Tag : poet

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पटना में चौथा गोरख पांडेय स्मृृृति आयोजन : गोरख के गीतों-कविताओं का पाठ और गायन

समकालीन जनमत
मुल्क को फासीवादी शक्तियों से बचाना जरूरी: प्रेम कुमार मणि पटना. ‘‘ कोई भी देश वहां के लोगों से बनता है। आजादी के आंदोलन के...
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श्रद्धांजलि सभा में कवि बी एन गौड़ को याद किया गया

समकालीन जनमत
लखनऊ। ‘  कवि बी एन गौड़ के अन्दर एक बेचैनी थी जो संघर्षशील व ईमानदार आदमी के अन्दर होती है। उनकी बेचैनी को अपने पत्रकार...
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‘क्रान्तिरथी’ और ‘मैं 1857 बोल रहा हूं’ के रचनाकार कवि बी एन गौड़ नहीं रहे

  लखनऊ, 3 जनवरी। ‘हर शोषण के उत्पीड़न के/हो विरुद्ध जो क्रान्ति वो सुन्दर है/धरती जब ज्वालामुखी बनती/तब जानो कि ज्वाला भी अन्दर है/इस भाँति...
खबर साहित्य-संस्कृति

कवि व लेखक सुधीर सक्सेना को केदारनाथ अग्रवाल सम्मान

समकालीन जनमत
लम्बी कविताओं के कवि हैं सुधीर सक्सेना – स्वप्निल श्रीवास्तव कविताओं में मनुष्य और मनुष्यता की पहचान – कौशल किशोर बाँदा . ‘ मुक्तिचक्र ‘...
साहित्य-संस्कृति

‘ नज़र में कोई मंज़िल है तो मौजे-वक़्त को देखो ’

 मशहूर शायर रफ़ीउद्दीन राज़ ने ग़ज़लों और नज़्मों का पाठ किया पटना. आईएमए हाॅल, पटना में जन संस्कृति मंच ने 21 अक्टूबर को मशहूर शायर...
साहित्य-संस्कृति

असम के कवियों पर दर्ज मुक़दमा वापस लो !

समकालीन जनमत
  जन संस्कृति मंच का बयान 31 जुलाई को असम में नागरिकता रजिस्टर जारी होने वाला है। असम में इस मुद्दे पर भेदभाव के ख़िलाफ़...
कविता

केदार सम्मान से सम्मानित हुए कवि शंभु बादल

उमाशंकर सिंह परमार लखनऊ/बांदा। मशहूर जनकवि केदारनाथ अग्रवाल के निर्वाण दिवस के अवसर पर 22 जून को ‘जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान’, विमोचन और कविता पाठ...
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कवि रामेश्वर प्रशान्त नहीं रहे

कौशल किशोर
क्रान्तिकारी कवि व एक्टिविस्ट रामेश्वर प्रशान्त का निधन आज 6 जून को सुबह साढ़े दस बजे बेगूसराय के गढ़हरा में हो गया। काफी अरसे से...
कविता

कई आँखोंवाली कविताओं के कवि शशांक मुकुट शेखर

समकालीन जनमत
कृष्ण समिद्ध नये और बनते हुए कवि पर लिखना बीज में बंद पेड़ के फल के स्वाद पर लिखने जैसा है । फिर भी यह...
खबर शख्सियत साहित्य-संस्कृति

विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं किया

मृत्युंजय
विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी...
जनमत

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्या स्वतंत्र चेतना से डर लगने लगा है

समकालीन जनमत
यह मसला सिर्फ एक व्यक्ति के अपमान का नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्या स्वतंत्र चेतना...