समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

आदिवासी स्त्री को ग़र सही मायनों में समझना है तो हमें अपने पैमाने बदलने होंगे : डॉ. स्नेहलता नेगी

समकालीन जनमत
कोरस के फेसबुक लाइव ‘स्त्री-संघर्ष का कोरस’ में बीते रविवार 5 जुलाई को डॉ. स्नेहलता नेगी ने ‘स्त्री स्वतन्त्रता के संबंध में आदिवासी समाज’ विषय...
सिनेमा

कबीर के राम की खोज

समकालीन जनमत
( पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है...
चित्रकला

डा राखी कुमारी का रचना कर्म : कोमल भावनाओं को स्पर्श करती कलाकृतियां

वर्तमान भारतीय संस्कृति जितनी नागर है उतनी ही लोक भी है . समकालीन कला की स्थिति भी इससे भिन्न नहीं है. यहां के अनेक कलाकारों...
पुस्तक

शिक्षा में ‘बैंकिग व्यवस्था’ के बरक्श ‘उत्पीड़ितों के शिक्षा शास्त्र’ की खोज

डॉ. दीनानाथ मौर्य “मेरी माँ ने मुझे सिखाया था की ईश्वर बहुत अच्छा है, इसलिए मैंने यह निष्कर्ष निकाला कि समाज में जो वर्गभेद है,...
कविता

अशोक तिवारी की कविताओं का तेवर नुक्कड़ कविता का है

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी अशोक तिवारी हमारे दौर के चर्चित कवि हैं। अब तक इनके तीन कविता संग्रह आ चुके हैं- सुनो अदीब (2003), मुमकिन है (2009),...
कविता

कवि-कथाकार शोभा  सिंह को पहला ‘पथ के साथी’ सम्मान

समकालीन जनमत
नई दिल्ली. सिद्धांत फाउंडेशन ने वर्ष 2020 का पहला ‘पथ के साथी’ सम्मान कवि-कथाकार और संस्कृतिकर्मी शोभा  सिंह को देने की घोषणा की है. यह...
साहित्य-संस्कृति

रेणु के रिपोर्ताज ‘जै गंगा’ पर आयोजित हुई गोष्ठी

समकालीन जनमत
कवि गौड़  महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय, इलाहाबाद की ऑनलाइन रविवारी गोष्ठी में 28 जून को फणीश्वर नाथ रेणु के रिपोर्ताज ‘जै गंगा’ का पाठ...
कविता

मारीना त्स्वेतायेवा का तूफानी जीवन और उनकी कविताएँ

क्या आप मारीना को जानते हैं ? आइये, प्रतिभा कटियार आपको उनसे मिलवाती हैं. उनकी ज़िंदगी से और ज़िंदगी की जद्दोजहद से रूबरू करवाती हैं....
सिनेमा

वर्णव्यवस्था के विद्रूप को उघाड़ती सद्गति

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है हिंदी के मूर्धन्य कथाकार प्रेमचंद की कहानी पर आधारित मशहूर निर्देशक सत्यजित रॉय की...
चित्रकला

संजीव सिन्हा के चित्रों में लोक का जीवन संघर्ष और कला

कलाकार अपने समकाल से जुडा़ हुआ एक संवेदनशील , स्वप्नदर्शी , कल्पनाशील महत्वकांक्षी प्राणी होता है | वह अपने आस पास की चीजों , घटनाओं...
कविता

आलोकधन्‍वा : अपार करुणा का कवि

(मशहूर कवि आलोकधन्वा का आज जन्मदिन है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है युवा आलोचक अवधेश त्रिपाठी का उनकी कविताओं पर लिखा लेख....
पुस्तक

बहुत सी भ्रांतियों को तोड़ती किताब- इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका

समकालीन जनमत
मुहम्मद उमर हम जब कभी बुकशॉप से किताबों को खरीदने जाया करते, तो एम एन राय की पुस्तक ‘इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका’ सामने ही रखी...
स्मृति

सलाम चितरंजन भाई ! आप ने दमन, अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की जो लौ लगाई, वह कभी नहीं बुझेगी

मैं जब गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था, तभी पत्रकारिता की तरफ झुकाव शुरू हुआ. वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही (अब सूचना आयुक्त,...
सिनेमा

‘पहली आवाज़’ से शुरू हुआ प्रतिरोध का सिनेमा का ऑनलाइन स्क्रीनिंग अभियान

( पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है...
पुस्तक

बल्ली के यहां उम्मीद का एक बच्चा है, जो सारी तानाशाहियों और पूंजी के फैलाये अंधेरे के ऊपर बैठा है

दुर्गा सिंह
हिंदी ग़ज़ल में बल्ली सिंह चीमा एक लोकप्रिय नाम हैं। यह उनका पांचवां ग़ज़ल संग्रह है। इसकी भूमिका हमारे दौर के महत्वपूर्ण आलोचक प्रणय कृष्ण...
स्मृति

याद -ए -सादेकैन

अशोक भौमिक
सादेकैन के चित्रों में हम बार-बार मेहनतकश मज़दूरों को केंद्र में देख पाते हैं जहाँ उनके साथ मेहनत करती हुई महिलाएं भी अनिवार्य रूप से...
कहानी

लियो टॉलस्टॉय की कहानी: अलीयोश कुल्हड़

समकालीन जनमत
( उन्नीसवीं शताब्दी के महान रूसी उपन्यासकार व कहानी लेखक लियो टॉलस्टॉय द्वारा रचित यह कहानी जीवन के विविध आयाम को छूती है। अत्यंत सरल,...
कविता

रूपम की कविताएँ पितृसत्ता की चालाकियों की बारीक़ शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
दुर्गा सिंह हिंदी समाज एक ऐसी कालावधि से गुजर रहा है, जिसमें एक तरफ निरंतरता की ताकतें, सामाजिक वर्ग- समूह आजादी के बाद के सबसे...
स्मृति

टूटते हुए लोगों की आवाज थे चितरंजन सिंह

समकालीन जनमत
चितरंजन सिंह हारे-शिकस्त खाए लोगों की आवाज बन बनकर सामने आए. उन्होंने हमेशा अन्याय का प्रतिरोध किया और डटकर किया. वे बार-बार जेल गए....
स्मृति

आंदोलन का दूसरा नाम चितरंजन सिंह

राजीव यादव   महाश्वेता देवी के शब्दों में आंदोलन यानि चितरंजन सिंह आज आपातकाल की बरसी पर हम सबको छोड़कर चले गए. मानवाधिकार-लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन...
Fearlessly expressing peoples opinion