Tag : Rupam Mishra

कविता

रूपम की कविताएँ पितृसत्ता की चालाकियों की बारीक़ शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
दुर्गा सिंह हिंदी समाज एक ऐसी कालावधि से गुजर रहा है, जिसमें एक तरफ निरंतरता की ताकतें, सामाजिक वर्ग- समूह आजादी के बाद के सबसे...