समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

अजय सिंह की कविताएँ अकेले पड़ जाने का खतरा उठा कर भी अपनी बात कहती हैं

उषा राय लखनऊ. शिरोज हैंग आऊट कैफे , गोमतीनगर में प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कवि और राजनीतिक विश्लेषक अजय सिंह ने अपनी...
जनमतशख्सियतस्मृति

उजले दिनों की उम्मीद का कवि वीरेन डंगवाल

समकालीन जनमत
मंगलेश डबराल ‘इन्हीं सड़कों से चल कर आते हैं आततायी/ इन्हीं सड़कों से चल कर आयेंगे अपने भी जन.’ वीरेन डंगवाल ‘अपने जन’ के, इस...
जनमतशख्सियतस्मृति

कटरी की रुक्मिनी: कविता का अलग रास्ता

डॉ रामायन राम
वीरेन डंगवाल 70 के दशक की चेतना के कवि हैं। कविता के क्षेत्र मे उनका प्रवेश 70 के दशक में हुआ । यह वह समय...
जनमतयात्रा वृतान्त

जित देखूँ तित लाल… (प्राग यात्रा-संस्मरण)

समकालीन जनमत
डॉ. रेखा उप्रेती सामान बाँध लिया है| वियना में बिताया यह दिन किसी नायाब तोहफे सा हमारी झोली में आ गिरा है और अब प्राग...
कविताजनमत

स्मृति और प्रेम का कवि कुंदन सिद्धार्थ

समकालीन जनमत
जैसे पूरा गांव ही कमरे में समा गया हो! जब भी कोई शहर से लौटकर गाँव आता तो सारे लोग उसे घेरकर घण्टों शहर की...
साहित्य-संस्कृति

हरेली तिहार: मनुष्यता को हरियर करने का लोक संकल्प

समकालीन जनमत
भुवाल सिंह आज छत्तीसगढ़ लोक में हरेली लोकपर्व है! हरेली अर्थात् हरियाली। अब प्रश्न उठता है सावन के हरे भरे मौसम में हरेली क्यों? जब सब...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

अमर नदीम : हिन्दी ग़ज़ल का नया अंदाज़

आशुतोष कुमार
आज कॉमरेड Amar Nadeem का जन्मदिन है.   यों तो वे हमारे शहर अलीगढ़ के रहने वाले थे, लेकिन जान पहचान उनसे फेसबुक पर ही...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

प्रेमचंद का स्त्रीधर्म

समकालीन जनमत
आशीष मिश्र भारतीय नवजागरण और राष्ट्रीय आन्दोलन को स्त्री-अस्मिता की जमीन से देखते हुए पार्थ चटर्जी प्रभृत चिंतकों ने राष्ट्रीय आन्दोलन और स्त्रीवादी संघर्ष में...
जनमतशख्सियतस्मृति

नायक विहीन समय में प्रेमचंद

समकालीन जनमत
प्रो. सदानन्द शाही कुछ तारीखें कागज के कैलेण्डरों पर दर्ज होती हैं और याद रखी जाती हैं या पर कुछ तारीखें ऐसी भी होती हैं...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद की दलित स्त्रियाँ: वैभव सिंह

समकालीन जनमत
वैभव सिंह प्रेमचंद जितना पुरुष-जीवन का अंकन करने वाले कथाकार हैं, उतना ही स्त्रियों के जीवन के भी विविध पक्षों को कथा में व्यक्त करते...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद के स्त्री पात्र: प्रो.गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
प्रेमचंद का साहित्य प्रासंगिक होने के साथ साथ ज़ेरे बहस भी रहा है । दलित साहित्य के लेखकों ने उनके साहित्य को सहानुभूति का साहित्य...
जनमतशख्सियतस्मृति

किसान आत्म-हत्याओं के दौर में प्रेमचंद – प्रो. सदानन्द शाही

समकालीन जनमत
 प्रो.सदानन्द शाही किसानों की आत्म हत्यायें हमारे समाज की भयावह सचाई है। भारत जैसे देश में किसान आत्महत्यायें कर रहे हैं यह शर्मशार कर देने...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

‘प्रेमचंद : घर में’ से एक प्रसंग-शिवरानी देवी प्रेमचंद

समकालीन जनमत
(‘प्रेमचंद : घर में’ प्रेमचंद के निधन के बाद उनकी पत्नी शिवरानी देवी द्वारा संस्मरणों की एक शृंखला के रूप में लिखी गई पुस्तक है।...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

कफ़न: एक बहुस्तरीय कहानी

समकालीन जनमत
प्रो. सदानंद शाही कफ़न प्रेमचन्द की ही नहीं हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में एक है। कफ़न एक बहुस्तरीय कहानी है, जिसमें घीसू और माधव की बेबसी, अमानवीयता और निकम्मेपन...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

प्रेमचंद की याद: संजय जोशी

संजय जोशी
हिंदी भाषा के सबसे बड़े रचनाकार के रूप में आज भी प्रेमचंद की ही मान्यता है. हिंदी गद्य को आधुनिक रूप देकर उसे आम जन...
साहित्य-संस्कृति

देखें प्रेमचंद की कहानियों पर बनी दो प्रस्तुतियाँ

समकालीन जनमत
‘बूढ़ी काकी’ https://www.youtube.com/watch?v=H4D_eIQZGoE ‘पूस की रात’ https://www.youtube.com/watch?v=qv6loTEoMvg...
जनमतशख्सियतस्मृति

सदगति : ‘ग़म क्या सिर के कटने का’*

समकालीन जनमत
प्रो. सदानन्द शाही सदगति दलित पात्र दुखी की कहानी है। दुखी ने बेटी की शादी तय की है। साइत विचरवाने के लिए पं0. घासीराम को बुलाने...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

बच्चों की निगाह में प्रेमचंद

समकालीन जनमत
[2016 में 31 जुलाई को जसम के कार्यक्रम  ‘मशाल-ए-प्रेमचंद’ में बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी से  कुछ तस्वीरें ]...
जनमतशख्सियतस्मृति

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया : गजानन माधव मुक्तिबोध

समकालीन जनमत
एक छाया-चित्र है । प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं । प्रसाद गम्भीर सस्मित । प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य । विभिन्न विचित्र प्रकृति...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद ने ‘अछूत की शिकायत’ को कथा-कहानी में ढाला

डॉ रामायन राम
  1914 में हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका सरस्वती में हीरा डोम की कविता अछूत की शिकायत प्रकाशित हुई थी,जिसमे कवि ने अछूतों के साथ होने...
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