समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

नाटक

 प्रेमचंद जयंती पर नाटक ‘ मोटेराम शास्त्री ’ का मंचन

समकालीन जनमत
बेगूसराय। जसम की नाट्य इकाई रंगनायक द लेफ्ट थियेटर ने प्रेमचंद जयंती पर तिलकनगर में प्रेमचंद की कहानी ‘ मोटेराम शास्त्री ‘  का डिजिटल मंचन...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: बिफोर ट्रायलॉजी (बिफोर सनराइज, बिफोर सनसेट, बिफोर मिडनाइट) (अमेरिकन): तमाम उम्र सताती है उस एक रात की याद…

फ़िरोज़ ख़ान
  ट्रेन हंगरी के शहर बुडापेस्ट से पेरिस जा रही है। एक अमेरिकन लड़का जेसी अपनी प्रेमिका से रिश्ता खत्म करके अमेरिका लौट रहा है...
कविता

सुशील कुमार की कविताएँ मौजूदा सत्ता संरचना और व्यवस्था का प्रतिपक्ष रचती हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   मुक्तिबोध कालयात्री की बात करते हैं। मतलब कविता अपने काल के साथ सफर करती है । उसका अटूट रिश्ता काल से है...
कहानी

जाति-वर्ण का प्रश्न और चतुरी चमार 

दुर्गा सिंह
बतौर नैरेटर/नायक निराला अपनी कहानियों में सकर्मक भूमिका में रहते हैं। सामाजिक परिवर्तन का विचार उनकी कहानियों में स्वाधीनता संघर्ष के विचार के साथ मिलकर...
कविता

शुभम श्री की कविताएँ: मामूली से दिखने वाले बेहद ज़रूरी सवाल

समकालीन जनमत
दीपशिखा शुभम की कविताएँ हमारे समय और समाज में मौजूद रोज़मर्रा के उन तमाम दृश्यों और ज़रूरतों की भावनात्मक अभिव्यक्ति हैं, जिन्हें आमतौर पर देखते...
कविता

बरसात की आस और वसंत की आगवानी का कवि नरेंद्र

बलभद्र
10 मार्च 1989 को बिहार के कोने-कोने से आए हजारों-हजार गरीब-गुरबों से पटना का गाँधी मैदान सुसज्जित था। लाल-लाल झंडे लहरा रहे थे और ‘आई....
पुस्तक

जंग के बीच प्रेम और शांति की तलाश का आख्यान है ‘अजनबी जज़ीरा’

जनार्दन
आग में खिलता गुलाब? अपने अंतिम दिनों में सद्दाम हुसैन जिन सैनिकों की निगरानी में रहते रहे उन सैनिकों को ‘सुपर ट्वेल्व’ कहा जाता था।...
कहानी

वास्को डी गामा की साइकिलः लोकतंत्र में उम्मीद और छल की कहानी

समकालीन जनमत
कुँवर प्रांजल सिंह सामान्यतः “आम और ख़ास” बनने की बीमारी और खूबी प्रत्येक भारतीय में लगभग- लगभग पायी जाती है l इस पूरी अवधारणा का...
पुस्तक

मानव विकास का भौतिकवादी नजरिया

गोपाल प्रधान
हिंदी भाषा में कुछ भी वैचारिक लिखने की कोशिश खतरनाक हो सकती है । देहात के विद्यार्थियों के लिए कुंजी लिखना ही इस भाषा का...
कविता

राहुल द्विवेदी की कविताएँ: एक पुरुष का आत्मसंघर्ष

समकालीन जनमत
सोनी पाण्डेय कविता मनुष्य की संवेदनात्मक अभिव्यक्ति है।  वह संसार के दुःख को महसूस करता है और कभी गीत, कभी ग़ज़ल तो कभी किस्से, कहानी...
स्मृति

बेमिसाल अभिनेत्री थीं सुरेखा सीकरी

समकालीन जनमत
पटना। जन संस्कृति मंच और हिरावल ने रंगमंच, फिल्म और टीवी की मशहूर अभिनेत्री सुरेखा सीकरी के निधन पर गहरा शोक जाहिर किया है। जसम...
साहित्य-संस्कृति

कवि-लेखक जयप्रकाश धूमकेतु की चार पुस्तकों का लोकार्पण

समकालीन जनमत
मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में आठ जुलाई को एक कार्यक्रम में भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य और समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: ब्रोकबैक माउंटेन (अमेरिकन) : आग, चूल्हा, समलैंगिकता और सेक्स

फ़िरोज़ ख़ान
यूं तो समलैंगिक रिश्तों पर तमाम फिल्में बनी हैं। लेस्बियन संबंधों पर भी कुछ बहुत खूबसूरत फिल्में हैं, लेकिन आज हम गे संबंधों पर बनी...
कविता

सपना भट्ट की कविताएँ: निर्मम हक़ीक़त के मध्य जीवन की आर्द्रता बचाने की जद्दोजहद

समकालीन जनमत
मंजुला बिष्ट हमारा मौजूदा समय मानवीय संघर्ष के साथ अदृश्य स्वास्थ्य शत्रु की गिरगिटिया गिरफ्त में है। हमारे समक्ष सपनों व निर्मम हकीकत के मध्य...
कविता

कौशल किशोर का कविता पाठ ‘यह गम अपना, हम सब का साझा’

शतीन्द्रनाथ चौधुरी अतुल्य हिन्दी के मंच से कौशल किशोर का काव्यपाठ यू-ट्यूब पर सुना। इसका संजीव प्रसारण इसी मंच से 2 जुलाई को हुआ। उन्होंने...
कविता

संजय शेफर्ड की कविताएँ: आजकल मैं तुम्हारी हँसी ओढ़ता हूँ..

समकालीन जनमत
गणेश गनी तो वह टीले दर टीले चढ़ते हुए चैहणी दर्रे के ठीक ऊपर पहुँच ही गया। बादल ठीक उसके समानांतर तैर रहे हैं। जो...
स्मृति

गरीबों, मजदूरों के अगुवा नेता थे कामरेड अलाउद्दीन शास्त्री -रामजी राय

पीलीभीत। पूरनपुर के पंचम दास इंटर कालेज में भाकपा माले द्वारा आयोजित कामरेड अलाउद्दीन शास्त्री की श्रद्धांजलि सभा में भाकपा माले और विभिन्न धाराओं से...
पुस्तक

पुस्तक अंश : मार्क्स के आखिरी दिन

समकालीन जनमत
( अपने जीवन के आखिरी सालों में मार्क्स ने अपना शोध नये क्षेत्रों में विस्तारित किया- ताजातरीन मानव शास्त्रीय खोजों का अध्ययन किया, पूंजीवाद से...
साहित्य-संस्कृति

नागार्जुन की आलोचना

गोपाल प्रधान
नागार्जुन कवि थे, उपन्यासकार थे। थोड़ा ध्यान देकर देखें तो अनुवादक भी थे। लेकिन आलोचक ? और वह भी तब जब खुद उन्होंने आलोचक के...
चित्रकला

सत्ता प्रायोजित सौंदर्य प्रतिमान के विरुद्ध नया सौंदर्य प्रतिमान गढ़ती अजय शर्मा की कला

अजय शर्मा की कलाकृतियों पर गौर करते हुए यह कहा जा सकता है कि वे भी अपनी कलात्‍मक जिजीविषा को विस्तार देने के लिए लंबे...
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