कविता मैं इस श्रम को, आग को और पानी को बचा लेना चाहता हूँसमकालीन जनमतMay 1, 2020May 1, 2020 by समकालीन जनमतMay 1, 2020May 1, 20201703 मजदूर दिवस पर अंजन कुमार का काव्य पाठ. अंजन कुमार जन संस्कृति मंच, भिलाई इकाई के सचिव हैं । आज 1 मई को मजदूर दिवस...
कविता कोरोना काल में स्त्री कविता : ‘ये खाई सदियों पुरानी है/यह सूखी रोटी और पिज्जा के बीच की खाई है’समकालीन जनमतApril 28, 2020April 30, 2020 by समकालीन जनमतApril 28, 2020April 30, 20204 2197 जन संस्कृति मंच की ओर से फेसबुक पर चलाये जा रहे ‘कविता संवाद’ लाइव कार्यक्रम के तहत 26 अप्रैल को सात कवयित्रियों की रचनाएं सुनाई...
कविता यातना का साहस भरा साक्षात्कार हैं लाल्टू की कविताएँआशुतोष कुमारApril 26, 2020October 30, 2025 by आशुतोष कुमारApril 26, 2020October 30, 202503224 धरती प्रकृति ने बनाई है. लेकिन दुनिया आदमी ने बनाई हैं. दुनिया की बीमारियाँ , पागलपन और विक्षिप्तियाँ भी आदमी ने बनाई हैं. लेकिन कविता,...
कविता कोरोना काल में कविता : ‘ रिसते दिखे पाँवों से खून, इस पर क्या लिखूं / दिखे आंखों से बहते खून…..समकालीन जनमतApril 20, 2020April 20, 2020 by समकालीन जनमतApril 20, 2020April 20, 202002846 कविता अपने समय को रचती है और समय भी अपने कवि को बनाता है। कोरोना काल मानव जाति के लिए बड़ा संकट का काल है।...
कविता दिव्या की कविताएँ काव्य जगत के आपसी संचार की टूटन को जोड़ने का प्रयास करती हैंसमकालीन जनमतApril 19, 2020April 25, 2020 by समकालीन जनमतApril 19, 2020April 25, 202003834 सुघोष मिश्र _________________________________________ अभिव्यक्ति किसी रचना का पहला सोपान है। हम अपने सुख, दुःख, आशा, निराशा, भय, क्रोध, स्वप्न और संदेश विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त...
कविताशख्सियत मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगासमकालीन जनमतApril 17, 2020April 17, 2020 by समकालीन जनमतApril 17, 2020April 17, 202004043 ममता मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा, जनकवि रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 5 दिसम्बर...
कविता कोरोना काल में कविता : ‘ प्रेम संवाद की भाषा बन जाए ’समकालीन जनमतApril 13, 2020April 25, 2020 by समकालीन जनमतApril 13, 2020April 25, 202002755 यह कोरोना काल है। पूरी दुनिया इस महामारी के खिलाफ जंग लड़ रही है। लाॅक डाउन चल रहा है। लोग घरों में हैं। सामाजिक व...
कविता राग रंजन की कविताएँ सूक्ष्म अंतर्दृष्टि और ज़मीनी यथार्थ के ताने बाने की निर्मिति हैंसमकालीन जनमतApril 12, 2020April 17, 2020 by समकालीन जनमतApril 12, 2020April 17, 202003632 रंजना मिश्र बकौल राग रंजन वे ‘साहित्यकारों के मोहल्ले के ऐसे बच्चे हैं जो कभी कभी किसी दरवाज़े की घंटी बजाकर भाग जाते हैं.’ मेरा...
कविता सत्य को उसकी बहुआयामिता में जानने का जीवट और धैर्य हैं देवेश की कविताएँसमकालीन जनमतApril 5, 2020April 6, 2020 by समकालीन जनमतApril 5, 2020April 6, 202003594 कुमार मुकुल वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्रपति ने करीब पच्चीस साल पहले मेरी कुछ कविताओं से गुजरते लिखा था – … आपकी ये कविताएं मुझे आपकी अगली...
कविता जा रहे हैं हमसमकालीन जनमतMarch 31, 2020March 31, 2020 by समकालीन जनमतMarch 31, 2020March 31, 20200989 कविता: संजय कुंदन आवाज़: दिलीप गुप्ता वीडियो: अजित अंजुम...
कविता अपने ढंग से जीने के हौसले का कवि राजेश कमलसमकालीन जनमतMarch 29, 2020April 2, 2020 by समकालीन जनमतMarch 29, 2020April 2, 202004052 सुधीर सुमन राजेश कमल लगभग ढाई दशक से अधिक समय से कविताएं लिख रहे हैं, लेकिन कविता पाठ और प्रकाशन से आम तौर पर बचते...
कवितासाहित्य-संस्कृति स्त्री की व्यथा और सामर्थ्य के कवि विवेक चतुर्वेदीसमकालीन जनमतMarch 22, 2020March 27, 2020 by समकालीन जनमतMarch 22, 2020March 27, 202003933 जसवीर त्यागी विवेक चतुर्वेदी समकालीन हिन्दी कविता के एक बेहतरीन कवि हैं। उनकी बड़ी खूबी यह है कि उनके स्वभाव और उनकी कविता में उतावलापन...
कविता दौरे हाजि़र पर एक गहरी नज़र हैं ग़ज़ाला की ग़ज़लेंसमकालीन जनमतMarch 8, 2020March 27, 2020 by समकालीन जनमतMarch 8, 2020March 27, 20202 4267 नवनीत शर्मा ग़ज़ाला की ग़ज़लों में सबके अहसास अपनी लिखी कहानी को ही जी रही हूँ अब इक जैसा ही तो है मेरा किरदार ,और...
कविताजनमत विनय कुमार की कविताएँ ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से संवलित हैंसमकालीन जनमतMarch 1, 2020March 1, 2020 by समकालीन जनमतMarch 1, 2020March 1, 20204 2266 कुमार मुकुल यक्षिणी की भूमिका में विनय लिखते हैं – ‘…अतीत का बोध मुझे न तो गौरवान्वित करता है, न दुखी और न ही असहाय;...
कविताजनमत ‘रंजना के नवगीत और ग़ज़लें सृजन की धरती पर एक विराट संवेदना बो रहे हैं’समकालीन जनमतFebruary 23, 2020February 23, 2020 by समकालीन जनमतFebruary 23, 2020February 23, 202002228 कल्पना मनोरमा वर्तमान के खुरदरे जीवन व्यापारों के यथार्थ से जूझती एक अकेली स्त्री का गरिमा पूर्ण आत्म परिचय इन पंक्तियों से बेहतर क्या होगा? ...
कविताजनमत नवनीत की ग़ज़लें यथास्थितिवाद का प्रतिकार हैंसमकालीन जनमतFebruary 16, 2020February 16, 2020 by समकालीन जनमतFebruary 16, 2020February 16, 20206 4337 प्रभात मिलिंद मेरी नज़र में एक ग़ज़लगो होना और एक शायर होना दो मुख़्तलिफ़ इल्म हैं. ग़ज़लगोई एक हुनर (स्किल) है और शायरी एक तेवर...
कविताजनमत मौन में जीवन की साधना करता कवि जगतारजीत सिंहसमकालीन जनमतFebruary 9, 2020February 9, 2020 by समकालीन जनमतFebruary 9, 2020February 9, 202002805 संजीव कौशल जिस तरह पेड़ साल भर सारे मौसम सोखकर अगले साल फूल और फल देता है, कविता भी उसी तरह न जाने कितना जीवन...
कविताजनमत सुषमा की कविताएँ प्रेम के विविध शेड्स को उभारती हैंसमकालीन जनमतFebruary 2, 2020February 2, 2020 by समकालीन जनमतFebruary 2, 2020February 2, 202003625 रत्नेश विश्वकसेन सुषमा गुप्ता की कविताएँ जिन्हें वह क्षणिकाएँ कहती हैं अनुभूतियों की कौंध है जिसे ठीक ठीक पकड़ कर अभिव्यक्त करने में सुषमा सफल...
कविताजनमत देव नाथ द्विवेदी की गज़लें जीवन के यथार्थ से जुड़ने की आग्रही हैंसमकालीन जनमतJanuary 26, 2020January 26, 2020 by समकालीन जनमतJanuary 26, 2020January 26, 202002237 कौशल किशोर देव नाथ द्विवेदी की शायरी रंग, नस्ल, स्थान, जाति के अधार पर मनुष्यता को खण्डित करने के चल रहे कुचक्र के बरक्स...
कविताजनमत आरती की कविताएँ सवालों को बुनती हुई स्त्री का चित्र हैंसमकालीन जनमतJanuary 19, 2020January 19, 2020 by समकालीन जनमतJanuary 19, 2020January 19, 202003931 संजीव कौशल समाज तमाम तरह की राजनीतिक गतिविधियों का रणक्षेत्र है। यहां कोई न कोई अपनी राजनीतिक चाल चलता रहता है। ऐसे में कवि की...