समकालीन जनमत

Category : कविता

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आलोकधन्‍वा : अपार करुणा का कवि

(मशहूर कवि आलोकधन्वा का आज जन्मदिन है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है युवा आलोचक अवधेश त्रिपाठी का उनकी कविताओं पर लिखा लेख....
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रूपम की कविताएँ पितृसत्ता की चालाकियों की बारीक़ शिनाख़्त हैं

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दुर्गा सिंह हिंदी समाज एक ऐसी कालावधि से गुजर रहा है, जिसमें एक तरफ निरंतरता की ताकतें, सामाजिक वर्ग- समूह आजादी के बाद के सबसे...
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अमित की कविताएँ अनसुनी आवाज़ों के चाँद के दीदार की मशक़्क़त है

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रविकांत नई शताब्दी में हिंदी के नए हस्ताक्षरों में अमित परिहार मेरे प्रिय कवि हैं, पर अमूमन वे सुकवि होने से बचते हैं. दोनों में...
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कठिन भरपाइयों की कोशिश हैं अमर की कविताएँ

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विनोद विट्ठल मनुष्य ने सामुदायिकता और साझा करने के विरल मूल्यों से जो कुछ हासिल किया था उस सबको कोरोना-काल में बुरी तरह से खो...
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रोहित ठाकुर प्रकृति की पुकार के कवि हैं

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जसवीर त्यागी “नए ब्रांड का प्रेम उतारा था बाज़ार में /जिसने पहले/ लॉन्च किये हैं उसी कंपनी ने/ हत्या के नए उपकरण/ दाल-भात लिट्टी चोखे...
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‘जॉर्ज फ्लॉयड हम भी साँस नहीं लेे पा रहे हैं’

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25 मई 2020 को अमेरिका मिनेपॉलिस शहर में अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के 46 वर्षीय जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद के बाद पूरा अमेरिका सुलग उठा...
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राजेन्द्र देथा की कविताओं में सहज मनुष्‍यता के उत्‍प्रेरक चित्र हैं

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कुमार मुकुल शिशु सोते नहीं अर्द्धरात्रि तक विश्राम भी नहीं करेंगे वे थोड़ा और हँसेंगे अभी और बताएंगे तुम्हें कि हँसना क्या होता है? सोते...
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‘ पांव में छाले आंख में आंसू पीड़ा भरी कहानी लिख/मजदूरों के साथ हुई जो सत्ता की मनमानी लिख ’

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लखनऊ.  कोरोना काल में बड़ी मात्रा में कविताएं रची जा रही हैं। मानव संकट सृजन के लिए आधार बनता है। आज की रचनाओं में भावों...
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कविता कृष्णपल्लवी की कविताएँ बाहरी कोलाहल और भीतरी बेचैनी से अर्जित कविताएँ हैं

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विपिन चौधरी साहित्यिक एक्टिविज्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली पोस्टर-कविता, हमेशा से विरोध प्रदर्शनों का अहम् हिस्सा रही हैं. सबसे सघन समय में...
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‘मजदूर थे वो जब तक सबके ही काम आए/मजबूर हो गए तो सबको ही खल रहे हैं’

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लखनऊ। लोग कोरोना की चपेट में ही नहीं हैं बल्कि लाॅक डाउन से पैदा हुई अव्यवस्था के भी शिकार हुए हैं, हो रहे हैं। लोगों...
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पंकज की कविताएँ जाति-संरचना के कठोर सच की तीखी बानगी हैं

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सुशील मानव पंकज चौधरी की कविताएँ दरअसल विशुद्ध जाति विमर्श (कास्ट डिस्कोर्स) की कविताएँ हैं। जो अपने समय की राजनीति, संस्कृति ,समाज, अर्थशास्त्र न्याय व्यवस्था...
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कोरोना समय में कविता :  ‘लहू से सनी रोटियां दुनिया देख रही है ’

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लखनऊ. यह समय अभिधा का है। जो व्यंजना में कविता की बात करते हैं, कहीं न कहीं उनके अवचेतन में डर है। सत्ता का आतंक...
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उर्दू-हिंदी की साझा संस्कृति के शायर संजय कुमार कुंदन

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ख़ुर्शीद अक़बर संजय कुमार कुन्दन उर्दू-हिन्दी के ऐसे एकमात्र कवि-शायर हैं , जो साझा- संस्कृति के सशक्त प्रतिनिधि ( नुमाइनदा) की हैसियत रखते हैं और...
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‘ फ्री कालिंग है पर बातचीत के हालात नहीं हैं ‘

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आठ मई की शाम समकालीन जनमत द्वारा आयोजित फ़ेसबुक लाइव में जब कवि पंकज चतुर्वेदी अपने कविता पाठ के लिए प्रस्तुत हुए तो काफ़ी देर...
कवितापुस्तक

जीवन, मानवीय संबंध और संघर्षों की निरंतरता की कविताएँ

डॉ. अली इमाम खाँ बलभद्र का कविता-संग्रह ” समय की ठनक ” को पढ़ने, समझने और महसूस करने का मौक़ा मिला। इन कविताओं से गुज़रते...
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कोरोना काल में कविता संवाद : पहले चार लाठियां मिलती हैं / फिर दो रोटियां / सुन्दरपुर दूर है अभी

लखनऊ. जन संस्कृति मंच की ओर से फेसबुक पर चलाये जा रहे ‘कविता संवाद’ लाइव कार्यक्रम के तहत 3 मई को  आठ रचनाकारों की कोरोना...
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कथाओं में जीवन को बुनता कवि वसंत सकरगाए

संजीव कौशल कविता कुछ ना कुछ बचाने की कोशिश है कोई आँसू कोई मुस्कान कुछ उम्मीद कुछ निराशा कुछ दर्द ताकि मुश्किल वक्त में कुछ...
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चंद्र की कविताएँ बोलती भी हैं और भेद भी खोलती हैं

“चंद्र मेरी आज तक की जानकारी में पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो खेती-बाड़ी में, मजूरी में पिसते अंतिम आदमी का जीवन जीते हुए पढ़ना-लिखना व...
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दिनेश कुमार शुक्ल ने किया अपनी कविताओं का लाइव पाठ

दीपक सिंह
समकालीन जनमत से मजदूर दिवस के लाइव कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में आज 1 मई को सांय 4 बजे से हिन्दी जगत को ‘जाग मेरे...
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भूख दुनिया की सबसे पहली महामारी है

आज 1 मई है, जिसे पूरी दुनिया में मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है. मजदूरों के सम्मान, उनके हक और उनके संघर्षों को...
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