समकालीन जनमत
स्मृति

बेमिसाल अभिनेत्री थीं सुरेखा सीकरी

पटना। जन संस्कृति मंच और हिरावल ने रंगमंच, फिल्म और टीवी की मशहूर अभिनेत्री सुरेखा सीकरी के निधन पर गहरा शोक जाहिर किया है।

जसम के राज्य सचिव सुधीर सुमन, जसम पटना के संयोजक राजेश कमल और हिरावल के सचिव संतोष झा ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि सुरेखा सीकरी एक बेमिसाल अभिनेत्री थीं। 75 साल की उम्र में दिल का दौरा से उनका निधन हुआ। उम्र के इस पड़ाव पर भी अभिनय के प्रति उनका अनुशासन और प्रतिबद्धता बेहद अनुकरणीय है। नई सदी में उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों को अपनी अभिनय प्रतिभा के बल पर लोकप्रिय बनाया और घर-घर तक उनकी पहचान बनी। लेकिन उनकी अभिनय के पीछे एनएसडी की शिक्षा और प्रशिक्षण की प्रमुख भूमिका थी। उन्होंने एनएसडी की रिपेर्टरी में लगभग 15 साल तक काम किया। जहां उन्हें मुख्यमंत्री, संध्याछाया, बेगम का तकिया, अंकल वान्या, थ्री सिस्टर्स समेत कई नाटकों में अभिनय करने का मौका मिला। वैसे वे संयोग से एनएसडी आईं। उनकी रुचि पढ़ने-लिखने में थी। वे लेखन की दुनिया में जाना चाहती थीं। फैज, रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जैसे रचनाकारों की रचनाओं के उनके द्वारा किए गए पाठ को बहुत पसंद किया जाता रहा है। यूट्यूब पर उपलब्ध उनके ऐसे वीडियो काफी लोकप्रिय हैं।

1978 में ‘किस्सा कुर्सी का’ फिल्म के जरिए वे फिल्मों की दुनिया में आईं। सलीम लंगड़े पर मत रो, मम्मो, नसीम, जुबैदा, सरदारी बेगम, हरी भरी, रेनकोट आदि उनकी यादगार फिल्में हैं। 2018 में बनी फिल्म ‘बधाई हो’ में उन्होंने दादी की अविस्मरणीय भूमिका कीं। देश विभाजन और सांप्रदायिकता की त्रासदी पर लिखे गए भीष्म साहनी के बहुचर्चित उपन्यास ‘तमस’ पर बनी फिल्म और टीवी सीरियल में बेमिसाल अभिनय के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उसके लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवार्ड मिला था। ‘मम्मो’ और ‘बधाई हो’ के लिए भी उन्हें नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया था। 1989 में उन्होंने संगीत नाटक अकैडमी अवार्ड भी पाया था। उनकी सहज यथार्थवादी अभिनय शैली और गूंजती हुई आवाज दर्शकों के जेहन में हमेशा मौजूद रहेगी।

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