Tag : karl marx

पुस्तक

मार्क्स का जीवन और लेखन

गोपाल प्रधान
 2018 में वर्सो से स्वेन-एरिक लीदमान की स्वीडिश में 2015 में छपी किताब का अंग्रेजी अनुवाद ‘ ए वर्ल्ड टु विन : द लाइफ़ ऐंड...
जनमत

कोविड-19 के संकट को सामूहिक प्रतिरोध और सामाजिक बदलाव के अवसर में बदलने की जरूरत 

मार्क्‍स पूरी तरह से क्रांतिकारी यथार्थवादी थे। उनके लिए बुनियादी पदार्थ ही यथार्थ था। गति पदार्थ के अस्तित्‍व का रूप है। उनके चिंतन की जड़ें...
स्मृति

कार्ल मार्क्स की एक नई जीवनी

 मार्क्स के बारे में पैदा हुई हालिया रुचि की नवीनता का एक नमूना उनकी एक नई जीवनी है । सितंबर 2011 में लिटिल ब्राउन एंड...
जनमत पुस्तक

आक्सफ़ोर्ड की मार्क्स सहायिका

गोपाल प्रधान
2019 में आक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से मैट विडाल, टोनी स्मिथ, तोमास रोट्टा और पाल प्रेव के संपादन में ‘द आक्सफ़ोर्ड हैंडबुक आफ़ कार्ल मार्क्स’ का...
जनमत

मजदूर वर्ग के राष्ट्रवाद में साम्राज्यवाद विरोध और लोकतांत्रिक रंग अधिक गहरा होता है : गोपाल प्रधान

समकालीन जनमत
( अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली में प्राध्यापक एवं मार्क्स साहित्य के अध्येता गोपाल प्रधान से संदीप मील का यह साक्षात्कार भारतीय समाजशास्त्र समीक्षा पत्रिका में प्रकाशित...
जनमत स्मृति

‘पूंजी’ की लेखन प्रक्रिया और व्यवधान

( कार्ल मार्क्स के जन्म दिन पर विशेष )   मार्क्स ने ग्रुंड्रिस की लिखाई को अंतिम रूप मानचेस्टर में एंगेल्स के पास रहकर दिया...
पुस्तक साहित्य-संस्कृति

पद्धति संबंधी कुछ जरूरी स्पष्टीकरण

गोपाल प्रधान
( 2018 में ब्लूम्सबरी एकेडमिक से मार्चेलो मुस्तो की इतालवी किताब का अंग्रेजी अनुवाद ‘एनादर मार्क्स: अर्ली मैनुस्क्रिप्ट्स टु द इंटरनेशनल’ प्रकाशित हुआ है. अनुवाद...
पुस्तक

मार्क्स कोश

गोपाल प्रधान
2011 में कांटीन्यूम इंटरनेशनल पब्लिशिंग ग्रुप से इयान फ़्रेजर और लारेन्स वाइल्डे की किताब ‘ द मार्क्स डिक्शनरी ’ का प्रकाशन हुआ। सबसे पहले लेखक...
कविता

‘ वह आग मार्क्स के सीने में जो हुई रौशन, वह आग सीन-ए-इन्साँ में आफ़ताब है आज ’

उमा राग
जटिल दार्शनिक-आर्थिक तर्क-वितर्क के संसार में रहने के बावजूद मार्क्स ने कई कविताएँ लिखीं और उन पर भी बहुत सी कविताएँ लिखी गयीं, जिनमें से...
पुस्तक

एनादर मार्क्स: अर्ली मैनुस्क्रिप्ट्स टु द इंटरनेशनल : अर्थशास्त्र की आलोचना

गोपाल प्रधान
मार्क्स ने पाया कि सभी युगों के चिंतक अपने समय की विशेषता को शाश्वत ही कहते आए हैं. अपने समय के राजनीतिक अर्थशास्त्रियों के बनाए...

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