समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

सिनेमा

‘पहली आवाज़’ से शुरू हुआ प्रतिरोध का सिनेमा का ऑनलाइन स्क्रीनिंग अभियान

( पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है...
पुस्तक

बल्ली के यहां उम्मीद का एक बच्चा है, जो सारी तानाशाहियों और पूंजी के फैलाये अंधेरे के ऊपर बैठा है

दुर्गा सिंह
हिंदी ग़ज़ल में बल्ली सिंह चीमा एक लोकप्रिय नाम हैं। यह उनका पांचवां ग़ज़ल संग्रह है। इसकी भूमिका हमारे दौर के महत्वपूर्ण आलोचक प्रणय कृष्ण...
स्मृति

याद -ए -सादेकैन

अशोक भौमिक
सादेकैन के चित्रों में हम बार-बार मेहनतकश मज़दूरों को केंद्र में देख पाते हैं जहाँ उनके साथ मेहनत करती हुई महिलाएं भी अनिवार्य रूप से...
कहानी

लियो टॉलस्टॉय की कहानी: अलीयोश कुल्हड़

समकालीन जनमत
( उन्नीसवीं शताब्दी के महान रूसी उपन्यासकार व कहानी लेखक लियो टॉलस्टॉय द्वारा रचित यह कहानी जीवन के विविध आयाम को छूती है। अत्यंत सरल,...
कविता

रूपम की कविताएँ पितृसत्ता की चालाकियों की बारीक़ शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
दुर्गा सिंह हिंदी समाज एक ऐसी कालावधि से गुजर रहा है, जिसमें एक तरफ निरंतरता की ताकतें, सामाजिक वर्ग- समूह आजादी के बाद के सबसे...
स्मृति

टूटते हुए लोगों की आवाज थे चितरंजन सिंह

समकालीन जनमत
चितरंजन सिंह हारे-शिकस्त खाए लोगों की आवाज बन बनकर सामने आए. उन्होंने हमेशा अन्याय का प्रतिरोध किया और डटकर किया. वे बार-बार जेल गए....
स्मृति

आंदोलन का दूसरा नाम चितरंजन सिंह

राजीव यादव   महाश्वेता देवी के शब्दों में आंदोलन यानि चितरंजन सिंह आज आपातकाल की बरसी पर हम सबको छोड़कर चले गए. मानवाधिकार-लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन...
स्मृति

चितरंजन सिंह का जाना एक जनयोद्धा का जाना है

कौशल किशोर
चितरंजन भाई (चितरंजन सिंह) के नहीं रहने की दुखद सूचना मिली। उनका जाना एक जनयोद्धा का जाना है। वे क्रांतिकारी वाम आंदोलन के साथ नागरिक...
चित्रकला

जीवन का संकट और सुधीर सिंह की रचनाशीलता

कोविड – 19 महामारी के प्रसार ने , मानव व प्रकृति के संम्बंध को लेकर नये सिरे से चिंतित किया है. आदमी ने क्षुद्र स्वार्थ...
पुस्तक

समय, समाज, संवेदना को व्यक्त करती है ‘मेक्सिको: एक घर परदेश में’

समकालीन जनमत
ममता सिंह सवाल है कि आख़िर हम यात्रा वृत्तांत क्यों पढ़ते हैं, किसी जगह, देश की भौगोलिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक जगहों के बारे में तो इंटरनेट...
सिनेमा

विभाजन की पीड़ा, त्रासदी और साम्प्रदायिक उभार का महाख्यान है गरम हवा

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक एम.एस. सथ्यू की गरम हवा । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
कहानीज़ेर-ए-बहस

‘नमक का दरोगा’ में नमक का किरदार

Chandan Pandey
‘नमक का दरोगा’ कहानी को कैसे पढ़ा जाये, यह प्रश्न यदा-कदा कौंध जाता है. पिछले दिनों कथाकार उमाशंकर चौधरी ने इस कहानी के अंत पर...
स्मृति

आपातकाल में जब गिरफ़्तार हुए पिता

समकालीन जनमत
अनिल शुक्ल    27 जून 1975,पूर्वाह्न। 11-साढ़े 11 बज रहे थे जब पुलिस हमारे घर आ धमकी। लोहामंडी सीओ पुलिस (लोहामंडी), एसएचओ और कोई 2...
साहित्य-संस्कृति

तुपकी की सलामी का लोकपर्व : बस्तर का गोंचा

समकालीन जनमत
रथयात्रा की बात करते ही जगन्नाथपुरी की बात जेहन में आ जाती है लेकिन इसका एक बस्तरिया संस्करण भी है जिसे ‘गोंचा तिहार’ कहा जाता...
साहित्य-संस्कृति

पंडिता कलापिनी कोमकली के गायन पर व्योमेश शुक्ल की टीपें

मृत्युंजय
एक थोड़ी सी दूरी बहुत से समय में तय करके हमलोग कलापिनीजी को सुनने पहुँचे तो वह ‘श्याम कल्याण’ के ख़याल के बीच में थीं....
सिनेमा

रंगमंच व सिनेमा की दुनिया में स्त्री संघर्ष पर प्रसिद्ध रंगकर्मी पूर्वा नरेश के अनुभव

‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ के तीसरे फेसबुक लाइव में निर्देशक, नाटककार, संवाद लेखक, नर्तक, और मृदंग वादक पूर्वा नरेश ने लखनऊ से सूरीनाम, दिल्ली से...
स्मृति

जीत सिंह नेगी के गीतों में पहाड़ की सतत पीड़ा है

समकालीन जनमत
जीत सिंह नेगी उत्तराखंड के पहले कलाकार थे जो गढ़वाली गीत-संगीत को रिकॉर्डिंग स्टुडियो तक ले गए. 1949 में उनका पहला ग्रामोफोन रिकॉर्ड हुआ था....
कविता

अमित की कविताएँ अनसुनी आवाज़ों के चाँद के दीदार की मशक़्क़त है

समकालीन जनमत
रविकांत नई शताब्दी में हिंदी के नए हस्ताक्षरों में अमित परिहार मेरे प्रिय कवि हैं, पर अमूमन वे सुकवि होने से बचते हैं. दोनों में...
स्मृति

हीरा सिंह राणा के गीतों में पहाड़ का लोक धड़कता है

समकालीन जनमत
नवेंदु मठपाल 13 जून की सुबह सुबह जैसे ही फेसबुक खोला एक मित्र की वाल पर उत्तराखण्ड के लोकगायक, कुमाउनी कवि हीरा सिंह राणा जी...
सिनेमा

पूँजीवादी समाज व्यवस्था की तीव्र आलोचना है सलाम बॉम्बे

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक मीरा नायर की सलाम बॉम्बे । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
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