समकालीन जनमत

Author : फ़िरोज़ ख़ान

6 Posts - 0 Comments
फ़िरोज़ ख़ान कवि और पत्रकार हैं. देश की महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं और ब्लाॅग्स पर कविताएँ और सिनेमा पर कुछ लेख-साक्षात्कार प्रकाशित। इनकी कुछ कविताओं का मराठी में अनुवाद हो चुका है। नवभारत टाइम्स, बम्बई के एडिटोरियल विभाग में कार्यरत। सम्पर्क: 7303745705 ई मेल: [email protected]
सिने दुनिया

सिने दुनिया: द ग्रेट इंडियन किचन (मलयालम): किचन में मर्द आर्टिस्ट और स्त्री धावक होती है

फ़िरोज़ ख़ान
  सेक्स में प्लेजर अमूमन पुरुषों का एकाधिकार रहा है। ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ देखते हुए आप महसूस करेंगे कि पारंपरिक और रूढ़िवादी पुरुष के...
सिने दुनिया

सिने दुनिया : क्रूरतम ग़ैरबराबरी का रूपक है ‘इन टाइम’

फ़िरोज़ ख़ान
पिछले दिनों मित्र और फिल्मकार व पटकथा लेखक अविनाश दास के बाबूजी (पिता) और हमारे बाऊजी नहीं रहे। हम लोग मिले। हमने अविनाश से कहा...
स्मृति

सिनेमा के बाज़ार में सागर सरहदी का होना…

फ़िरोज़ ख़ान
सन् 1980 या 81 के किसी एक रोज एक अखबार में खबर छपती है कि गल्फ देशों के उम्रदराज़, लेकिन अमीर शेख हैदराबाद आते हैं...
सिने दुनिया

दूब : प्रेम और दैहिक इच्छाओं की एक उदास धुन..

फ़िरोज़ ख़ान
आज की फिल्म: दूब (नो बेड ऑफ रोज़ेज़) (बांग्लादेशी)   इरफान खान की अदायगी वाली बांग्लादेशी फिल्म दूब (नो बेड ऑफ रोज़ेज़) अंतत: नेटफ्लिक्स पर...
सिने दुनिया

‘ इंटू द वाइल्ड ’ : अंतहीन यात्राओं के मुसाफ़िर भी लौटते हैं एक रोज़…..

फ़िरोज़ ख़ान
वह इस समाज को घटिया समाज मानता था और कहता था कि दुनिया का हर शख्स एकदूसरे से इतनी बुरी तरह पेश क्यों आता है।...
सिने दुनिया

‘ न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड ’ : …..तब भी उम्मीद है कि मरती नहीं

फ़िरोज़ ख़ान
जंग का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होता है, जो बंदूक खरीदते हैं, जंग का बिगुल बजाते हैं और फिर अपने सुरक्षित बंकर में...
Fearlessly expressing peoples opinion

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy