Author : मुकेश आनंद

16 Posts - 0 Comments
सिनेमा

बंगाल के अकाल की सच्ची तस्वीर ‘धरती के लाल’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक ख़्वाजा अहमद अब्बास की धरती के लाल। समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश...
सिनेमा

वर्णव्यवस्था के विद्रूप को उघाड़ती सद्गति

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है हिंदी के मूर्धन्य कथाकार प्रेमचंद की कहानी पर आधारित मशहूर निर्देशक सत्यजित रॉय की...
सिनेमा

विभाजन की पीड़ा, त्रासदी और साम्प्रदायिक उभार का महाख्यान है गरम हवा

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक एम.एस. सथ्यू की गरम हवा । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
सिनेमा

पूँजीवादी समाज व्यवस्था की तीव्र आलोचना है सलाम बॉम्बे

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक मीरा नायर की सलाम बॉम्बे । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
शख्सियत

विविधता से भरा है बसु चटर्जी का फ़िल्म संसार

मुकेश आनंद
(समकालीन जनमत के लिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  साप्ताहिक टिप्पणी लिख रहे मुकेश आनंद याद कर रहे हैं सुप्रसिद्ध हिंदी सिने निर्देशक बसु चटर्जी को.-सं)...
सिनेमा

लाभ-लोभ की प्रवृत्ति पर जीवन की सहज वृत्ति को स्थापित करती है मणि कौल की ‘दुविधा’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक मणि कौल की दुविधा । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
सिनेमा

सामंती और पूँजीवादी शोषण के अंतर्संबंधों की पड़ताल करती ‘पार’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक गौतम घोष की पार । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
ज़ेर-ए-बहस स्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
सिनेमा

आदिवासी समाज के उत्पीड़न और आक्रोश की कहानी

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक गोविंद निहलानी की आक्रोश । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
सिनेमा

सामंती मूल्यबोध से आधुनकि मूल्यों की टकराहट को दर्ज करती ‘माया दर्पण’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक कुमार शाहनी की माया दर्पण । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy