समकालीन जनमत

Author : जनार्दन

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जनार्दन इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज में हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं .
जनमतशख्सियत

भारतीय नवजागरण और जोतिबा फुले

जनार्दन
जनार्दन   इंग्लैंड के लिए सोलहवी शताब्दी परिवर्तन की शताब्दी है। यूरोप में आधुनिकता की शुरूआत इसी समय से शुरू होती है। माल के उत्पादन...
पुस्तक

रेत समाधि: मृत्यु भी जीवन का हिस्सा है! 

जनार्दन
“बरसात का पानी बूँद-बँद बढ़ता हुआ दरार के आखिरी मुकाम पर पहुँचकर ठहर जाता, बूँद की एक थैली बना पीछे से बढ़ती आती बूँदों को...
जनमत

उर्दू पत्रकारिता में इंसानियत का दायरा बड़ा होना चाहिए

जनार्दन
(इस आलेख का विचार शफ़ी किदवई के एक आलेख से ग्रहण किया गया है। शफ़ी किदवई का यह आलेख ‘उर्दू का लोकवृत्त’ (The Urdu public...
शख्सियत

भारतीय राजनीति के लिए अम्बेडकर का सही आकलन है जरूरी

जनार्दन
भारत रत्न बी.आर. अम्बेडकर ने आजादी के बाद भारत निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने विभिन्न मुद्दों के समाधान खोजने के लिए जिस...
ज़ेर-ए-बहस

अखिल भारतीय केंद्रीय विश्वविद्यालय सामान्य प्रवेश परीक्षा के मायने

जनार्दन
शैक्षणिक सत्र 2022-23 से केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश का पैटर्न बदलने जा रहा है। अब एक सामान्य प्रवेश के माध्यम से केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश...
ख़बर

झारखंड सरकार की नई भाषा नीति क्या है और इस लड़ाई के पीछे कौन है?

जनार्दन
जनवरी की सर्दी और सड़कों पर जनसैलाब जनवरी का अंतिम सप्ताह ठीक नहीं रहा झारखंड के लिए। झारखंड के कई जनपदों के मुख्यालयों के सामने...
सिनेमा

फिल्म ‘झुंड’ किताब की तरह पढ़े जाने की मांग करती है

जनार्दन
फ़िल्म – झुंड निर्देशक – नागराज पोपटराव मंजुले कलाकार – अमिताभ बच्चन, अंकुश गेडाम, आकाश थोसर, रिंकु राजगुरु छायांकन – सुधाकर रेड्डी गीत-संगीत – साकेत...
ज़ेर-ए-बहस

शिक्षालयों के कुछ पूर्वाग्रह                   

जनार्दन
वर्चस्वशाली समाज के विचार से शिक्षण की प्रविधि ही नहीं, उसकी भाषा और यहाँ तक कि वर्णमाला तक को भेद दिया करते हैं.  वर्चस्वशाली विचार...
दुनिया

नेक हौसलों से भरा दिल दुनिया को खूबसूरत बनाता है

जनार्दन
राह चलते, मिलते-जुलते, पढ़ते-पढ़ाते कई दफ़ा ऐसे किरदार मिलते हैं, जो बहुत दूर होकर भी साथ चलने लगते हैं। भौगोलिक और सरहदी दूरियां बेमानी हो...
ग्राउन्ड रिपोर्ट

खेत हमार गोड़-हाथ और शरीर है!

जनार्दन
                                           एक ही अंजाम बार–बार भूमि से प्रेम का जो गाढ़ा रंग आदिवासियों में दिखाई देता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। खेत-खलिहान से इस...
पुस्तक

जंग के बीच प्रेम और शांति की तलाश का आख्यान है ‘अजनबी जज़ीरा’

जनार्दन
आग में खिलता गुलाब? अपने अंतिम दिनों में सद्दाम हुसैन जिन सैनिकों की निगरानी में रहते रहे उन सैनिकों को ‘सुपर ट्वेल्व’ कहा जाता था।...
ज़ेर-ए-बहस

आदिवासियों की हत्या पर चुप्पी क्यों ?  

जनार्दन
अप्रैल से मई के बीच कई घटनाएं घटीं। महामारी का विकराल रूप पूरे देश ने देखा, महसूस किया और कई लोगों ने अपने प्रियजनों को...
ख़बर

एक होनहार आदिवासी अफसर की मौत पर खामोशी क्यों है ?

जनार्दन
03 मई  2021 की शाम को साहेबगंज की थाना प्रभारी सुश्री रूपा तिर्की का शव उनके सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला। थोड़ी ही...
सिनेमा

जाति की जटिलता में गंधर्व विवाह की परेशानियों को उजागर करती फिल्म ‘जाग उठा इंसान’

जनार्दन
1 – जाति व्यवस्था नियंत्रित तथा मर्यादित जीवन भोग का ही दूसरा नाम है। प्रत्येक जाति अपने जीवन में खुशहाल रहने के लिए ही सीमित...
स्मृति

अतीत के दर्पण में वर्तमान को देखने वाला इतिहासकार    

जनार्दन
प्रोफेसर डी.एन.झा अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका जाना एक सच्चे इतिहासकार का जाना है। वे सरलीकृत अभिकथनों से टकराने और मिथकों की हवा निकालने...
इतिहास

दुनिया की संस्कृतियाँ और धान

जनार्दन
पड़ोसी देश पाकिस्तान और हमारे बीच कई छोटे-मोटे मसले पैदा होते हैं। कुछ तो स्थाई हैं। कई छोटी-बड़ी असहमतियां और अहंकार हैं, जो समय-समय पर...
ज़ेर-ए-बहस

प्रकृति के प्रांगण में मानव की विनाश लीला!

जनार्दन
हर शहर कोहरे के साये में लिपटा हुआ है। हर तरफ़ सांसें उखड़ रहीं हैं और हर जिंदगी परेशान सी है; यह सब क्यों हो...
ज़ेर-ए-बहस

महामारियां अवसाद बुनती हैं!

जनार्दन
महामारियां और आपदाएं जीवन-जगत को आकार प्रदान करती हैं; उनकी मानसिकता के ढांचे को तोड़कर नए ढांचे का निर्माण करती हैं –आपदाएं नवीन और परिवर्तनकामी...
ज़ेर-ए-बहस

गांव-शहर को रहने लायक बनाने वाले सफाई देवताओं पर कुछ विचार

जनार्दन
ऐ, दिल मुझे ऐसी जगह ले चल, जहाँ कोई ना हो ऐ, दिल मुझे ऐसी जगह ले चल, जहाँ कोई ना हो चलना है सब...
जनमत

विश्व आदिवासी दिवस पर सामाजिक तलछट में छटपटाते कुछ सवाल

जनार्दन
आदमी ही नहीं समय भी बहरूपिया हो गया है। मनुष्य, समाज और दुनिया के तमाम पंथ अबूझ हो गए हैं। हर कहीं, हर तरफ धुंआ-धुंआ...
Fearlessly expressing peoples opinion