समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

स्मृति

जिंदादिली और जीवटता की अद्भुत मिसाल थे कामरेड अखिलानंद पांडेय

समकालीन जनमत
ऐसे प्रतिबद्ध, जिंदादिल एवं अद्भुत जीवट वाले बहादुर कम्युनिस्ट योद्धा का हमारे बीच से जाना समूचे कम्युनिस्ट व मजदूर आंदोलन की भारी क्षति है....
पुस्तक

अछरिया हमरा के भावेले

गोपाल प्रधान
पुस्तकालय केवल कोई इमारत नहीं होता बल्कि सम्पूर्ण सामाजिक ढांचा होता है। किताब में जो जानकारी कूटबद्ध होती है उसे हासिल करने के जरिए हम...
स्मृति

विजय दिवस : बाबू कुँवर सिंह तेगवा बहादुर

बलभद्र
फगुआ के दिन ढोल-झाल के साथ लोग ताल ठोका करते थे। बारह बजे के बाद सेवक काका (रामसेवक सिंह) के दुआर पर लोग जमा होने...
पुस्तक

विश्व पुस्तक दिवस: किताबें कुछ तो कहना चाहती हैं

अजय कुमार किताबें करती हैं बातें आज यानी 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाया जाता है। और जैसे ही कोई किताबों...
स्मृति

सत्‍यजीत राय – आत्‍मबोध की विश्‍वजनीनता

समकालीन जनमत
 कुमार मुकुल जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने...
सिनेमा

अतियथार्थवाद का जोखिम भरा रास्ता अख़्तियार करती मणि कौल की ‘उसकी रोटी’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है समानांतर सिनेमा के जरूरी हस्ताक्षर मणि कौल की उसकी रोटी । समकालीन जनमत केेे...
स्मृति

लेनिन : जो समय से प्रभावित ही नहीं, जिसने समय को प्रभावित भी किया

गोपाल प्रधान
1917 के अक्टूबर/नवम्बर महीने में रूस में एक ऐतिहासिक अश्रुतपूर्व प्रयास हुआ। वह प्रयास उन्नीसवीं सदी की क्रांतियों को पूर्णता प्रदान करने वाला था और...
कविता

कोरोना काल में कविता :  ‘ रिसते दिखे पाँवों से खून, इस पर क्या लिखूं / दिखे आंखों से बहते खून…..

समकालीन जनमत
कविता अपने समय को रचती है  और समय  भी अपने कवि को बनाता है। कोरोना काल मानव जाति के लिए बड़ा  संकट का काल है।...
कविता

दिव्या की कविताएँ काव्य जगत के आपसी संचार की टूटन को जोड़ने का प्रयास करती हैं

समकालीन जनमत
सुघोष मिश्र _________________________________________ अभिव्यक्ति किसी रचना का पहला सोपान है। हम अपने सुख, दुःख, आशा, निराशा, भय, क्रोध, स्वप्न और संदेश विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त...
कहानी

एक कहानी : पाठ और प्रक्रिया

दुर्गा सिंह
अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में एक मामला आया, जिसमें भारत के उत्तर-पूर्व की एक छात्रा ने कहा; कि उसे ‘कोरोना’ कहा गया। यह मानवीय...
कविताशख्सियत

मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा

समकालीन जनमत
ममता मुझें मसीहाई में यक़ीन है ही नहीं, मैं मानता ही नहीं कि कोई मुझसे बड़ा होगा, जनकवि  रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 5 दिसम्बर...
सिनेमा

औरत की जानिब समाज की सच्चाइयों का आइना है ‘ भूमिका ’

मुकेश आनंद
( श्याम बेनेगल निर्देशित और स्मिता पाटिल अभिनीत फिल्म ‘भूमिका’ को 1977 के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. विश्व और भारतीय सिनेमा की...
कविता

कोरोना काल में कविता : ‘ प्रेम संवाद की भाषा बन जाए ’

समकालीन जनमत
यह कोरोना काल है। पूरी दुनिया इस महामारी के खिलाफ जंग लड़ रही है। लाॅक डाउन चल रहा है। लोग घरों में हैं। सामाजिक व...
सिनेमा

युवा महत्वाकांक्षा और सहज ग्रामीण जीवन संघर्ष की कथा ‘पंचायत’

शालू यादव
नॉवल कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते दुनियां भर में कई देशों ने सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी है. भारत में भी सम्पूर्ण...
कविता

राग रंजन की कविताएँ सूक्ष्म अंतर्दृष्टि और ज़मीनी यथार्थ के ताने बाने की निर्मिति हैं

समकालीन जनमत
रंजना मिश्र बकौल राग रंजन वे ‘साहित्यकारों के मोहल्ले के ऐसे बच्चे हैं जो कभी कभी किसी दरवाज़े की घंटी बजाकर भाग जाते हैं.’ मेरा...
पुस्तक

फ़्रांस में फ़ासीवाद

गोपाल प्रधान
 2020 में ब्लूम्सबरी एकेडमिक से क्रिस मिलिंगटन की किताब ‘ए हिस्ट्री आफ़ फ़ासिज्म इन फ़्रान्स: फ़्राम द फ़र्स्ट वर्ल्ड वार टु द नेशनल फ़्रंट’ का...
सिनेमा

जर्जर मध्यवर्गीय दाम्पत्य जीवन की त्रासदी का बयान है ‘अमेरिकन ब्यूटी’

मुकेश आनंद
(1999 में प्रदर्शित सैम मेंडेस निर्देशित ‘अमेरिकन ब्यूटी’ को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन  के ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । यहाँ...
साहित्य-संस्कृति

तबला : बनारस घराना और उसकी विशेषता

तबले पर अँगुलियों के रख-रखाव और बोलों को निकालने के अपने अलग-अलग तरीकों के कारण ही घरानों में भिन्नता है। बनारस घराना की नींव पंडित...
पुस्तक

विनाशक पूंजीवाद

गोपाल प्रधान
2007 में मेट्रोपोलिटन बुक्स से नाओमी क्लीन की किताब ‘द शाक डाक्ट्रिन: द राइज आफ़ डिसास्टर कैपिटलिज्म ’ का प्रकाशन हुआ । नाओमी क्लीन ने...
पुस्तक

‘अस्थि फूल’: यात्रा एक अंधी सुरंग की

कैलाश बनवासी
 ‘अस्थि फूल ’ उपन्यास पूरा पढ़ लेने के बाद, बल्कि पूरा पढ़ने के दौरान,पृष्ठ-दर-पृष्ठ एक बात का तीव्र से तीव्रतर अहसास होता रहा कि इसे...
Fearlessly expressing peoples opinion