समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

स्मृति

 जनवादी धारा के अग्रगामी चेतना के कवि थे विजेन्द्र

समकालीन जनमत
लखनऊ।  हिन्दी के शीर्षस्थ कवि व गद्यकार विजेन्द्र के रचनात्मक अवदान पर सार्थक एवं बेहद जरूरी परिचर्चा 27 जुलाई को जूम पर हुई । बीते...
सिने दुनिया

महारानी (वेब सीरिज) : आप एजेंडा वाला सिनेमा बना सकते हैं, चला नहीं सकते..

फ़िरोज़ ख़ान
वह एक ऐसी उत्तराधिकारी थी, जो राजनीति की बारहखड़ी तो छोड़ दीजिए, ओलम भी नहीं जानती थी। बिहार का एक मुख्यमंत्री उसे सिर्फ इसलिए अपना...
कविता

गोलेन्द्र की कविताएँ: अपनी बोली में जनता के दुखों और आक्रोश को ज़ाहिर करती नयी कलम

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी समकालीन जनमत के लिए ‘नई कलम’ में आज बात करते हैं गोलेन्द्र पटेल की कविताओं पर। कई बार कच्चेपने की अपनी एक अलग...
पुस्तक

टूटे पंखों से परवाज़ तक: आत्मीयता की अंतहीन तलाश

भारत में हिंदी साहित्य के विकास क्रम को देखें तो पता चलता है कि 19वीं शताब्दी से पहले साहित्य का विषय सिर्फ ईश्वर, राजा, सामंत...
पुस्तक

खेती का इतिहास

गोपाल प्रधान
 2020 में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास यानी नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित सुषमा नैथानी की किताब ‘अन्न कहाँ से आता है’ सही अर्थ में हिंदी की...
कविता

शिरीष कुमार मौर्य की कविता में पहाड़ अपनी समस्त शक्ति एवं सीमाओं के साथ उपस्थित होता है

समकालीन जनमत
‘मनुष्यता के ग्रीष्म में रहता कवि- शिरीष कुमार मौर्य’ वसंत आते-आते मैं शिवालिक के ढलानों पर खिला फूल हूँ जंगली घासों का थोड़ी ही है...
स्मृति

फिल्म निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े लोगों के लिए संघर्ष करने वाले बेहतरीन अभिनेता थे चंद्रशेखर

सुधीर सुमन
फिल्म अभिनेता चंद्रशेखर को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि ! फिल्म अभिनेता चंद्रशेखर के निधन पर जन संस्कृति मंच ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा...
स्मृति

सूरजपाल चौहान ने ब्राह्मणवादी अंधआस्थाओं के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया : जन संस्कृति मंच

राम नरेश राम
जन संस्कृति मंच ने प्रसिद्ध दलित साहित्यकार सूरजपाल चौहान के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका आज नोएडा के एक अस्पताल में 66...
कविता

स्त्री जीवन के यथार्थ को दर्शाती मंजुला बिष्ट की कविताएँ

समकालीन जनमत
सोनी पाण्डेय   मैं अक्सर सोचती हूँ कि पुरुषवादी समाज में हमेशा से औरतों का आंकलन ऐसा क्यों रहा कि वह कहने को विद्या की...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: कैफ़रनॉम (लैबनीज, अरबी): इन बच्चों की हँसी किसने चुराई है…

फ़िरोज़ ख़ान
आपको एलन कुर्दी याद है। नाम भूल गए होंगे शायद, लेकिन उसकी सूरत और वह हादसा कोई कैसे भूल सकता है। 2 सितंबर, 2015 की...
स्मृति

वरिष्ठ कन्नड़ दलित साहित्यकार सिद्धलिंगय्या को विदाई सलाम

समकालीन जनमत
हीरालाल राजस्थानी वरिष्ठ कन्नड़ दलित साहित्यकार माननीय सिद्धलिंगय्या (1954 से 11 जून 2021) का जाना एक युग का बीत जाना है. कन्नड़ के जाने माने...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

सेवासदनः नवजागरण, हिन्दी समाज और स्त्री

दुर्गा सिंह
हिन्दी भाषा में  प्रेमचंद ने पहला उपन्यास ‘सेवासदन’ लिखा। उर्दू भाषा में यह ‘बाज़ारे हुश्न’ नाम से लिखा गया था। हिन्दी में ‘सेवासदन’ नाम से...
स्मृति

अज़ीम कवि एवं फ़िल्मकार बुद्धदेव दासगुप्ता

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी जब फ़िल्मों का बहुत ज्यादा इल्म नहीं था तब भी बहुत सारी महत्त्वपूर्ण फिल्में देखने की क्षीण स्मृति है। विकल्पहीनता कई बार वरदान...
स्मृति

दीघा घाट पर नम आंखों से कॉमरेड रामजतन शर्मा को अंतिम विदाई 

समकालीन जनमत
पटना। भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी व पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य, केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के पूर्व चेयरमैन और बिहार समेत कई राज्यों के पूर्व राज्य सचिव...
चित्रकला

वक्त की जटिलता को जीवंतता के साथ अभिव्यक्त करने वाले चित्रकार हैं प्रमोद प्रकाश

कुछ ही ऐसे कलाकार होते हैं जो बगैर किसी आर्थिक या महत्वकांक्षी समर्थन के लंबे समय तक निरंतर सक्रिय रह पाते हैं | ऐसा तब...
स्मृति

शुक्ला चौधुरी : प्रकृति से प्रेम करने वाली रचनाकार का जाना

समकालीन जनमत
मीता दास कवि व कथाकार शुक्ला चौधुरी नहीं रहीं। उनका जाना एक ऊर्जावान रचनाकार का जाना है। कोरोना से जंग थी। उनका इसे न जीत...
कविता

रामेश्वर प्रशान्त की कविताएँ जनता के रिसते ज़ख्मों का दस्तावेज़ हैं

समकालीन जनमत
राणा प्रताप ________________________________________ ‘भविष्य उन लोगों का होगा जिन्हें आधुनिक समाज की आत्मा की पकड़ होगी और अत्यंत परिशुद्ध सिद्धांतों को छोड़कर जीवन की अपेक्षाकृत...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: परफ़्यूम(जर्मन): एक मरा हुआ पैगंबर..

फ़िरोज़ ख़ान
नायक-खलनायक, देवता-राक्षस, पैगंबर और शैतान, जीवन के सिर्फ दो ही शेड नहीं होते। किसी पैगंबर या देवता या ईश्वर का कोई ऐसा शेड भी हो...
कविता

तनुज की कविताएँ

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी “कविता की नब्ज़ को छूकर हम महसूस कर सकते हैं कि उसमें हमारा कितना रक्त, कितने ताप और दबाव का प्रवाह दौड़ रहा...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

निराला की कहानियाँ: राष्ट्र-निर्माण, शिक्षा और संस्कृति

निराला ऐसे रचनाकार हैं, जिन्हें भारतीय प्रबोधन  या नवजागरण के तत्वों से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। यह प्रबोधन वैयक्तिक स्वतंत्रता की चेतना...
Fearlessly expressing peoples opinion