समकालीन जनमत

Author: राम पुनियानी

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जनमत

सुनियोजित ढंग से निर्मित किये जा रहे आख्यान का भाग है कंगना रनौत का वक्तव्य

राम पुनियानी
बात सिर्फ कंगना की अज्ञानता तक सीमित नहीं है. उनका वक्तव्य उस नए आख्यान का भाग है जिसे पिछले कई दशकों से सुनियोजित ढंग से...
जनमत

स्वतंत्र भारत : सपने जो पूरे न हो सके

राम पुनियानी
औपनिवेशिक शासन से भारत की मुक्ति के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वाधीनता आंदोलन के नेताओं के सपनों और आकांक्षाओं का अत्यंत...
ज़ेर-ए-बहस

कोविड-19 से मुकाबला और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

राम पुनियानी
भारत के कोविड महामारी की चपेट में आने बाद इस बीमारी का इलाज खोज निकालने का दावा करने वालों में बाबा रामदेव शायद सबसे पहले...
जनमत

भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और ईसाई अल्पसंख्यक

राम पुनियानी
हाल में जारी अपनी रिपोर्ट में ‘फ्रीडम हाउस’ ने भारत का दर्जा ‘फ्री’ (स्वतंत्र) से घटाकर ‘पार्टली फ्री’ (अशंतः स्वतंत्र) कर दिया है. इसका कारण...
ज़ेर-ए-बहस

क्या धर्मनिरपेक्षता भारत की परंपराओं के लिए खतरा है ?

राम पुनियानी
भारत को एक लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश राज से मुक्ति मिली. यह संघर्ष समावेशी और बहुवादी था. जिस संविधान को...
स्मृति

प्रोफेसर डी.एन. झा : तथ्यात्मक इतिहास लेखन से साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद की चुनौती से मुकाबला

राम पुनियानी
झा उन विद्वानों में से थे जिन्होंने सक्रिय रूप से एक बेहतर समाज के निर्माण के संघर्ष में अपना योगदान दिया - एक ऐसे समाज...
जनमत

कोरोना क़हर के बीच फैलता नफ़रत का वायरस 

राम पुनियानी
समाज के कमज़ोर वर्गों के मानवाधिकारों के उल्लंघन और उनके खिलाफ हिंसा के पीछे अक्सर बेबुनियाद धारणाएं होतीं हैं. भारत में सन 1980 के दशक...
ज़ेर-ए-बहस

“गोली मारो..”: हिंसा और घृणा का निर्माण

राम पुनियानी
  नोएम चोमस्की, दुनिया में शांति की स्थापना के लिए काम करने वाले शीर्ष व्यक्तित्वों में से एक हैं. कई साल पहले, वियतनाम पर अमरीका...
जनमत ज़ेर-ए-बहस

नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस: झूठ का भ्रमजाल कौन ज़िम्मेदार था देश के विभाजन के लिए?

राम पुनियानी
संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम पर विविध प्रतिक्रयाएं सामने आईं हैं, जिनमें से कई नकारात्मक हैं. एक ओर जहाँ उत्तरपूर्व में...
जनमत

स्वामी नित्यानंद का हिन्दू राष्ट्र

राम पुनियानी
धर्म कदाचित मानवता की सबसे जटिल परिकल्पना है. सदियों से दार्शनिक और विद्वतजन धर्म को समझने और उसे परिभाषित करने का प्रयास कर रहे हैं....
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