समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

सिने दुनिया

सिने दुनिया: बारां (पर्शियन)(ईरान): मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का…

फ़िरोज़ ख़ान
प्रेम कहानियों के सिरहाने न जाने कितने दर्द, कितनी तकलीफ़ें दफ़्न हैं। यह बात इसलिए भी कि प्रेम एक सियासी मसला है। सियासत तय करती...
कविता

रवि निर्मला सिंह की कविताएँ जातिवाद की जड़ों और उसकी चोट की तल्ख़ पहचान हैं

समकालीन जनमत
हीरालाल राजस्थानी आज के युवा रचनाकार मार्क्स के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी भली भांति समझते हैं और जाति के सवालों तथा समतामूलक समाज के निर्माण...
सिनेमा

जाति की जटिलता में गंधर्व विवाह की परेशानियों को उजागर करती फिल्म ‘जाग उठा इंसान’

जनार्दन
1 – जाति व्यवस्था नियंत्रित तथा मर्यादित जीवन भोग का ही दूसरा नाम है। प्रत्येक जाति अपने जीवन में खुशहाल रहने के लिए ही सीमित...
कविता

दिलीप दर्श की कविताएँ सामाजिक द्वन्द्व को उकेरती हैं

कौशल किशोर दिलीप दर्श की रचनात्मक स्थितियां वर्तमान के द्वन्द्व से तैयार होती हैं। इनमें सामाजिक संघर्ष, अतीत की सीखें, शोषक-शासक शक्तियों की पहचान, वर्ग...
स्मृति

प्यारे भाई अरुण पाण्डेय को सादर श्रद्धांजलि!

समकालीन जनमत
उर्मिलेश   दिल्ली से बंगाल-चुनाव कवर करने गये कई पत्रकार मित्रों से वहां की राजनीतिक स्थिति को लेकर मेरी फोन पर बातचीत होती रहती थी....
कहानी

मोहम्मद उमर की कहानी “बशीर”

(इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र मोहम्मद उमर महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय से जुड़े हैं . उमर की रिपोर्टिंग, लेख और समीक्षाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते...
स्मृति

अलविदा अरुण भाई! आपके अरमान, हमारे अरमानों में ज़िंदा रहेंगे, हमेशा !

समकालीन जनमत
पंकज श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1980-90 के बीच सक्रिय रहे तमाम लोगों के लिए 5 मई बुधवार की सुबह बेतरह उदासी में डूबी हुई थी।...
स्मृति

अरुण पाण्डेय को इस तरह नहीं जाना था

प्रियदर्शन अरुण पाण्डेय के कोविडग्रस्त होने और ठीक हो जाने की सूचना मुझे थी। मंगलवार सुबह उनकी पत्नी पुतुल से बात भी हुई- उन्होंने बताया...
पुस्तक

क्रांतिकारी दुनिया-‘रेवोल्यूशनरी वर्ल्ड: ग्लोबल अपहीवेल इन द माडर्न एज’

2021 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से डेविड मोटाडेल के संपादन में ‘रेवोल्यूशनरी वर्ल्ड: ग्लोबल अपहीवेल इन द माडर्न एज’ का प्रकाशन हुआ । संपादक की...
स्मृति

मानस बिहारी वर्मा : समाज-चेतस विज्ञान की खोज

समकालीन जनमत
कमलानंद झा लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम करने करने वाले वैज्ञानिक डॉ मानस बिहारी वर्मा वैज्ञानिक-दृष्टि सम्पन्न  समाज की...
स्मृति

कॉमरेड रमेश सरीन को ख़िराज़-ए-अक़ीदत

अर्जुमंद आरा कॉमरेड रमेश सरीन का जीवन एक लंबा संघर्ष था। दो-तीन साल के थे जब किसी बीमारी में उनकी आँखें चली गईं। लेकिन बड़े...
स्मृति

स्मृति शेष कांतिकुमार जैन: अपने लेखन में एक पूरे क़द का आदमी!

प्रकाश कान्त उनसे पहली बार मिलना क़रीब पेैंतालीस साल पहले हुआ था। वे उन दिनों शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गुना में थे। मैं अपनी एक नौकरी...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: सिंडलर्स लिस्ट (अमेरिकन): उसकी क़ब्र पर मुहब्बत के गुल दहकते हैं

  सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद हिंदुस्तान ही नहीं, दुनिया के तमाम देश आजाद हुए। हिटलर की सनक के चलते फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी...
कविता

प्रमोद पाठक की कविताओं में काव्य ध्वनियाँ संगीत की तरह सुनाई देती हैं

प्रभात इस तरह मेरा झुकना अधर में लटका हुआ छूट गया है.. प्रमोद एन्द्रिकता के कवि हैं। जब वे कविता लिखते हैं उनकी इन्द्रियाँ साँस...
पुस्तक

चोटी की पकड़ः देशी सत्ता-संस्कृति, औपनिवेशिक नीति और स्वदेशी आन्दोलन की अनूठी कथा

दुर्गा सिंह
चोटी की पकड़ निराला का महत्वपूर्ण उपन्यास है। यह उपन्यास 1946 ईस्वी में किताब महल, इलाहाबाद से प्रकाशित हुआ था। हालांकि इसे लिखकर पूरा करने...
स्मृति

हमीदिया रोड की उस बिल्डिंग से उठकर हमारे दिल में बस गये मंज़ूर सर

समकालीन जनमत
पुष्यमित्र इन दिनों अपने देश में पतझड़ का मौसम है। इस पतझड़ में जो बसंत के बाद आया है, सिर्फ सूखे पत्ते ही नहीं बड़े-बड़े...
कविता

कविता कादम्बरी की कविताएँ अपने समय के संघर्षों के आब और ताब को दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
विशाखा मुलमुले एक तारे के होने भर से नहीं रहता खाली आसमान , हमारी खोजी नजरें आसमान में खोज ही लेती है वह तारा ।...
पुस्तक

इतिहास की सीख: मार्क्सिज्म 1844-1990: ओरिजीन्स, बिट्रेयल, रीबर्थ

गोपाल प्रधान
1992 में रटलेज से रोजर एस गाटलिएब की किताब ‘मार्क्सिज्म 1844-1990: ओरिजीन्स, बिट्रेयल, रीबर्थ’ का प्रकाशन हुआ । किताब के नौ अध्याय चार हिस्सों में...
स्मृति

शंख घोष को याद करते हुए

समकालीन जनमत
 मीता दास   बांग्ला साहित्य का एक युग अचानक ख़त्म हो गया । कोरोना महामारी एक मूर्धन्य साहित्यकार को निगल गई। वे बांग्ला साहित्य में...
स्मृति

प्रोफेसर रामनारायण शुक्ल : एक जन-बुद्धिजीवी

समकालीन जनमत
( लेखक-आलोचक और बीएचयू के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफ़ेसर रामनारायण शुक्ल नहीं रहे। प्रो रामनारायण शुक्ल लेखक व आलोचक के अतिरिक्त जनवादी आंदोलन...
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