समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

प्रो. गरिमा श्रीवास्तव से ‘स्त्री आत्मकथा के विविध पक्ष’ पर डॉ. कामिनी की बातचीत

समकालीन जनमत
कोरस के फेसबुक लाइव ‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ में बीते रविवार डॉ. कामिनी ने प्रो. गरिमा श्रीवास्तव से “स्त्री आत्मकथा के विविध पक्ष” पर बातचीत...
साहित्य-संस्कृति

बालकृष्ण भट्ट के निबन्ध पर आयोजित हुई गोष्ठी

समकालीन जनमत
कवि गौड़  महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय, इलाहाबाद की ऑनलाइन रविवारी गोष्ठी में बालकृष्ण भट्ट  के निबंध ‘हिन्दू जाति का स्वाभाविक गुण’ का पाठ हुआ।...
सिनेमा

सोनवा के पिंजरा में बंद भईलें तकदीर, चिरईं के जियरा भईलें उदास !            

जनार्दन
सन बासठ में बनारस की छविगृहों में जिन कंठों ने जै गंगा मैया की अलख जगाई-लगाई थी, उसमें बारहों बरन के आदमी थे – खाली...
कविता

‘कुमार कृष्ण की कविताएँ वर्तमान दौर के पोएटिक दस्तावेज़ हैं।’

समकालीन जनमत
वीरेंद्र सिंह   कोरोना काल वर्तमान समय में मानव जाति के लिए सबसे मुश्किल दौर बनकर मनुष्य के अस्तित्व को ही चुनौती देता प्रतीत होता...
स्मृति

“मैं ज़िंदगी सिर्फ़ अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ, और यह हो कर रहेगा।”-सरोज ख़ान

समकालीन जनमत
कनुप्रिया झा बात उन दिनों की है जब मैं आठ या नौ साल रही हूँगी। हर शाम क़रीबन चार बजे टेलीविज़न की आवाज़ न्यूनतम कर...
सिनेमा

बंगाल के अकाल की सच्ची तस्वीर ‘धरती के लाल’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक ख़्वाजा अहमद अब्बास की धरती के लाल। समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश...
स्मृति

कवि बी एन गौड़: सब में बसता हूँ मैं

कौशल किशोर
86वें जन्मदिवस पर ‘मरूंगा नहीं…/क्रान्ति का इतिहास इतनी जल्दी नहीं मरता/बलिदान के रक्त की ललाई को/न धूप सुखा सकती है/न हवा और न वक्त/….इसलिए, मैं...
साहित्य-संस्कृति

आदिवासी स्त्री को ग़र सही मायनों में समझना है तो हमें अपने पैमाने बदलने होंगे : डॉ. स्नेहलता नेगी

समकालीन जनमत
कोरस के फेसबुक लाइव ‘स्त्री-संघर्ष का कोरस’ में बीते रविवार 5 जुलाई को डॉ. स्नेहलता नेगी ने ‘स्त्री स्वतन्त्रता के संबंध में आदिवासी समाज’ विषय...
सिनेमा

कबीर के राम की खोज

समकालीन जनमत
( पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है...
चित्रकला

डा राखी कुमारी का रचना कर्म : कोमल भावनाओं को स्पर्श करती कलाकृतियां

वर्तमान भारतीय संस्कृति जितनी नागर है उतनी ही लोक भी है . समकालीन कला की स्थिति भी इससे भिन्न नहीं है. यहां के अनेक कलाकारों...
पुस्तक

शिक्षा में ‘बैंकिग व्यवस्था’ के बरक्श ‘उत्पीड़ितों के शिक्षा शास्त्र’ की खोज

डॉ. दीनानाथ मौर्य “मेरी माँ ने मुझे सिखाया था की ईश्वर बहुत अच्छा है, इसलिए मैंने यह निष्कर्ष निकाला कि समाज में जो वर्गभेद है,...
कविता

अशोक तिवारी की कविताओं का तेवर नुक्कड़ कविता का है

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी अशोक तिवारी हमारे दौर के चर्चित कवि हैं। अब तक इनके तीन कविता संग्रह आ चुके हैं- सुनो अदीब (2003), मुमकिन है (2009),...
कविता

कवि-कथाकार शोभा  सिंह को पहला ‘पथ के साथी’ सम्मान

समकालीन जनमत
नई दिल्ली. सिद्धांत फाउंडेशन ने वर्ष 2020 का पहला ‘पथ के साथी’ सम्मान कवि-कथाकार और संस्कृतिकर्मी शोभा  सिंह को देने की घोषणा की है. यह...
साहित्य-संस्कृति

रेणु के रिपोर्ताज ‘जै गंगा’ पर आयोजित हुई गोष्ठी

समकालीन जनमत
कवि गौड़  महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय, इलाहाबाद की ऑनलाइन रविवारी गोष्ठी में 28 जून को फणीश्वर नाथ रेणु के रिपोर्ताज ‘जै गंगा’ का पाठ...
कविता

मारीना त्स्वेतायेवा का तूफानी जीवन और उनकी कविताएँ

क्या आप मारीना को जानते हैं ? आइये, प्रतिभा कटियार आपको उनसे मिलवाती हैं. उनकी ज़िंदगी से और ज़िंदगी की जद्दोजहद से रूबरू करवाती हैं....
सिनेमा

वर्णव्यवस्था के विद्रूप को उघाड़ती सद्गति

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है हिंदी के मूर्धन्य कथाकार प्रेमचंद की कहानी पर आधारित मशहूर निर्देशक सत्यजित रॉय की...
चित्रकला

संजीव सिन्हा के चित्रों में लोक का जीवन संघर्ष और कला

कलाकार अपने समकाल से जुडा़ हुआ एक संवेदनशील , स्वप्नदर्शी , कल्पनाशील महत्वकांक्षी प्राणी होता है | वह अपने आस पास की चीजों , घटनाओं...
कविता

आलोकधन्‍वा : अपार करुणा का कवि

(मशहूर कवि आलोकधन्वा का आज जन्मदिन है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है युवा आलोचक अवधेश त्रिपाठी का उनकी कविताओं पर लिखा लेख....
पुस्तक

बहुत सी भ्रांतियों को तोड़ती किताब- इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका

समकालीन जनमत
मुहम्मद उमर हम जब कभी बुकशॉप से किताबों को खरीदने जाया करते, तो एम एन राय की पुस्तक ‘इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका’ सामने ही रखी...
स्मृति

सलाम चितरंजन भाई ! आप ने दमन, अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की जो लौ लगाई, वह कभी नहीं बुझेगी

मैं जब गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था, तभी पत्रकारिता की तरफ झुकाव शुरू हुआ. वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही (अब सूचना आयुक्त,...
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