समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

हिन्दी के शेक्सपियर: रांगेय राघव

समकालीन जनमत
अभिषेक मिश्र  हममें से अधिकांश लोग जिस उम्र तक अपने लक्ष्य को लेकर उधेड़बुन में ही रहते हैं, आज कल कई लोग जिस उम्र के...
सिनेमा

13 वां गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल 19-20 जनवरी को

गोरखपुर.  गोरखपुर फिल्म सोसाइटी और जन संस्कृति मंच द्वारा 13वें गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल का आयोजन 19-20 जनवरी को सिविल लाइंस स्थित गोकुल अतिथि भवन में...
नाटक

संगवारी ढ़ेला वर्कशॉप : बच्चों के साथ सार्थक थिएटर की शुरुआत

समकालीन जनमत
कपिल शर्मा रामनगर (उत्तराखंड). संस्कृति का सबसे ज़रूरी आयाम होता है, संस्कृति कर्म को विविध विधाओं के ज़रिए हाशिए पर के समाज तक पहुंचाना। रचनात्मक...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

महाअरण्य की माँ- महाश्वेता देवी

समकालीन जनमत
अभिषेक मिश्र वर्षों पहले ‘दैनिक हिंदुस्तान’ में प्रसिद्ध लेखक कमलेश्वर का एक साप्ताहिक कॉलम आया करता था, जिसमें वो सांप्रदायिकता, राष्ट्रीय एकता, धर्मनिरपेक्षता आदि विषयों...
कविता

जटिल यथार्थ का सरल कवि जसबीर त्यागी

समकालीन जनमत
संजीव कौशल जसबीर त्यागी आम जीवन में जितने सहज और सरल हैं वही सहजता और सरलता उनकी कविताओं में भी देखी जा सकती है लेकिन...
कविता

माटी पानी : सत्ता और समय की पहचान

समकालीन जनमत
रवि श्रीवास्तव सदानंद शाही के कविता संकलन ‘माटी-पानी’ को पढ़ते हुए मिर्ज़ा ग़ालिब का एक शेर याद आया- ‘ जो उलझी थी कभी आदम के...
साहित्य-संस्कृति

जसम की ओर से रचना पाठ ‘पंख खोलूं और उड़ चलूं आसमान में’

कौशल किशोर
लखनऊ: रचनाकार समय और समाज को अपने सृजन का विषय बनाता है। आम आदमी की पीड़ा व संघर्ष की अभिव्यक्ति आज की रचनाओं की विशेषता...
कविता

समय की विद्रूपताओं की शिनाख़्त करतीं अनिल की कविताएँ

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा और चर्चित कवि अनिल करमेले की कविताओं से गुजरना अपने समकालीन समय-समाज की विद्रूपताओं की शिनाख्त करना है। यह दुष्कर कवि-कर्म वे...
कविता

विमल किशोर की कविताएं

समकालीन जनमत
1980 के दशक में लखनऊ में गठित ‘महिला संघर्ष मोर्चा’ से विमल किशोर ने सामाजिक जीवन का आरम्भ किया। वे इस संगठन की सह संयोजक...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

इंसानी गरिमा और मानवीय संस्कृति को बचाना है तो तार्किक समाज का सपना देखना होगा

समकालीन जनमत
ममता सिंह  3 जनवरी को अग्रेसर अमेठी में सावित्री बाई फुले पुस्तकालय के पहले स्थापना समारोह में अपनी बात रखते हुए डॉ. राधेश्याम सिंह ने...
साहित्य-संस्कृति

नुक्कड पर गीत, कविता पाठ और नाटक के साथ हुआ जसम का सातवां जिला सम्मेलन

बेगुसराय. रंगकर्मी सफदर हाशमी की शहादत दिवस पर जसम बेगूसराय ने सातवा जिला सम्मेलन आयोजित किया. इस मौके पर जनवादी गीत , काव्य पाठ तथा...
सिनेमा

झीलों के शहर उदयपुर में नए सिनेमा की गरमाहट

संजय जोशी
रिंकू परिहार, उदयपुर फ़िल्म फेस्टिवल बीते दिसंबर के आख़िरी तीन दिन नए सिनेमा की गरमाहट से लबरेज थे. मौका था प्रतिरोध का सिनेमा अभियान के 67...
नाटकशख्सियत

हम सब सफ़दर, हमको मारो

कौशल किशोर
कौशल किशोर नये साल का पहला दिन, चारों तरफ कोहरा फेैला था। हाड़ कंपाती ठंडी हवा हड्डियों को छेद रही थी।लखनऊ के गोमती नदी के...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

काशीनाथ सिंह सामाजिक संस्थानिक परिवर्तनों को पकड़ने वाले कथाकार हैं

(साठोत्तरी कहानी के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर काशी नाथ सिंह का आज जन्मदिन है ।इस मौके पर प्रस्तुत है ‘कथा’ के संपादक, युवा आलोचक दुर्गा सिंह का...
साहित्य-संस्कृति

रामजी तिवारी, सोनी पांडे,शालिनी श्रीवास्तव, शैलेंद्र मिश्र, आनंद चौहान, रूपेश सिंह को “संकल्प सम्मान ”

समकालीन जनमत
बलिया. साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था “संकल्प ” द्वारा “संकल्प सम्मान समारोह – 2018” का आयोजन मोती केशव कलवार धर्मशाला के सभागार में किया गया....
ख़बरसिनेमा

भुवन शोम : एक पंछी का शिकार या प्रेम की पींगें

संजय जोशी
(बांग्ला फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक मृणाल सेन का आज कोलकाता स्थित उनके आवास पर 95 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया । मृणाल सेन...
साहित्य-संस्कृति

मीर, ग़ालिब, नज़ीर के बग़ैर भारतीय साहित्य की संकल्पना पूरी नहीं -असद ज़ैदी

समकालीन जनमत
आगरा. दयालबाग़ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के कला संकाय की ओर से आयोजित ‘गालिब जयंती’ समारोह के मुख्य अतिथि के बतौर बोलते हुए प्रसिद्ध कवि असद ज़ैदी...
कविता

कई आँखोंवाली कविताओं के कवि शशांक मुकुट शेखर

समकालीन जनमत
कृष्ण समिद्ध नये और बनते हुए कवि पर लिखना बीज में बंद पेड़ के फल के स्वाद पर लिखने जैसा है । फिर भी यह...
सिनेमा

‘ हमें अपना मीडिया बनाना होगा ’

समकालीन जनमत
 छठे उदयपुर फ़िल्म फेस्टिवल का दूसरा दिन रिंकू परिहार/ एस एन एस जिज्ञासु उदयपुर.छठे उदयपुर फ़िल्म फेस्टिवल के दुसरे दिन की शुरुआत युवा फ़िल्मकारों अशफ़ाक,...
नाटक

आरा में चार दिन ‘राग दरबारी’

सुधीर सुमन
आरा की नाट्य संस्था ‘भूमिका’ द्वारा 24 दिसंबर से 27 दिसंबर तक चार दिवसीय नाट्य मंचन का सिलसिला 2015 में मोहन राकेश के नाटक ‘आषाढ़...
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