर सो सकती थी
जुनैद अपने घर ईद मनाने जाता
अखलाक के घर बिरयानी खाने
तुम बिन बुलाए चले जाते

तेरह साल के लड़के के पास
जिंदगी से अथाह प्यार की प्यास है

तुम जो कभी तेरह साल के लड़के रहे होंगे
तुम्हें किसी ने मंदिर में नहीं
घर में बाप ने पीटा होगा
स्कूल में मास्टर से मार खाए होंगे
गली में गुंडों से डर कर रहे होंगे
चौराहे पर पुलिस ने थप्पड़ लगाए होंगे
तुम्हारे भीतर तेरह साल का लड़का
प्यासा ही मर गया होगा

तुम खुद को बचा लो
मंदिर जाओ
प्याऊ बनाओ
आसिफ को
जुनैद को
अखलाक को
बुला कर लाओ
माफी मांगो
पानी पिलाओ
यह नफरतों का बोझ
तुम्हें जीने नहीं देगा

तुम तेरस साल के लड़के की प्यास का
कुछ नहीं बिगाड़ सकते
बस खुद को बचा सकते हो
खुद को बचा लो

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