समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

कोरोना काल में स्त्री कविता :  ‘ये खाई सदियों पुरानी है/यह सूखी रोटी और पिज्जा के बीच की खाई है’

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच की ओर से फेसबुक पर चलाये जा रहे ‘कविता संवाद’ लाइव कार्यक्रम के तहत 26 अप्रैल को सात कवयित्रियों  की रचनाएं सुनाई...
पुस्तक

लोकतंत्र का मर्सिया हैं ‘सुगम’ की ग़ज़लें

दुर्गा सिंह
  हिंदी ग़ज़ल में महेश कटारे ‘सुगम’ जाना-माना नाम है। ‘सुगम’ हिंदी ग़ज़ल की उसी परंपरा से आते हैं, जिसे दुष्यंत, अदम गोंडवी, शलभ श्रीराम...
स्मृति

‘गाओ कि जीवन गीत बन जाए’ लिखने वाले कवि, गीतकार महेन्द्र भटनागर नहीं रहे

कौशल किशोर
महेन्द्र भटनागर की कविताएं बाहर की दुनिया के साथ भीतर की दुनिया में उतरती हैं. प्रणय और प्रकृति प्रेम पर लिखी  इनकी कविताएं हमें केदारनाथ...
सिनेमा

द फेमिली मैन – हर जगह खास करने के लिए संघर्ष करते आम आदमी के घर और बाहर की कहानी

पंकज पाण्डेय
हमारे समय के सभी मत्वपूर्ण सवालों पर कमेंट करती यह वेब सीरीज है, जिसे राज निदिमोरू, और कृष्ण डी. के. ने एक कहानी के माध्यम...
कविता

यातना का साहस भरा साक्षात्कार हैं लाल्टू की कविताएँ

आशुतोष कुमार
धरती प्रकृति ने बनाई है. लेकिन दुनिया आदमी ने बनाई हैं. दुनिया की बीमारियाँ , पागलपन और विक्षिप्तियाँ भी आदमी ने बनाई हैं. लेकिन कविता,...
स्मृति

जिंदादिली और जीवटता की अद्भुत मिसाल थे कामरेड अखिलानंद पांडेय

समकालीन जनमत
ऐसे प्रतिबद्ध, जिंदादिल एवं अद्भुत जीवट वाले बहादुर कम्युनिस्ट योद्धा का हमारे बीच से जाना समूचे कम्युनिस्ट व मजदूर आंदोलन की भारी क्षति है....
पुस्तक

अछरिया हमरा के भावेले

गोपाल प्रधान
पुस्तकालय केवल कोई इमारत नहीं होता बल्कि सम्पूर्ण सामाजिक ढांचा होता है। किताब में जो जानकारी कूटबद्ध होती है उसे हासिल करने के जरिए हम...
स्मृति

विजय दिवस : बाबू कुँवर सिंह तेगवा बहादुर

बलभद्र
फगुआ के दिन ढोल-झाल के साथ लोग ताल ठोका करते थे। बारह बजे के बाद सेवक काका (रामसेवक सिंह) के दुआर पर लोग जमा होने...
पुस्तक

विश्व पुस्तक दिवस: किताबें कुछ तो कहना चाहती हैं

अजय कुमार किताबें करती हैं बातें आज यानी 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाया जाता है। और जैसे ही कोई किताबों...
स्मृति

सत्‍यजीत राय – आत्‍मबोध की विश्‍वजनीनता

समकालीन जनमत
 कुमार मुकुल जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने...
सिनेमा

अतियथार्थवाद का जोखिम भरा रास्ता अख़्तियार करती मणि कौल की ‘उसकी रोटी’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है समानांतर सिनेमा के जरूरी हस्ताक्षर मणि कौल की उसकी रोटी । समकालीन जनमत केेे...
स्मृति

लेनिन : जो समय से प्रभावित ही नहीं, जिसने समय को प्रभावित भी किया

गोपाल प्रधान
1917 के अक्टूबर/नवम्बर महीने में रूस में एक ऐतिहासिक अश्रुतपूर्व प्रयास हुआ। वह प्रयास उन्नीसवीं सदी की क्रांतियों को पूर्णता प्रदान करने वाला था और...
कविता

कोरोना काल में कविता :  ‘ रिसते दिखे पाँवों से खून, इस पर क्या लिखूं / दिखे आंखों से बहते खून…..

समकालीन जनमत
कविता अपने समय को रचती है  और समय  भी अपने कवि को बनाता है। कोरोना काल मानव जाति के लिए बड़ा  संकट का काल है।...
कविता

दिव्या की कविताएँ काव्य जगत के आपसी संचार की टूटन को जोड़ने का प्रयास करती हैं

समकालीन जनमत
सुघोष मिश्र _________________________________________ अभिव्यक्ति किसी रचना का पहला सोपान है। हम अपने सुख, दुःख, आशा, निराशा, भय, क्रोध, स्वप्न और संदेश विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त...
कहानी

एक कहानी : पाठ और प्रक्रिया

दुर्गा सिंह
अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में एक मामला आया, जिसमें भारत के उत्तर-पूर्व की एक छात्रा ने कहा; कि उसे ‘कोरोना’ कहा गया। यह मानवीय...
कविताशख्सियत

मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा

समकालीन जनमत
ममता मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा, जनकवि  रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 5 दिसम्बर...
सिनेमा

औरत की जानिब समाज की सच्चाइयों का आइना है ‘ भूमिका ’

मुकेश आनंद
( श्याम बेनेगल निर्देशित और स्मिता पाटिल अभिनीत फिल्म ‘भूमिका’ को 1977 के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. विश्व और भारतीय सिनेमा की...
कविता

कोरोना काल में कविता : ‘ प्रेम संवाद की भाषा बन जाए ’

समकालीन जनमत
यह कोरोना काल है। पूरी दुनिया इस महामारी के खिलाफ जंग लड़ रही है। लाॅक डाउन चल रहा है। लोग घरों में हैं। सामाजिक व...
सिनेमा

युवा महत्वाकांक्षा और सहज ग्रामीण जीवन संघर्ष की कथा ‘पंचायत’

शालू यादव
नॉवल कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते दुनियां भर में कई देशों ने सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी है. भारत में भी सम्पूर्ण...
कविता

राग रंजन की कविताएँ सूक्ष्म अंतर्दृष्टि और ज़मीनी यथार्थ के ताने बाने की निर्मिति हैं

समकालीन जनमत
रंजना मिश्र बकौल राग रंजन वे ‘साहित्यकारों के मोहल्ले के ऐसे बच्चे हैं जो कभी कभी किसी दरवाज़े की घंटी बजाकर भाग जाते हैं.’ मेरा...
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