कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति प्रेमचंद की याद: संजय जोशीसंजय जोशीJuly 30, 2019July 30, 2019 by संजय जोशीJuly 30, 2019July 30, 201902230 हिंदी भाषा के सबसे बड़े रचनाकार के रूप में आज भी प्रेमचंद की ही मान्यता है. हिंदी गद्य को आधुनिक रूप देकर उसे आम जन...
साहित्य-संस्कृति देखें प्रेमचंद की कहानियों पर बनी दो प्रस्तुतियाँसमकालीन जनमतJuly 30, 2019July 30, 2019 by समकालीन जनमतJuly 30, 2019July 30, 20190536 ‘बूढ़ी काकी’ https://www.youtube.com/watch?v=H4D_eIQZGoE ‘पूस की रात’ https://www.youtube.com/watch?v=qv6loTEoMvg...
जनमतशख्सियतस्मृति सदगति : ‘ग़म क्या सिर के कटने का’*समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 2019 by समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 201906257 प्रो. सदानन्द शाही सदगति दलित पात्र दुखी की कहानी है। दुखी ने बेटी की शादी तय की है। साइत विचरवाने के लिए पं0. घासीराम को बुलाने...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति बच्चों की निगाह में प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 2019 by समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 201901399 [2016 में 31 जुलाई को जसम के कार्यक्रम ‘मशाल-ए-प्रेमचंद’ में बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी से कुछ तस्वीरें ]...
जनमतशख्सियतस्मृति मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया : गजानन माधव मुक्तिबोधसमकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 2019 by समकालीन जनमतJuly 29, 2019July 29, 201903736 एक छाया-चित्र है । प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं । प्रसाद गम्भीर सस्मित । प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य । विभिन्न विचित्र प्रकृति...
जनमतशख्सियतस्मृति प्रेमचंद ने ‘अछूत की शिकायत’ को कथा-कहानी में ढालाडॉ रामायन रामJuly 28, 2019July 29, 2019 by डॉ रामायन रामJuly 28, 2019July 29, 20193 4076 1914 में हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका सरस्वती में हीरा डोम की कविता अछूत की शिकायत प्रकाशित हुई थी,जिसमे कवि ने अछूतों के साथ होने...
जनमतशख्सियतस्मृति नई पीढ़ी को भी उम्दा साहित्य के संस्कार देने वाले प्रेमचंदअभिषेक मिश्रJuly 28, 2019July 28, 2019 by अभिषेक मिश्रJuly 28, 2019July 28, 201902512 कहा जाता है ‘साहित्य समाज का दर्पण है’। साहित्यकारों से भी यही अपेक्षा रखी जाती है। पर धीरे-धीरे आजादी मिलने से पूर्व और इसके बाद...
जनमतशख्सियतस्मृति रेलवे स्टेशन पर प्रेमचन्दसमकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 2019 by समकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 201902253 डॉ. रेखा सेठी अभी हाल ही में नयी दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर मुझे प्रेमचन्द की लोकप्रियता का नया अनुभव हुआ। स्टेशन के लगभग हर...
कविताजनमत प्रतिरोध का रसायन तैयार करती उस्मान ख़ान की कविताएँसमकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 2019 by समकालीन जनमतJuly 28, 2019July 28, 201902907 खुशियाँ अच्छी हैं बहुत, मगर इसमें भी अतिश्योक्ति है! उस्मान की कविताओं का संसार, एक ऐसा संघन संसार है जहाँ एक हाथ को नहीं सूझता दूसरा...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति महाजनी सभ्यता : प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 27, 2019July 27, 2019 by समकालीन जनमतJuly 27, 2019July 27, 2019014105 महाजनी सभ्यता मुज़द: ए दिल कि मसीहा नफ़से मी आयद; कि जे़ अनफ़ास खुशश बूए कसे मी आयद। ( हृदय तू प्रसन्न हो कि पीयूषपाणि...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति ‘जीवन और साहित्य में घृणा का स्थान’ से कुछ अंश: प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 27, 2019July 30, 2019 by समकालीन जनमतJuly 27, 2019July 30, 201903600 निंदा, क्रोध और घृणा ये सभी दुर्गुण हैं, लेकिन मानव जीवन में से अगर इन दुर्गुणों को निकल दीजिए, तो संसार नरक हो जायेगा। यह...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति साहित्य का उद्देश्य: प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 26, 2019July 26, 2019 by समकालीन जनमतJuly 26, 2019July 26, 2019013608 [1936 में प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन लखनऊ में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण] यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय घटना है।...
जनमतस्मृति प्रेमचंद के फटे जूते: हरिशंकर परसाईसमकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 201905487 प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने...
जनमतज़ेर-ए-बहसस्मृति प्रेमचंद साहित्य में दलित विमर्श: प्रो. चमनलालसमकालीन जनमतJuly 25, 2019July 27, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 27, 201909658 प्रो. चमनलाल प्रेमचंद के दलित विमर्श को लेकर हिन्दी लेखकों में काफी विवाद है। प्रेमचंद के जीवनकाल के दौरान भी उनके साहित्य को लेकर विवाद...
साहित्य-संस्कृति किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘गोदान’गोपाल प्रधानJuly 25, 2019December 9, 2019 by गोपाल प्रधानJuly 25, 2019December 9, 201913579 सन 1935 में लिखे होने के बावजूद प्रेमचंद के उपन्यास ‘गोदान’ को पढ़ते हुए आज भी लगता है जैसे इसी समय के ग्रामीण जीवन की...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति प्रेमचंद जी: महादेवी वर्मासमकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 201905763 प्रेमचंदजी से मेरा प्रथम परिचय पत्र के द्वारा हुआ. तब मैं आठवीं कक्षा की विद्यार्थिनी थी. मेरी “दीपक” शीर्षक एक कविता शायद “चाँद” में प्रकाशित...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति ‘सांप्रदायिकता और संस्कृति’ : प्रेमचंद (प्रेमचंद पर शृंखला की शुरुआत)समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 25, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 25, 201903189 31 जुलाई को कथाकार प्रेमचंद का जन्मदिन है। समकालीन जनमत अपने पाठकों के लिए आज से 31 जुलाई तक प्रेमचंद पर एक विशेष शृंखला की शुरुआत...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति व्यक्तित्व में सरल और विचार में दृढ़: राजेन्द्र कुमारसमकालीन जनमतJuly 24, 2019July 24, 2019 by समकालीन जनमतJuly 24, 2019July 24, 201901982 विनोद तिवारी पचहत्तर पार : राजेंद्र कुमार राजेंद्र सर हमारे प्रिय अध्यापकों में रहे हैं । वह अपने व्यक्तित्व में नितांत सहज, सरल और साधारण...
जनमतपुस्तक आक्सफ़ोर्ड की मार्क्स सहायिकागोपाल प्रधानJuly 24, 2019July 24, 2019 by गोपाल प्रधानJuly 24, 2019July 24, 201912382 2019 में आक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से मैट विडाल, टोनी स्मिथ, तोमास रोट्टा और पाल प्रेव के संपादन में ‘द आक्सफ़ोर्ड हैंडबुक आफ़ कार्ल मार्क्स’ का...
कविताशख्सियत यथार्थ के अन्तर्विरोधों को उदघाटित करते कवि राजेन्द्र कुमारकौशल किशोरJuly 24, 2019July 24, 2019 by कौशल किशोरJuly 24, 2019July 24, 201902578 ( जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कवि और आलोचक राजेन्द्र कुमार (24/7/1943) आज 76 साल के हो गए. एक शिक्षक, कवि, आलोचक और एक ...