कविता रूपाली सिन्हा की कविताओं में स्त्री जीवन की नई राह गढ़ती दिखाई पड़ती हैसमकालीन जनमतMarch 21, 2021March 21, 2021 by समकालीन जनमतMarch 21, 2021March 21, 202101468 कामिनी पिछले दिनों आथर्स प्राइड पब्लिकेशन से रूपाली सिन्हा का कविता संग्रह ‘असुविधा के लिए खेद नहीं है’ प्रकाशित हुआ है | इस संग्रह में...
कविताजनमत ‘जीवन की सरलता का प्रतिनिधित्व करती हैं रविंदर की कविताएँ’समकालीन जनमतJuly 7, 2019July 7, 2019 by समकालीन जनमतJuly 7, 2019July 7, 201902926 आलोक रंजन रविंदर कौर सचदेवा की कविताएँ सरलता को स्थापित करने के संघर्ष की कविताएँ हैं जो पहचान , प्रेम और दुनियादारी के अलग अलग...
कविता अनुराधा सिंह की कविताओं में ‘प्रेम एक विस्तृत संकल्पना’समकालीन जनमतMay 26, 2019June 1, 2019 by समकालीन जनमतMay 26, 2019June 1, 20195 4171 अनुपम सिंह अपने समकालीनों पर लिखते समय, उन पर कोई निर्णयात्मक वाक्य लिखना खतरा उठाने जैसा होता है. या कहें भविष्य में उसके ख़ारिज और...
कविता स्मृति और वर्तमान के द्वंद्व से उपजीं उषा की कविताएँसमकालीन जनमतApril 7, 2019April 8, 2019 by समकालीन जनमतApril 7, 2019April 8, 20193 2775 आलोक रंजन इधर उषा राजश्री राठौड़ की कुछ कविताओं से रु ब रु होने का मौका मिला और पहले ही पाठ में वे कविताएँ आकर्षित...
कविता यथार्थ और स्वप्न के लिए बराबर खुली हुई आँख हैं निकिता की कविताएँसमकालीन जनमतMarch 24, 2019March 28, 2019 by समकालीन जनमतMarch 24, 2019March 28, 20198 3437 ज्योत्स्ना मिश्र दिये कहाँ जलाएं आखिर ?रोशनी से जगमगाते घरों में या अंधेरे से भरे हुए दिलों में निकिता नैथानी गढ़वाल से एक युवा जागरूक...
कविताजनमत ज्योत्सना की कविताएँ स्त्री-मन की करुणा और सम्वेदना का समकालीन पाठ हैंसमकालीन जनमतFebruary 10, 2019February 10, 2019 by समकालीन जनमतFebruary 10, 2019February 10, 201903174 देवेंद्र आर्य ज्योत्सना की कविताएँ स्त्री-मन की करुणा और सम्वेदना का समकालीन पाठ पेश करती हैं , पर उनका समकाल विद्रूप या भौकाल बन कर...
कविता स्त्री को उसके वास्तविक रूप में पहचाने जाने की ज़िद हैं शैलजा की कविताएँसमकालीन जनमतJanuary 27, 2019March 1, 2019 by समकालीन जनमतJanuary 27, 2019March 1, 20193 5152 दीपक कुमार शैलजा पाठक से परिचय मित्र पीयूष द्वारा शेयर की गई उनकी कविता ‘कुसुम कुमारी’ के माध्यम से हुआ। पहली ही नजर में इस...
कविता संभावनाओं के बिम्ब गढ़ती आँचल की कविताएँसमकालीन जनमतDecember 16, 2018December 16, 2018 by समकालीन जनमतDecember 16, 2018December 16, 20184 2612 लोकेश मालती प्रकाश व्यक्ति की निजता अमानवीय सत्ताओं के निशाने पर हमेशा से रही है। ग़ुलामी की सबसे मुकम्मल स्थिति वह होती है जब ग़ुलाम...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपटराम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 2018 by राम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 201802086 अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...