समकालीन जनमत

Author : फ़िरोज़ ख़ान

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फ़िरोज़ ख़ान कवि और पत्रकार हैं. देश की महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं और ब्लाॅग्स पर कविताएँ और सिनेमा पर कुछ लेख-साक्षात्कार प्रकाशित। इनकी कुछ कविताओं का मराठी में अनुवाद हो चुका है। नवभारत टाइम्स, बम्बई के एडिटोरियल विभाग में कार्यरत। सम्पर्क: 7303745705 ई मेल: firojwriter2013@gmail.com
सिने दुनिया

सिने दुनिया: पैरसाइट (दक्षिण कोरियाई) और द प्लैटफॉर्म (स्पैनिश): अमीरों के लिए जो मौसम सुहाना, गरीबों की वह त्रासदी है..

फ़िरोज़ ख़ान
दक्षिण कोरिया में कई अमीर लोगों ने ऐसे घर बना रखे हैं कि जहां अगर ऐटमी हमला हो, तो उनके तहखानों में कुछ समय तक...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: बिफोर ट्रायलॉजी (बिफोर सनराइज, बिफोर सनसेट, बिफोर मिडनाइट) (अमेरिकन): तमाम उम्र सताती है उस एक रात की याद…

फ़िरोज़ ख़ान
  ट्रेन हंगरी के शहर बुडापेस्ट से पेरिस जा रही है। एक अमेरिकन लड़का जेसी अपनी प्रेमिका से रिश्ता खत्म करके अमेरिका लौट रहा है...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: ब्रोकबैक माउंटेन (अमेरिकन) : आग, चूल्हा, समलैंगिकता और सेक्स

फ़िरोज़ ख़ान
यूं तो समलैंगिक रिश्तों पर तमाम फिल्में बनी हैं। लेस्बियन संबंधों पर भी कुछ बहुत खूबसूरत फिल्में हैं, लेकिन आज हम गे संबंधों पर बनी...
सिने दुनिया

महारानी (वेब सीरिज) : आप एजेंडा वाला सिनेमा बना सकते हैं, चला नहीं सकते..

फ़िरोज़ ख़ान
वह एक ऐसी उत्तराधिकारी थी, जो राजनीति की बारहखड़ी तो छोड़ दीजिए, ओलम भी नहीं जानती थी। बिहार का एक मुख्यमंत्री उसे सिर्फ इसलिए अपना...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: कैफ़रनॉम (लैबनीज, अरबी): इन बच्चों की हँसी किसने चुराई है…

फ़िरोज़ ख़ान
आपको एलन कुर्दी याद है। नाम भूल गए होंगे शायद, लेकिन उसकी सूरत और वह हादसा कोई कैसे भूल सकता है। 2 सितंबर, 2015 की...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: परफ़्यूम(जर्मन): एक मरा हुआ पैगंबर..

फ़िरोज़ ख़ान
नायक-खलनायक, देवता-राक्षस, पैगंबर और शैतान, जीवन के सिर्फ दो ही शेड नहीं होते। किसी पैगंबर या देवता या ईश्वर का कोई ऐसा शेड भी हो...
स्मृति

शक़ील अहमद ख़ान: होठों पर हँसी, आँखों में प्यार बसा था जिसके…

फ़िरोज़ ख़ान
  शक़ील अहमद ख़ान को सुपुर्द-ए-आग कर दिया गया। जी हाँ, ठीक सुना- सुपुर्द-ए-ख़ाक नहीं। लखनऊ के इलेक्ट्रिक शव दाह गृह में उनकी करीब 30...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: बारां (पर्शियन)(ईरान): मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का…

फ़िरोज़ ख़ान
प्रेम कहानियों के सिरहाने न जाने कितने दर्द, कितनी तकलीफ़ें दफ़्न हैं। यह बात इसलिए भी कि प्रेम एक सियासी मसला है। सियासत तय करती...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: द ग्रेट इंडियन किचन (मलयालम): किचन में मर्द आर्टिस्ट और स्त्री धावक होती है

फ़िरोज़ ख़ान
  सेक्स में प्लेजर अमूमन पुरुषों का एकाधिकार रहा है। ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ देखते हुए आप महसूस करेंगे कि पारंपरिक और रूढ़िवादी पुरुष के...
सिने दुनिया

सिने दुनिया : क्रूरतम ग़ैरबराबरी का रूपक है ‘इन टाइम’

फ़िरोज़ ख़ान
पिछले दिनों मित्र और फिल्मकार व पटकथा लेखक अविनाश दास के बाबूजी (पिता) और हमारे बाऊजी नहीं रहे। हम लोग मिले। हमने अविनाश से कहा...
स्मृति

सिनेमा के बाज़ार में सागर सरहदी का होना…

फ़िरोज़ ख़ान
सन् 1980 या 81 के किसी एक रोज एक अखबार में खबर छपती है कि गल्फ देशों के उम्रदराज़, लेकिन अमीर शेख हैदराबाद आते हैं...
सिने दुनिया

दूब : प्रेम और दैहिक इच्छाओं की एक उदास धुन..

फ़िरोज़ ख़ान
आज की फिल्म: दूब (नो बेड ऑफ रोज़ेज़) (बांग्लादेशी)   इरफान खान की अदायगी वाली बांग्लादेशी फिल्म दूब (नो बेड ऑफ रोज़ेज़) अंतत: नेटफ्लिक्स पर...
सिने दुनिया

‘ इंटू द वाइल्ड ’ : अंतहीन यात्राओं के मुसाफ़िर भी लौटते हैं एक रोज़…..

फ़िरोज़ ख़ान
वह इस समाज को घटिया समाज मानता था और कहता था कि दुनिया का हर शख्स एकदूसरे से इतनी बुरी तरह पेश क्यों आता है।...
सिने दुनिया

‘ न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड ’ : …..तब भी उम्मीद है कि मरती नहीं

फ़िरोज़ ख़ान
जंग का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होता है, जो बंदूक खरीदते हैं, जंग का बिगुल बजाते हैं और फिर अपने सुरक्षित बंकर में...
Fearlessly expressing peoples opinion