समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

सिने दुनिया

सिने दुनिया: सिंडलर्स लिस्ट (अमेरिकन): उसकी क़ब्र पर मुहब्बत के गुल दहकते हैं

  सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद हिंदुस्तान ही नहीं, दुनिया के तमाम देश आजाद हुए। हिटलर की सनक के चलते फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी...
कविता

प्रमोद पाठक की कविताओं में काव्य ध्वनियाँ संगीत की तरह सुनाई देती हैं

प्रभात इस तरह मेरा झुकना अधर में लटका हुआ छूट गया है.. प्रमोद एन्द्रिकता के कवि हैं। जब वे कविता लिखते हैं उनकी इन्द्रियाँ साँस...
पुस्तक

चोटी की पकड़ः देशी सत्ता-संस्कृति, औपनिवेशिक नीति और स्वदेशी आन्दोलन की अनूठी कथा

दुर्गा सिंह
चोटी की पकड़ निराला का महत्वपूर्ण उपन्यास है। यह उपन्यास 1946 ईस्वी में किताब महल, इलाहाबाद से प्रकाशित हुआ था। हालांकि इसे लिखकर पूरा करने...
स्मृति

हमीदिया रोड की उस बिल्डिंग से उठकर हमारे दिल में बस गये मंज़ूर सर

समकालीन जनमत
पुष्यमित्र इन दिनों अपने देश में पतझड़ का मौसम है। इस पतझड़ में जो बसंत के बाद आया है, सिर्फ सूखे पत्ते ही नहीं बड़े-बड़े...
कविता

कविता कादम्बरी की कविताएँ अपने समय के संघर्षों के आब और ताब को दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
विशाखा मुलमुले एक तारे के होने भर से नहीं रहता खाली आसमान , हमारी खोजी नजरें आसमान में खोज ही लेती है वह तारा ।...
पुस्तक

इतिहास की सीख: मार्क्सिज्म 1844-1990: ओरिजीन्स, बिट्रेयल, रीबर्थ

गोपाल प्रधान
1992 में रटलेज से रोजर एस गाटलिएब की किताब ‘मार्क्सिज्म 1844-1990: ओरिजीन्स, बिट्रेयल, रीबर्थ’ का प्रकाशन हुआ । किताब के नौ अध्याय चार हिस्सों में...
स्मृति

शंख घोष को याद करते हुए

समकालीन जनमत
 मीता दास   बांग्ला साहित्य का एक युग अचानक ख़त्म हो गया । कोरोना महामारी एक मूर्धन्य साहित्यकार को निगल गई। वे बांग्ला साहित्य में...
स्मृति

प्रोफेसर रामनारायण शुक्ल : एक जन-बुद्धिजीवी

समकालीन जनमत
( लेखक-आलोचक और बीएचयू के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफ़ेसर रामनारायण शुक्ल नहीं रहे। प्रो रामनारायण शुक्ल लेखक व आलोचक के अतिरिक्त जनवादी आंदोलन...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: द ग्रेट इंडियन किचन (मलयालम): किचन में मर्द आर्टिस्ट और स्त्री धावक होती है

फ़िरोज़ ख़ान
  सेक्स में प्लेजर अमूमन पुरुषों का एकाधिकार रहा है। ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ देखते हुए आप महसूस करेंगे कि पारंपरिक और रूढ़िवादी पुरुष के...
कविता

राकी गर्ग की कविताएँ उदासी से जूझती हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री राकी गर्ग की ये कविताएँ नितांत निजी एवं उनके अनुभव संसार की कोमलतम अभिव्यक्तियाँ हैं। इन अनुभवों में जातीय स्मृतियाँ हैं,...
सिनेमा

फ़िल्म ‘द सोर्स’ : ‘से नो टू सेक्स फॉर वाटर’

समकालीन जनमत
प्रतिभा कटियार मेरे घर के ठीक सामने एक कुआँ था. कुआँ अपनी सामन्य भव्यता के साथ मुस्कुराता था. यानी वो पक्का कुआँ था. उसकी जगत...
कविता

देवयानी की कविताएँ ग़लती करने की ख़ुदमुख्तारी को हासिल करने की जद्दोजहद हैं

समकालीन जनमत
हिमांशु पण्ड्या प्रारंभिक दौर के स्त्री लेखन में परम्परा के नाम पर बनी शृंखला की अदृश्य कड़ियों को नज़र के सामने लाने पर बल रहा,...
सिने दुनिया

सिने दुनिया : क्रूरतम ग़ैरबराबरी का रूपक है ‘इन टाइम’

फ़िरोज़ ख़ान
पिछले दिनों मित्र और फिल्मकार व पटकथा लेखक अविनाश दास के बाबूजी (पिता) और हमारे बाऊजी नहीं रहे। हम लोग मिले। हमने अविनाश से कहा...
कविता

शिव कुशवाहा की कविताएँ अपने समय के संघर्षों को दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर युवा कवियों ने कविता को नया तेवर दिया है। यह कथ्य तथा शिल्प दोनों स्तर पर देखा जा सकता है। कविता के क्षेत्र...
कविता

धूमिल की ‘नक्सलबाड़ी’

गोपाल प्रधान
धूमिल की यह कविता उनके पहले काव्य संग्रह ‘संसद से सड़क तक’ में कुल चार पृष्ठों में प्रकाशित है । संग्रह से पहले 1967 में...
कविता

वासुकि प्रसाद ‘उन्मत्त’ की कविता जीवन की प्रतिक्रिया से कविता की प्रक्रिया तक ज़रूरी और नैसर्गिक यात्रा है

समकालीन जनमत
आलोक कुमार श्रीवास्तव इस कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में साहित्यिक हस्तक्षेप कैसा हो, यह बात हर लोकतंत्र-प्रेमी साहित्यिक सोचता है। धूर्त सत्ता द्वारा जनता के...
पुस्तक

धर्म के आवरण में विद्रोह की अनूठी अभिव्यक्ति

गोपाल प्रधान
कनक तिवारी की 2021 में सूर्य प्रकाशन मन्दिर, बीकानेर से प्रकाशित किताब ‘ विद्रोही वेदान्ती का भारत बोध (विवेकानन्द को समझने की कोशिश) ’ को...
स्मृति

सिनेमा के बाज़ार में सागर सरहदी का होना…

फ़िरोज़ ख़ान
सन् 1980 या 81 के किसी एक रोज एक अखबार में खबर छपती है कि गल्फ देशों के उम्रदराज़, लेकिन अमीर शेख हैदराबाद आते हैं...
स्मृति

जन सांस्कृतिक आंदोलन के योद्धा थे सागर सरहदी : जन संस्कति मंच

समकालीन जनमत
मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक, पटकथा और संवाद लेखक, नाटककार और उर्दू कहानीकार सागर सरहदी के निधन को जन संस्कृति मंच ने भारतीय साहित्य-कला जगत के लिए...
पुस्तक

सरहद और सुरक्षा

गोपाल प्रधान
2021 में हेमार्केट बुक्स से हर्षा वालिया की किताब ‘ बार्डर & रूल : ग्लोबल माइग्रेशन, कैपिटलिज्म, ऐंड द राइज आफ़ रेशियल नेशनलिज्म ’ का...
Fearlessly expressing peoples opinion