समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

पुस्तक

क्रांतिकारी विचारों की दास्तान

गोपाल प्रधान
लेखक ने जोर देकर कहा है कि मार्क्स को समझना बौद्धिक व्यायाम मात्र नहीं है। उनके विचार अधिकाधिक अराजक होती जा रही दुनिया को समझने...
कहानी

‘ ऐ लड़की ’ : परिवार के व्यर्थताबोध की कहानी

सियाराम शर्मा
अपनी सीमाओं के बावजूद ’ऐ लड़की ’ मृत्यु से मुढभेड़ करती, जीवन का उत्सव मनाती एक स्त्री की अदम्य जिजीविषा की कहानी है। यह संसार...
सिने दुनिया

‘ इंटू द वाइल्ड ’ : अंतहीन यात्राओं के मुसाफ़िर भी लौटते हैं एक रोज़…..

फ़िरोज़ ख़ान
वह इस समाज को घटिया समाज मानता था और कहता था कि दुनिया का हर शख्स एकदूसरे से इतनी बुरी तरह पेश क्यों आता है।...
कविता

मनुज देपावत भारतीय कविता परम्परा का कम पहचाना गया बेहद ज़रूरी नाम है

समकालीन जनमत
सतीश छिम्पा   कवि मनुज देपावत हिंदी और राजस्थानी के ही नहीं बल्कि भारतीय भाषाओं के क्रांतिकारी कवि और गीतकार थे। विप्लव के इस कवि...
साहित्य-संस्कृति

रेणु ने कला विधाओं का समुच्चय रचा, समय-यथार्थ व्यक्त किया

कौशल किशोर
‘‘सारे हिंदी लिखकों को गांव में भेजना चाहिए, एकदम ! गांव में किसानों के साथ काम करें और किसी को ‘ उससे ज्यादा कुछ ’...
कविता

हमारी दुनिया की परतें उघाड़ती हैं अविनाश की कविताएँ 

समकालीन जनमत
अंचित कविता का एक काम यह है कि वह हमारे भीतर के तनावों को, हमारी निराशाओं को जगह दे, वह सब कहने का माध्यम बने...
साहित्य-संस्कृति

बाहर से शांत, दिमाग के भीतर धधकती आग थे अनिल सिन्हा- अजय कुमार

लखनऊ। लेखक और पत्रकार अनिल सिन्हा के दसवें स्मृति दिवस के मौके पर जन संस्कृति मंच ने स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया। यह 25 फरवरी...
सिनेमा

क्रिमिनल जस्टिसः बिहाइंड क्लोज़्ड डोर्स- वैवाहिक रिश्ते में अपराध की कथा

दुर्गा सिंह
क्रिमिनल जस्टिसः बिहाइंड क्लोज़्ड डोर्स, डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर प्रसारित हुई  वेब श्रृंखला है। यह पूर्व में प्रसारित क्रिमिनल जस्टिस का सीक्वेल है। इसमें एक...
चित्रकला

कोयले की कालिमा और प्रभाकर पाचपुते की कला

राकेश कुमार दिवाकर
प्रभाकर पांडुरंग पाचपुते एक ऐसे प्रतिभाशाली युवा कलाकार हैं जिसमें समकालीन कला को समृद्ध करने की प्रतिभा भी है और सार्थक दिशा देने की दृष्टि...
पुस्तक

मार्क्सवाद और उत्तर-मार्क्सवाद

गोपाल प्रधान
2021 में रटलेज से अलेक्स कलीनिकोस, स्तातिस कूवेलाकिस और लुचिया प्रादेला के संपादन में ‘ रटलेज हैंडबुक आफ़ मार्क्सिज्म ऐंड पोस्ट-मार्क्सिज्म’ का प्रकाशन हुआ ।...
सिनेमा

12वां पटना फिल्मोत्सव : आखिरी दिन फिल्म ‘तीसरी कसम’ दिखाई गई, नाटक ‘सुखिया मर गया भूख से’ का मंचन

समकालीन जनमत
पटना। हिरावल-जन संस्कृति मंच द्वारा स्थानीय कालिदास रंगालय में आयोजित तीन दिवसीय 12वें ‘ पटना फिल्मोत्सव: प्रतिरोध का सिनेमा’ के आखिरी दिन आज महान कथाकार...
सिने दुनिया

‘ न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड ’ : …..तब भी उम्मीद है कि मरती नहीं

फ़िरोज़ ख़ान
जंग का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होता है, जो बंदूक खरीदते हैं, जंग का बिगुल बजाते हैं और फिर अपने सुरक्षित बंकर में...
कविता

स्मिता सिन्हा की कविताएँ जिजीविषा का जीवंत दस्तावेज है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय स्मिता सिन्हा की इन कविताओं से गुजरना अपने उदास समय को गहराई से देखने, महसूसने और अंततः उससे जूझने की प्रक्रिया है। इस...
सिनेमा

12वां पटना फिल्मोत्सव : दलितों, किसानों, बच्चों, आदिवासियों, बुद्धिजीवियों और संस्कृतिकर्मियों के जीवन के सवालों से रूबरू हुए दर्शक

पटना। 12वें पटना फिल्मोत्सव के दूसरे दिन प्रदर्शित फिल्मों ने भारतीय समाज और व्यवस्था के बुनियादी अंतविर्रोधों को दिखाते हुए विषमता के लिए जिम्मेवार विकास...
सिनेमा

फैज की नज्म ‘इंतेसाब’ के गायन से शुरू हुआ पटना फिल्मोत्सव

पटना। मशहूर शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘इंतेसाब’  के गायन से 12 वें  पटना फिल्मोत्सव की शुरुआत हुई। हिरावल के कलाकारों ने इसे गाया। इस...
चित्रकला

यूसुफ : वैयक्तिक स्वतंत्रता के स्वप्नदर्शी कलाकार

राकेश कुमार दिवाकर
समकालीन कला के परिप्रेक्ष्य में यूसुफ की रचनाएं एक जरुरी तत्व की तरह हैं। उनकी रचनात्मक उपस्थिति समकालीन कला जगत में मौजूद उद्दाम स्वतंत्रता की...
कविता

विशाखा मुलमुळे की कविताएँ स्त्री मुक्ति के सवालों को बारीक़ी से रेखांकित करती हैं

समकालीन जनमत
सोनी पाण्डेय स्त्री जीवन का सबसे कठिन सवाल है “मुक्ति”, उसे मुक्ति चाहिए बेमानी वर्जनाओं से, पितृसत्तात्मक समाज के दोहरे मापदंड से, उसके रास्ते में...
स्मृति

प्रोफेसर डी.एन. झा : तथ्यात्मक इतिहास लेखन से साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद की चुनौती से मुकाबला

राम पुनियानी
झा उन विद्वानों में से थे जिन्होंने सक्रिय रूप से एक बेहतर समाज के निर्माण के संघर्ष में अपना योगदान दिया - एक ऐसे समाज...
स्मृति

अतीत के दर्पण में वर्तमान को देखने वाला इतिहासकार    

जनार्दन
प्रोफेसर डी.एन.झा अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका जाना एक सच्चे इतिहासकार का जाना है। वे सरलीकृत अभिकथनों से टकराने और मिथकों की हवा निकालने...
चित्रकला

संघर्ष का सौन्दर्य और अनुपम रॉय की कलाकृतियां

अनुपम की कला रचना को देखना अपने समय के एक जरुरी रचनात्मक आयाम को देखना है जिसके अंदर हमारे समय का जज्बात निहित है |...
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