समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

चित्रकलासाहित्य-संस्कृति

कला के बदलते स्वरूप में अरबिन्द कुमार सिंह की रचनाशीलता

कलाकार बनना बहुत आसान है मगर पुरस्कार, प्रसिद्धि , पैसा कमाना बहुत मुश्किल और उससे भी अधिक मुश्किल है किसी सार्थक कलाकृति की रचना करना।...
कहानी

दास्तानगोई परंपरा और स्त्रियों की भूमिका

समकालीन जनमत
बीते रविवार ‘कोरस’ के फेसबुक लाइव ‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ में ‘दास्तानगोई परंपरा और स्त्रियों की भूमिका‘ विषय पर कोरस की साथी समता ने सुप्रसिद्ध...
कहानी

लाॅकडाउन

समकालीन जनमत
हेमंत कुमार  (लाॅकडाउन, हेमंत कुमार की नयी कहानी है। हेमंत कुमार ने समकालीन ग्रामीण यथार्थ को कहानियों में पुनः स्थापित किया है। ‘रज्जब अली ‘...
पुस्तक

अनिल अनलहातु का पहला काव्य संग्रह ‘बाबरी मस्जिद तथा अन्‍य कविताएँ’ विकास के विडम्बनाबोध की अभिव्यक्ति है

कुमार मुकुल
अपनी विश्‍व प्रसिद्ध पुस्‍तक ‘सेपियन्‍स’ में युवाल नोआ हरारी संस्‍कृति और तथाकथित मनुष्‍यता पर सवाल उठाते लिखते हैं- …हमारी प्रजाति, जिसे हमने निर्लज्‍ज ढंग से...
सिनेमा

काली स्लेट पर सफेद चॉक से लिखी दोस्ती की इबारत

समकालीन जनमत
  मनोज कुमार    आदर्श विद्यार्थी के जो पाँच लक्षण हमें बताए गए थे उन लक्षणों में सिनेमा देखना नहीं शामिल था| बगुले की तरह...
सिनेमा

मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ: ज़िंदगी मुख़्तसर सी मिली थी हमें, हसरतें बेशुमार ले के चलें !

आशीष कुमार
यह ‘लैला'(कल्कि कोचलिन)की दुनिया है।लैला यानी ‘सेरेब्रल पॉल्सी’ की शिकार।वह शतरंज खेलती है।फेसबुक चलाती है। संगीत सुनती है। धुने बनाती है। डांस भी करती है।...
भाषा

उर्दू की क्लास : नुक़्ते के हेर फेर से “ख़ुदा” “जुदा” हो जाता है

समकालीन जनमत
( छापाखाने के आविष्कार के बाद तमाम चीज़ें  काग़ज़ के पन्नों में छपकर किताब की शक्ल में आने से भाषा एक नयी चाल में ढलने...
कविता

अशोक कुमार की कविताएँ जीवन के खाली पड़े कटोरों को प्रेम से भर देने की कामना हैं

समकालीन जनमत
गिरिजेश कुमार यादव कविता से जुड़े सभी पारंपरिक और आधुनिक सिद्धान्तों का सार यही है कि कविता तभी कविता है जब वह अपने पाठक तक...
सिनेमा

“सरकार कितना ही दमन करे लेकिन हमें लड़ने की जरूरत है”

(पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है ....
कहानी

प्रेमचंद की कहानी ‘बूढ़ी काकी’ का पाठ : जश्न-ए-प्रेमचंद में बच्चों की भागीदारी

समकालीन जनमत
31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत 30-31 जुलाई ‘जश्न-ए-प्रेमचंद’ का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर समकालीन जनमत...
स्मृति

महाश्वेता देवी की स्मृति में उनकी कहानी ‘प्याऊ’ का हिंदी अनुवाद

समकालीन जनमत
(समकालीन जनमत प्रस्तुत करता है महाश्वेता देवी के स्मृति दिवस 28 जुलाई पर कवयित्री मीता दास द्वारा अनुदित महाश्वेता देवी की कहानी ‘प्याऊ’ (रचना काल,...
कविता

अर्चना लार्क की कविताओं में समकाल की बारीक़ परख है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री अर्चना लार्क की काव्य संवेदना का पाट व्यापक है। वे अपनी संवेदना के विस्तृत परिसर में हर जीवंत घटना को समेट...
पुस्तक

‘चंचला चोर’ की तलाश उर्फ़ एक सभ्यता की चीरफाड़

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन उपन्यास की शुरुआत एक लड़के के ज़िक्र से होती है जिसे महीना नहीं आता। आलोचक अचानक सतर्क हो जाता है कि या तो यह...
स्मृति

अलविदा कलीम बहादुर साहब

शम्सुल इस्लाम
  जेएनयू में एक हमदर्द सीनियर (1972-75), दोस्त और बाद में वहां के प्रोफेसर डॉ. कलीम बहादुर का शनिवार रात में दिल्ली के एक अस्पताल...
साहित्य-संस्कृति

महादेवी वर्मा के रेखाचित्र पर आयोजित हुई गोष्ठी

समकालीन जनमत
शिवानी महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय की ऑनलाइन रविवारी गोष्ठी में महादेवी वर्मा के रेखाचित्र ‘बिंदा’ का पाठ एवं उस पर चर्चा हुई। महादेवी जी...
कविता

बसंत त्रिपाठी की कविताएँ सत्ता-संस्कृति की चीरफाड़ की बेचैन कोशिश हैं

समकालीन जनमत
मृत्युंजय त्रिपाठी बसंत त्रिपाठी की इधर की कविताएँ शोषण के नए रंग-रूप, सत्ता के नए आकार-प्रकार और [कवि] कर्ता की इनके बीच की भूमिका को...
देसवासाहित्य-संस्कृति

जसिया की आँखें

मनोज कुमार सिंह
( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा ‘ की  पाँचवी क़िस्त  ) मार्च 2006 की बात है। दो वर्षों से कुशीनगर में मुसहर समुदाय...
ख़बरजनमतमीडिया

क़ैद ए हयात ओ बंद ए ग़म अस्ल में दोनों एक हैं …

समकालीन जनमत
कोरोना डायरी : लॉकडाउन-1 : नीलिशा [युवा पत्रकार नीलिशा दिल्ली में रहती हैं और इस भयावह वक़्त का दस्तावेज़ीकरण वे कोरोना डायरी नाम से कर...
पुस्तक

मार्क्स का जीवन और लेखन

गोपाल प्रधान
 2018 में वर्सो से स्वेन-एरिक लीदमान की स्वीडिश में 2015 में छपी किताब का अंग्रेजी अनुवाद ‘ ए वर्ल्ड टु विन : द लाइफ़ ऐंड...
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