समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

अशोक कुमार की कविताएँ जीवन के खाली पड़े कटोरों को प्रेम से भर देने की कामना हैं

समकालीन जनमत
गिरिजेश कुमार यादव कविता से जुड़े सभी पारंपरिक और आधुनिक सिद्धान्तों का सार यही है कि कविता तभी कविता है जब वह अपने पाठक तक...
सिनेमा

“सरकार कितना ही दमन करे लेकिन हमें लड़ने की जरूरत है”

(पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है ....
कहानी

प्रेमचंद की कहानी ‘बूढ़ी काकी’ का पाठ : जश्न-ए-प्रेमचंद में बच्चों की भागीदारी

समकालीन जनमत
31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत 30-31 जुलाई ‘जश्न-ए-प्रेमचंद’ का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर समकालीन जनमत...
स्मृति

महाश्वेता देवी की स्मृति में उनकी कहानी ‘प्याऊ’ का हिंदी अनुवाद

समकालीन जनमत
(समकालीन जनमत प्रस्तुत करता है महाश्वेता देवी के स्मृति दिवस 28 जुलाई पर कवयित्री मीता दास द्वारा अनुदित महाश्वेता देवी की कहानी ‘प्याऊ’ (रचना काल,...
कविता

अर्चना लार्क की कविताओं में समकाल की बारीक़ परख है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री अर्चना लार्क की काव्य संवेदना का पाट व्यापक है। वे अपनी संवेदना के विस्तृत परिसर में हर जीवंत घटना को समेट...
पुस्तक

‘चंचला चोर’ की तलाश उर्फ़ एक सभ्यता की चीरफाड़

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन उपन्यास की शुरुआत एक लड़के के ज़िक्र से होती है जिसे महीना नहीं आता। आलोचक अचानक सतर्क हो जाता है कि या तो यह...
स्मृति

अलविदा कलीम बहादुर साहब

शम्सुल इस्लाम
  जेएनयू में एक हमदर्द सीनियर (1972-75), दोस्त और बाद में वहां के प्रोफेसर डॉ. कलीम बहादुर का शनिवार रात में दिल्ली के एक अस्पताल...
साहित्य-संस्कृति

महादेवी वर्मा के रेखाचित्र पर आयोजित हुई गोष्ठी

समकालीन जनमत
शिवानी महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय की ऑनलाइन रविवारी गोष्ठी में महादेवी वर्मा के रेखाचित्र ‘बिंदा’ का पाठ एवं उस पर चर्चा हुई। महादेवी जी...
कविता

बसंत त्रिपाठी की कविताएँ सत्ता-संस्कृति की चीरफाड़ की बेचैन कोशिश हैं

समकालीन जनमत
मृत्युंजय त्रिपाठी बसंत त्रिपाठी की इधर की कविताएँ शोषण के नए रंग-रूप, सत्ता के नए आकार-प्रकार और [कवि] कर्ता की इनके बीच की भूमिका को...
देसवासाहित्य-संस्कृति

जसिया की आँखें

मनोज कुमार सिंह
( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा ‘ की  पाँचवी क़िस्त  ) मार्च 2006 की बात है। दो वर्षों से कुशीनगर में मुसहर समुदाय...
ख़बरजनमतमीडिया

क़ैद ए हयात ओ बंद ए ग़म अस्ल में दोनों एक हैं …

समकालीन जनमत
कोरोना डायरी : लॉकडाउन-1 : नीलिशा [युवा पत्रकार नीलिशा दिल्ली में रहती हैं और इस भयावह वक़्त का दस्तावेज़ीकरण वे कोरोना डायरी नाम से कर...
पुस्तक

मार्क्स का जीवन और लेखन

गोपाल प्रधान
 2018 में वर्सो से स्वेन-एरिक लीदमान की स्वीडिश में 2015 में छपी किताब का अंग्रेजी अनुवाद ‘ ए वर्ल्ड टु विन : द लाइफ़ ऐंड...
साहित्य-संस्कृति

प्रो. गरिमा श्रीवास्तव से ‘स्त्री आत्मकथा के विविध पक्ष’ पर डॉ. कामिनी की बातचीत

समकालीन जनमत
कोरस के फेसबुक लाइव ‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ में बीते रविवार डॉ. कामिनी ने प्रो. गरिमा श्रीवास्तव से “स्त्री आत्मकथा के विविध पक्ष” पर बातचीत...
साहित्य-संस्कृति

बालकृष्ण भट्ट के निबन्ध पर आयोजित हुई गोष्ठी

समकालीन जनमत
कवि गौड़  महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय, इलाहाबाद की ऑनलाइन रविवारी गोष्ठी में बालकृष्ण भट्ट  के निबंध ‘हिन्दू जाति का स्वाभाविक गुण’ का पाठ हुआ।...
सिनेमा

सोनवा के पिंजरा में बंद भईलें तकदीर, चिरईं के जियरा भईलें उदास !            

जनार्दन
सन बासठ में बनारस की छविगृहों में जिन कंठों ने जै गंगा मैया की अलख जगाई-लगाई थी, उसमें बारहों बरन के आदमी थे – खाली...
कविता

‘कुमार कृष्ण की कविताएँ वर्तमान दौर के पोएटिक दस्तावेज़ हैं।’

समकालीन जनमत
वीरेंद्र सिंह   कोरोना काल वर्तमान समय में मानव जाति के लिए सबसे मुश्किल दौर बनकर मनुष्य के अस्तित्व को ही चुनौती देता प्रतीत होता...
स्मृति

“मैं ज़िंदगी सिर्फ़ अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ, और यह हो कर रहेगा।”-सरोज ख़ान

समकालीन जनमत
कनुप्रिया झा बात उन दिनों की है जब मैं आठ या नौ साल रही हूँगी। हर शाम क़रीबन चार बजे टेलीविज़न की आवाज़ न्यूनतम कर...
सिनेमा

बंगाल के अकाल की सच्ची तस्वीर ‘धरती के लाल’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक ख़्वाजा अहमद अब्बास की धरती के लाल। समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश...
स्मृति

कवि बी एन गौड़: सब में बसता हूँ मैं

कौशल किशोर
86वें जन्मदिवस पर ‘मरूंगा नहीं…/क्रान्ति का इतिहास इतनी जल्दी नहीं मरता/बलिदान के रक्त की ललाई को/न धूप सुखा सकती है/न हवा और न वक्त/….इसलिए, मैं...
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