Author : मुकेश आनंद

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सिनेमा

वर्णव्यवस्था के विद्रूप को उघाड़ती सद्गति

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है हिंदी के मूर्धन्य कथाकार प्रेमचंद की कहानी पर आधारित मशहूर निर्देशक सत्यजित रॉय की...
सिनेमा

विभाजन की पीड़ा, त्रासदी और साम्प्रदायिक उभार का महाख्यान है गरम हवा

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक एम.एस. सथ्यू की गरम हवा । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
सिनेमा

पूँजीवादी समाज व्यवस्था की तीव्र आलोचना है सलाम बॉम्बे

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक मीरा नायर की सलाम बॉम्बे । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
शख्सियत

विविधता से भरा है बसु चटर्जी का फ़िल्म संसार

मुकेश आनंद
(समकालीन जनमत के लिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  साप्ताहिक टिप्पणी लिख रहे मुकेश आनंद याद कर रहे हैं सुप्रसिद्ध हिंदी सिने निर्देशक बसु चटर्जी को.-सं)...
सिनेमा

लाभ-लोभ की प्रवृत्ति पर जीवन की सहज वृत्ति को स्थापित करती है मणि कौल की ‘दुविधा’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक मणि कौल की दुविधा । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
सिनेमा

सामंती और पूँजीवादी शोषण के अंतर्संबंधों की पड़ताल करती ‘पार’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक गौतम घोष की पार । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
जेरे बहस स्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
सिनेमा

आदिवासी समाज के उत्पीड़न और आक्रोश की कहानी

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक गोविंद निहलानी की आक्रोश । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
सिनेमा

सामंती मूल्यबोध से आधुनकि मूल्यों की टकराहट को दर्ज करती ‘माया दर्पण’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक कुमार शाहनी की माया दर्पण । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
सिनेमा

हिंदी सिनेमा में 1857 का विद्रोह

मुकेश आनंद
भारतीय इतिहास की इस महत्त्वपूर्ण घटना को सही इतिहास-दृष्टि और अपेक्षित कला कौशल के साथ हिंदी सिनेमा द्वारा व्यक्त किया जाना अभी शेष है....
सिनेमा

बढ़ती साम्प्रदायिक कट्टरता के बीच एक विवेकशील समाज बनाने की अपील है ‘नसीम’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर लेखक और निर्देशक सईद मिर्ज़ा की नसीम । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश...
सिनेमा

पूँजीवाद और सामंतवाद के गठजोड़ से उपजे शोषण को चित्रित करती है ‘दामुल’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है जाने माने निर्देशक प्रकाश झा की दामुल । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा लिखी जा रही...
सिनेमा

अतियथार्थवाद का जोखिम भरा रास्ता अख़्तियार करती मणि कौल की ‘उसकी रोटी’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है समानांतर सिनेमा के जरूरी हस्ताक्षर मणि कौल की उसकी रोटी । समकालीन जनमत केेे...
सिनेमा

औरत की जानिब समाज की सच्चाइयों का आइना है ‘ भूमिका ’

मुकेश आनंद
( श्याम बेनेगल निर्देशित और स्मिता पाटिल अभिनीत फिल्म ‘भूमिका’ को 1977 के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. विश्व और भारतीय सिनेमा की...
सिनेमा

जर्जर मध्यवर्गीय दाम्पत्य जीवन की त्रासदी का बयान है ‘अमेरिकन ब्यूटी’

मुकेश आनंद
(1999 में प्रदर्शित सैम मेंडेस निर्देशित ‘अमेरिकन ब्यूटी’ को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन  के ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । यहाँ...