Author : जनार्दन

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जनार्दन इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज में हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं .
जनमत

विश्व आदिवासी दिवस पर सामाजिक तलछट में छटपटाते कुछ सवाल

जनार्दन
आदमी ही नहीं समय भी बहरूपिया हो गया है। मनुष्य, समाज और दुनिया के तमाम पंथ अबूझ हो गए हैं। हर कहीं, हर तरफ धुंआ-धुंआ...
शख्सियत

जमीन की लड़ाई लड़ती सी.के. जानू !

जनार्दन
‘मैं भुला दिए गए उन हजारों योद्धाओं की ओर से बोल रहा हूं, जो आजादी की लड़ाई में आगे रहे, लेकिन उनकी कोई पहचान नहीं।...
सिनेमा

सोनवा के पिंजरा में बंद भईलें तकदीर, चिरईं के जियरा भईलें उदास !            

जनार्दन
सन बासठ में बनारस की छविगृहों में जिन कंठों ने जै गंगा मैया की अलख जगाई-लगाई थी, उसमें बारहों बरन के आदमी थे – खाली...
जेरे बहस

जिंदगी मायने रखती है !

जनार्दन
इस समय पूरी दुनिया कोरोना संकट से गुजर रही है। कोरोना ने पूरी दुनिया को प्रयोगशाला में बदल दिया है। हर शय लिटमस टेस्ट से...
जनमत

निर्धन निर्माण अभिकरणों का योगदान और बेरोजगारी    

जनार्दन
मेहनत करने के बाद भी निर्धनता का विलोपन न होना अप्राकृतिक है. अप्राकृतिक निर्धनता का सर्जन शक्तिशाली संस्थाओं द्वारा होता है, जिसे वह अपनी जन-विरोधी...
जनमत

बच्चे, दुनिया के सबसे अधिक शोषित और असहाय मजदूर !

जनार्दन
निदा फ़ाज़ली के दो शे’र हैं – घास पर खेलता है इक बच्चा पास माँ बैठी मुस्कुराती है मुझे हैरत है जाने क्यूं दुनिया काबा...

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