समकालीन जनमत

Category : शख्सियत

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निराला का  साहित्य-संस्कृति सम्बंधी चिंतन

दुर्गा सिंह
  निराला प्रायः कवि के रूप में समादृत  हुए हैं।  हिंदी की सार्वजनिक दुनिया  में लेखक,  रचनाकार को विशेष पहचान में स्थिर करने की,  विचार...
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झारखंड आंदोलनकारी दादा उम्मीदलाल गोप एक अच्छे कलाकार भी थे

द्वितीय स्मृति दिवस झारखंड आंदोलनकारी दादा उम्मीदलाल गोप का जन्म 03 फरवरी 1971 को हेसालौंग, डाड़ी, हजारीबाग में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ...
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मैं लेखन के लिए ही बना हूँ

  ‘लेखक से मिलिए’ अभियान के अंतर्गत जन संस्कृति मंच, आज़मगढ़ इकाई 17 अगस्त 2025 को प्रतिष्ठित लेखक पंकज गौतम के घर पहुंची। पंकज गौतम...
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यूं ही लोग उन्हें भाभी नहीं कहते थे: प्रणय कृष्ण

01अगस्त को मीना राय के जन्मदिन पर इलाहाबाद में ‘स्मरण में है आज जीवन’ कॉम. मीना राय की स्मृति में प्रलेसं, जलेसं, जसम और समकालीन...
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प्रेमचंद मानवीय मूल्यों को जीवित रखने वाले रचनाकार थे: जया जादवानी

11 स्कूलों के 180 बच्चों ने ईदगाह, बूढ़ी काकी और पंच परमेश्वर को कैनवास पर उतारा  सबने माना…नफ़रत के इस भयावह दौर में बच्चों को...
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‘कुन्द’ जी स्वयं में एक लाइब्रेरी हैं

जन संस्कृति मंच, आज़मगढ़ इकाई, ‘लेखक के घर चलो’ अभियान के अंतर्गत आज़मगढ़ के साहित्य जगत में प्रतिष्ठित जगदीश प्रसाद बरनवाल ‘कुन्द’ के घर पहुंची।...
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अग्निपुष्प कभी मुरझाते नहीं

(समकालीन जनमत के संस्थापक संपादक और कर्मकर्ता कवि अग्निपुष्प अब जीवित स्मृति बन चुके हैं। उन्हें समर्पित की गई ये भावभीनी श्रद्धांजलियां हमें आग के...
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याद ए मकबूल जायसी का आयोजन : चर्चा और ग़ज़ल संध्या 

समकालीन जनमत
  ‘मकबूल जायसी की शायरी हिंदुस्तानियत और इंसानियत से सराबोर’  ‘अब ये गजलें मिजाज बदलेंगी‘ लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से ‘याद ए...
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निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और सामाजिक लोकतंत्र

निराला के निबंधों और टिप्पणियों में राजनीति और समाज को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श मिलता है। इसमें वे राष्ट्रीय मुक्ति के लिए चलने वाली राजनीति और...
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कहानीकार और संपादक विजयकांत को श्रद्धांजलि

समकालीन जनमत
नक्सलबाड़ी की क्रांतिकारी धारा के चर्चित कहानीकार और संपादक विजयकांत का 31 अक्टूबर 2024 को निधन हो गया। पिछले कई सालों से अस्वस्थता के कारण...
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निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और भाषा

दुर्गा सिंह
राष्ट्र निर्माण में भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। निराला भावी राष्ट्र निर्माण को लेकर अपने लेखों और टिप्पणियों में  विचार करते हैं। आजादी की...
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निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और गांधी

दुर्गा सिंह
निराला राष्ट्रीय आंदोलन से गहरे सम्बद्ध थे। वे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नीतियों पर टिप्पणी, आलोचना तो करते ही थे, साथ ही राष्ट्रीय आंदोलन के...
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जमींदारी उन्मूलन, भूमि-सुधार और मार्कण्डेय की कहानियाँ

दुर्गा सिंह
 (हिन्दी कहानी के प्रमुख हस्ताक्षर मार्कण्डेय के जन्मदिन पर समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है दुर्गा सिंह का लेख) मार्कण्डेय की कहानी ‘भूदान’...
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निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और नेहरू

दुर्गा सिंह
निराला कवि और लेखक होने के साथ चिंतक भी हैं। निराला का वैचारिक लेखन भी उसी मात्रा में है, जितना कविता और गद्य लेखन। निराला...
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स्वप्न और उम्मीद के गीत

सियाराम शर्मा
नचिकेता की रचनात्मक दृष्टि का विकास सातवें-आठवें दशक के किसान संघर्षों की पृष्ठभूमि में हुआ। उस समय वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर शासक वर्ग संकटग्रस्त...
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शेखर जोशी स्मृति आयोजन से शहर ने किया अपने प्रिय साहित्यकार को याद

समकालीन जनमत
हिंदी साहित्य के सशक्त रचनाकार और इलाहाबाद शहर के गौरव शेखर जोशी के जन्मदिन के अवसर पर बीते 9-10 सितम्बर को  द्वि- दिवसीय शेखर जोशी...
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हम लड़ेंगे कि लड़ने के बगैर कुछ भी नहीं मिलता

समकालीन जनमत
सुशील सुमन पाश से हमारा पहला परिचय ‘हम लड़ेंगे साथी’ कविता से हुआ। एक कविता-पोस्टर पर पहली बार इस कविता की कुछ काव्य-पंक्तियाँ पढ़ने को...
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104 की अमृता: आशिक और अदीब मरते कहाँ हैं

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार 2023 में अमृता एक सौ चार की हुईं। इस फानी दुनिया को तो उनके जिस्म ने 2005 में विदा कहा था पर आशिक...
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अन्याय को खत्म करने के सपनों का कवि

गोपाल प्रधान
गोरख पांडे की कविता किसी जादू के जोर से प्रत्येक समय में प्रासंगिक हो उठती है । उनकी इस ताकत का रहस्य समय के यथार्थ...
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भारतीय नवजागरण और जोतिबा फुले

जनार्दन
जनार्दन   इंग्लैंड के लिए सोलहवी शताब्दी परिवर्तन की शताब्दी है। यूरोप में आधुनिकता की शुरूआत इसी समय से शुरू होती है। माल के उत्पादन...
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