समकालीन जनमत

Author : जनार्दन

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जनार्दन इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज में हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं .
ख़बर

एक होनहार आदिवासी अफसर की मौत पर खामोशी क्यों है ?

जनार्दन
03 मई  2021 की शाम को साहेबगंज की थाना प्रभारी सुश्री रूपा तिर्की का शव उनके सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला। थोड़ी ही...
सिनेमा

जाति की जटिलता में गंधर्व विवाह की परेशानियों को उजागर करती फिल्म ‘जाग उठा इंसान’

जनार्दन
1 – जाति व्यवस्था नियंत्रित तथा मर्यादित जीवन भोग का ही दूसरा नाम है। प्रत्येक जाति अपने जीवन में खुशहाल रहने के लिए ही सीमित...
स्मृति

अतीत के दर्पण में वर्तमान को देखने वाला इतिहासकार    

जनार्दन
प्रोफेसर डी.एन.झा अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका जाना एक सच्चे इतिहासकार का जाना है। वे सरलीकृत अभिकथनों से टकराने और मिथकों की हवा निकालने...
इतिहास

दुनिया की संस्कृतियाँ और धान

जनार्दन
पड़ोसी देश पाकिस्तान और हमारे बीच कई छोटे-मोटे मसले पैदा होते हैं। कुछ तो स्थाई हैं। कई छोटी-बड़ी असहमतियां और अहंकार हैं, जो समय-समय पर...
ज़ेर-ए-बहस

प्रकृति के प्रांगण में मानव की विनाश लीला!

जनार्दन
हर शहर कोहरे के साये में लिपटा हुआ है। हर तरफ़ सांसें उखड़ रहीं हैं और हर जिंदगी परेशान सी है; यह सब क्यों हो...
ज़ेर-ए-बहस

महामारियां अवसाद बुनती हैं!

जनार्दन
महामारियां और आपदाएं जीवन-जगत को आकार प्रदान करती हैं; उनकी मानसिकता के ढांचे को तोड़कर नए ढांचे का निर्माण करती हैं –आपदाएं नवीन और परिवर्तनकामी...
ज़ेर-ए-बहस

गांव-शहर को रहने लायक बनाने वाले सफाई देवताओं पर कुछ विचार

जनार्दन
ऐ, दिल मुझे ऐसी जगह ले चल, जहाँ कोई ना हो ऐ, दिल मुझे ऐसी जगह ले चल, जहाँ कोई ना हो चलना है सब...
जनमत

विश्व आदिवासी दिवस पर सामाजिक तलछट में छटपटाते कुछ सवाल

जनार्दन
आदमी ही नहीं समय भी बहरूपिया हो गया है। मनुष्य, समाज और दुनिया के तमाम पंथ अबूझ हो गए हैं। हर कहीं, हर तरफ धुंआ-धुंआ...
शख्सियत

जमीन की लड़ाई लड़ती सी.के. जानू !

जनार्दन
‘मैं भुला दिए गए उन हजारों योद्धाओं की ओर से बोल रहा हूं, जो आजादी की लड़ाई में आगे रहे, लेकिन उनकी कोई पहचान नहीं।...
सिनेमा

सोनवा के पिंजरा में बंद भईलें तकदीर, चिरईं के जियरा भईलें उदास !            

जनार्दन
सन बासठ में बनारस की छविगृहों में जिन कंठों ने जै गंगा मैया की अलख जगाई-लगाई थी, उसमें बारहों बरन के आदमी थे – खाली...
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