समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

स्मिता सिन्हा की कविताएँ जिजीविषा का जीवंत दस्तावेज है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय स्मिता सिन्हा की इन कविताओं से गुजरना अपने उदास समय को गहराई से देखने, महसूसने और अंततः उससे जूझने की प्रक्रिया है। इस...
सिनेमा

12वां पटना फिल्मोत्सव : दलितों, किसानों, बच्चों, आदिवासियों, बुद्धिजीवियों और संस्कृतिकर्मियों के जीवन के सवालों से रूबरू हुए दर्शक

पटना। 12वें पटना फिल्मोत्सव के दूसरे दिन प्रदर्शित फिल्मों ने भारतीय समाज और व्यवस्था के बुनियादी अंतविर्रोधों को दिखाते हुए विषमता के लिए जिम्मेवार विकास...
सिनेमा

फैज की नज्म ‘इंतेसाब’ के गायन से शुरू हुआ पटना फिल्मोत्सव

पटना। मशहूर शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘इंतेसाब’  के गायन से 12 वें  पटना फिल्मोत्सव की शुरुआत हुई। हिरावल के कलाकारों ने इसे गाया। इस...
चित्रकला

यूसुफ : वैयक्तिक स्वतंत्रता के स्वप्नदर्शी कलाकार

राकेश कुमार दिवाकर
समकालीन कला के परिप्रेक्ष्य में यूसुफ की रचनाएं एक जरुरी तत्व की तरह हैं। उनकी रचनात्मक उपस्थिति समकालीन कला जगत में मौजूद उद्दाम स्वतंत्रता की...
कविता

विशाखा मुलमुळे की कविताएँ स्त्री मुक्ति के सवालों को बारीक़ी से रेखांकित करती हैं

समकालीन जनमत
सोनी पाण्डेय स्त्री जीवन का सबसे कठिन सवाल है “मुक्ति”, उसे मुक्ति चाहिए बेमानी वर्जनाओं से, पितृसत्तात्मक समाज के दोहरे मापदंड से, उसके रास्ते में...
स्मृति

प्रोफेसर डी.एन. झा : तथ्यात्मक इतिहास लेखन से साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद की चुनौती से मुकाबला

राम पुनियानी
झा उन विद्वानों में से थे जिन्होंने सक्रिय रूप से एक बेहतर समाज के निर्माण के संघर्ष में अपना योगदान दिया - एक ऐसे समाज...
स्मृति

अतीत के दर्पण में वर्तमान को देखने वाला इतिहासकार    

जनार्दन
प्रोफेसर डी.एन.झा अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका जाना एक सच्चे इतिहासकार का जाना है। वे सरलीकृत अभिकथनों से टकराने और मिथकों की हवा निकालने...
चित्रकला

संघर्ष का सौन्दर्य और अनुपम रॉय की कलाकृतियां

अनुपम की कला रचना को देखना अपने समय के एक जरुरी रचनात्मक आयाम को देखना है जिसके अंदर हमारे समय का जज्बात निहित है |...
कहानी

‘रोटी के चार हर्फ़’ सामायिक घटनाओं और सामाजिक विभेद की सरोकारी रचना है

समकालीन जनमत
गति उपाध्याय “रोटी के चार हर्फ़ ” सिर्फ एक कहानी ही नहीं बल्कि एक कथाचित्र है | कहानी पाठकों के दिलदिमाग़ में चित्र खींचती है...
कविता

सुधाकर रवि की कविता अपने समय से जुड़ने की एक ईमानदार कोशिश है

समकालीन जनमत
अंचित अच्छी कविताओं की निर्मिति में तीन चीज़ें लगती हैं – विचारधारा, भाषा, और जीवन दृष्टि. अच्छी कविताएँ हमेशा वैसी होती हैं, जिनसे अपना दुःख,...
कविता

अभिनव निरंजन की कविताएँ एक घर्षण हैं जिसके ताप से कवि अपने समय का बुख़ार नापता है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवि अभिनव निरंजन अपनी कविताओं में रूपकों, स्थितियों एवं दृश्यों का विभेदन कर उसमें से कविता अर्जित करते हैं। उनके लिए ये...
चित्रकला

भारतीय चित्रकला परंपरा और अमृता शेरगिल  

अशोक भौमिक
अमृता शेरगिल का भारतीय कला इतिहास में सबसे बड़ा अवदान यही है कि उन्होंने पहली बार आम जन को चित्र में स्थान देते हुए चित्रों...
साहित्य-संस्कृति

‘ एक तख्तनशीं आज भी इतराया हुआ है , वो ही खुदा है सबको ये समझाया हुआ है ’

समकालीन जनमत
गोरख स्मृति आयोजन के दूसरे दिन सत्रह कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया पटना. ‘‘ किसान की मेहनत के महत्व का सम्मान...
कविता

गोरख पाण्डेय की कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’ 

समकालीन जनमत
समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’         ...
कविता

गोरख पाण्डेय की ग़ज़ल ‘ रफ़्ता-रफ़्ता नज़रबंदी का जादू घटता जाए है ’

समकालीन जनमत
समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी ग़ज़ल ‘रफ़्ता रफ़्ता नज़रबंदी का जादू घटता जाए है’...
साहित्य-संस्कृति

किसान की आंखों से दुनिया को देखते हैं बलभद्र

गोरख स्मृति आयोजन के पहले दिन बलभद्र के कविता संग्रह ‘समय की ठनक’ पर परिचर्चा आयोजित हुई पटना। 5वें गोरख स्मृति आयोजन के पहले दिन...
साहित्य-संस्कृति

लखनऊ में प्रतिभा कटियार की ‘ मारीना ’ : विमोचन और चर्चा

कौशल किशोर
‘ मारीना ’ कवि-कथाकार-पत्रकार प्रतिभा कटियार की हिन्दी के पाठकों के लिए खोज है। यह उस कवि की तलाश है जो अपने देश रूस से...
सिनेमा

The Social Dilemma : नए बाज़ार और शोषण के आधुनिकीकरण को उजागर करती फ़िल्म

समकालीन जनमत
' The Social Dilemma' वर्तमान समय में सोशल मीडिया की लत, सर्विलांस कैपिटलिज़्म, data-mining, सोशल मीडिया का राजनीतिक ध्रुवीकरण में इस्तेमाल, बढ़ते मानसिक रोग, आत्महत्याओं...
कविता

उम्मीद की दूब के ज़िंदा रहने की कामना से भरी ज्योति रीता की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुंदन सिद्धार्थ   “जब धरती पर सारी संवेदनाएँ समाप्ति पर होंगी तब बचा लेना प्रेम अपनी हथेली पर कहीं जब धरती बंजरपन की ओर अग्रसर...
सिनेमा

पाताललोकः सत्ता के षड्यंत्रकारी चरित्र को लक्षित करती वेब श्रृंखला

दुर्गा सिंह
‘पाताललोक‘ अमेज़न प्राइम वीडियो पर आयी वेब श्रृंखला है। पिछले वर्ष मई में प्रसारित हुई यह श्रृंखला अपराध की छिपी हुई दुनिया और उसकी हकीकत...
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