समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

‘मोह’ के कवि हरिराम द्विवेदी

बलभद्र
हरिराम द्विवेदी भोजपुरी कविता का एक सुपरिचित नाम है। 12 मार्च 1936 को जन्मे 85 पार के द्विवेदी जी भोजपुरी साहित्य-जगत में किसी परिचय के...
साहित्य-संस्कृति

सहरा करीमी जैसी तमाम आवाजों के साथ खड़े होने की जरूरत : प्रतिरोध का सिनेमा

समकालीन जनमत
“हमें अफ़ग़ान महिलाओं, बच्चों, कलाकारों और फ़िल्म निर्माताओं की ओर से आपके समर्थन और आवाज़ की ज़रूरत है। यह सबसे बड़ी मदद है, जिसकी हमें...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: पैरसाइट (दक्षिण कोरियाई) और द प्लैटफॉर्म (स्पैनिश): अमीरों के लिए जो मौसम सुहाना, गरीबों की वह त्रासदी है..

फ़िरोज़ ख़ान
दक्षिण कोरिया में कई अमीर लोगों ने ऐसे घर बना रखे हैं कि जहां अगर ऐटमी हमला हो, तो उनके तहखानों में कुछ समय तक...
कविता

ज़ु लिज़ी की कविताएँ पाठक वर्ग के बीच अपनी समझ को डी-क्लास करने की मांग करती हैं

समकालीन जनमत
तनुज  समाजवाद के उत्तर-संक्रांति काल के दौरान विश्व बाज़ार से प्रभावित होकर चीन की बदली आर्थिक नीतियाँ और पूंजीवादी दक्षिणपंथी भटकाव ने देश की भीतरी...
स्मृति

 ‘ डेजी नारायण लोकतंत्र की लड़ाई में सामूहिक ऊर्जा की स्रोत हैं ’

समकालीन जनमत
पटना. आइसा, इनौस, एआइपीएफ व ऐपवा की ओर से आज माले विधायक दल कार्यालय में प्रो. डेजी नारायण की याद में  श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन...
साहित्य-संस्कृति

कथाकार फ़रज़ाना महदी जसम के संयोजक और संस्कृतिकर्मी कलीम खान सह संयोजक बने 

लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की लखनऊ इकाई का पुनर्गठन किया गया है। कथाकार फ़रज़ाना महदी संयोजक और संस्कृतिकर्मी कलीम खान सह संयोजक बनाए गए।...
कविता

किसने आखिर ऐसा समाज रच डाला है

सुधीर सुमन
सुधीर सुमन  “नहीं निकली नदी कोई पिछले चार-पाँच सौ साल से/ एकाध ज्वालामुखी ज़रूर फूटते दिखाई दे जाते हैं/ कभी कभार/ बाढ़ें तो आईं ख़ैर...
कहानी

‘ हिंदुत्व की राजनीति और काॅरपोरेट के गठजोड़ को चित्रित करने वाले कहानीकार हैं संजीव ’

आसनसोल में संजीव अमृत महोत्सव के दूसरे दिन 8 अगस्त को संजीव के कथा-साहित्य के महत्त्व पर केंद्रित दो सत्रों- ‘ बदलता हुआ भारत और...
पुस्तक

कुर्सी के लिए कत्ल: गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
2019 में शब्दलोक प्रकाशन से छपी किताब ‘सत्ता की सूली’ को तीन पत्रकारों ने मिलकर लिखा है । इस किताब ने वर्तमान पत्रकारिता को चारण...
कविता

मेहजबीं की कविताएँ अपने समय की अंतहीन बेचैनी का बयान हैं

समकालीन जनमत
संजय कुमार कुंदन मेहजबीं की कविताएँ और नज़्में बातें करती हैं, दुनिया-जहान की बातें. कविताएँ और नज़्में बस हिन्दी और उर्दू के शब्दों की उल्लेखनीय...
साहित्य-संस्कृति

संजीव का साहित्य समकालीन भारत का आदमकद आईना है : रविभूषण

सुधीर सुमन
आसनसोल में कथाकार संजीव के 75वें वर्ष पर दो दिवसीय आयोजन आज आसनसोल, पश्चिम बंगाल में कथाकार संजीव के 75वें वर्ष पर होने वाले आयोजनों...
स्मृति

मानवाधिकार कार्यकर्ता, इतिहासविज्ञ प्रो. डेजी नारायण का निधन अपूरणीय क्षति

समकालीन जनमत
पटना । भाकपा-माले की बिहार राज्य कमिटी ने देश की जानी मानी इतिहासविज्ञ, पटना विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष, प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता, पीयूसीएल की...
नाटक

 प्रेमचंद जयंती पर नाटक ‘ मोटेराम शास्त्री ’ का मंचन

समकालीन जनमत
बेगूसराय। जसम की नाट्य इकाई रंगनायक द लेफ्ट थियेटर ने प्रेमचंद जयंती पर तिलकनगर में प्रेमचंद की कहानी ‘ मोटेराम शास्त्री ‘  का डिजिटल मंचन...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: बिफोर ट्रायलॉजी (बिफोर सनराइज, बिफोर सनसेट, बिफोर मिडनाइट) (अमेरिकन): तमाम उम्र सताती है उस एक रात की याद…

फ़िरोज़ ख़ान
  ट्रेन हंगरी के शहर बुडापेस्ट से पेरिस जा रही है। एक अमेरिकन लड़का जेसी अपनी प्रेमिका से रिश्ता खत्म करके अमेरिका लौट रहा है...
कविता

सुशील कुमार की कविताएँ मौजूदा सत्ता संरचना और व्यवस्था का प्रतिपक्ष रचती हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   मुक्तिबोध कालयात्री की बात करते हैं। मतलब कविता अपने काल के साथ सफर करती है । उसका अटूट रिश्ता काल से है...
कहानी

जाति-वर्ण का प्रश्न और चतुरी चमार 

दुर्गा सिंह
बतौर नैरेटर/नायक निराला अपनी कहानियों में सकर्मक भूमिका में रहते हैं। सामाजिक परिवर्तन का विचार उनकी कहानियों में स्वाधीनता संघर्ष के विचार के साथ मिलकर...
कविता

शुभम श्री की कविताएँ: मामूली से दिखने वाले बेहद ज़रूरी सवाल

समकालीन जनमत
दीपशिखा शुभम की कविताएँ हमारे समय और समाज में मौजूद रोज़मर्रा के उन तमाम दृश्यों और ज़रूरतों की भावनात्मक अभिव्यक्ति हैं, जिन्हें आमतौर पर देखते...
कविता

बरसात की आस और वसंत की आगवानी का कवि नरेंद्र

बलभद्र
10 मार्च 1989 को बिहार के कोने-कोने से आए हजारों-हजार गरीब-गुरबों से पटना का गाँधी मैदान सुसज्जित था। लाल-लाल झंडे लहरा रहे थे और ‘आई....
पुस्तक

जंग के बीच प्रेम और शांति की तलाश का आख्यान है ‘अजनबी जज़ीरा’

जनार्दन
आग में खिलता गुलाब? अपने अंतिम दिनों में सद्दाम हुसैन जिन सैनिकों की निगरानी में रहते रहे उन सैनिकों को ‘सुपर ट्वेल्व’ कहा जाता था।...
कहानी

वास्को डी गामा की साइकिलः लोकतंत्र में उम्मीद और छल की कहानी

समकालीन जनमत
कुँवर प्रांजल सिंह सामान्यतः “आम और ख़ास” बनने की बीमारी और खूबी प्रत्येक भारतीय में लगभग- लगभग पायी जाती है l इस पूरी अवधारणा का...
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