समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

हिंदी के अभिमान की विदाई

(हिन्दी के सुपरिचित युवा कवि और आलोचक पंकज चतुर्वेदी की तरफ से नामवर सिंह को श्रद्धांजलि ।) आज सुबह यह मालूम होते ही कि डॉक्टर...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

भय, दिग्विजय और नामवरीय ‘विडंबना’

आशुतोष कुमार
(हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे । उन्हें समकालीन जनमत की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि ।) यह एक ऐसा प्रसंग है, जिससे...
जनमतस्मृति

जनतांत्रिक मूल्यों की पक्षधर, निडर रचनाकार-अर्चना वर्मा

समकालीन जनमत
(हंस और कथादेश जैसी पत्रिकाओं का सार्थक सम्पादन कर साहित्यिक पत्रकारिता में स्त्री-हस्तक्षेप के लिए भरपूर गुंजाइश बनाने वाली अर्चना वर्मा गत 16 फरवरी को...
ख़बरसिनेमा

प्रतिरोध का सिनेमा ने की दीपा धनराज की फिल्म ‘वी हैव नॉट कम हियर टु डाई’ की स्क्रीनिंग

कौशल किशोर
लखनऊ, 18 फरवरी। ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ के सिलसिले का आरम्भ करते हुए 17 फरवरी को लखनऊ में डाक्यूमेन्ट्री फिल्म ‘वी हैव नाॅट कम हियर टू...
कविताजनमत

बादलों में आकार की खोज: रमणिका गुप्ता की कविताई

समकालीन जनमत
बजरंग बिहारी तिवारी नारीवादी आंदोलन का दूसरा दौर था. ‘कल्ट ऑफ़ डोमिस्टिसिटी’ को चुनौती दी जा चुकी थी. राजनीति में स्त्री की उपस्थिति को औचित्यपूर्ण,...
साहित्य-संस्कृति

पूछते हैं वो कि गालिब कौन है !

रवि भूषण
आज गालिब (27.12.1797-15.02.1869 ) की डेढ़ सौ वीं पुण्यतिथि है और वे बार-बार याद आ रहे हैं – ‘वह हर इक बात पर कहना कि...
जनमतमीडिया

कार्पोरेट न्यूज मीडिया : धनतंत्र के लिए और धनतंत्र-फासीवाद की सेवा में

आनंद प्रधान
अधिकांश न्यूज चैनलों पर इन दिनों 24×7 अहर्निश “बहस”, “महाबहस”, “दंगल”, “ताल ठोंक के” और इस जैसे और कई चर्चाओं के प्राइम टाइम कार्यक्रमों में...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

निराला की कहानियाँ- आधुनिक बोध, प्रगतिशीलता व स्वाधीन चेतना की प्रबल अभिव्यक्ति

समकालीन जनमत
दुर्गा सिंह निराला के कहानी लेखन का समय 1920 ई के बाद का है। लेकिन पहली ही कहानी में आधुनिक बोध, प्रगतिशीलता व स्वाधीन चेतना...
कविताजनमत

ज्योत्सना की कविताएँ स्त्री-मन की करुणा और सम्वेदना का समकालीन पाठ हैं

समकालीन जनमत
देवेंद्र आर्य ज्योत्सना की कविताएँ स्त्री-मन की करुणा और सम्वेदना का समकालीन पाठ पेश करती हैं , पर उनका समकाल विद्रूप या भौकाल बन कर...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

भारतीय देशज प्रेमाख्यान पर  संगोष्ठी

समकालीन जनमत
दिल्ली विश्वविद्यालय के एआरएसडी कॉलेज में 29 और 30 जनवरी को भारतीय देशज प्रेमाख्यान साहित्य पर सघन और जीवंत संवाद का आयोजन किया गया। साहित्य...
जनमतमीडिया

राजनीति बदलेगी तो मीडिया बदलेगा वरना वह और दुर्दांत हो जायेगा

अनिल यादव
* प्रमुख क्या है कर्म या भाग्य ! * उत्तम क्या है खेती या नौकरी ! * असल क्या है प्रेम या वासना ! *...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

अनामिका को दिया गया रेवांत मुक्तिबोध सम्मान

(स्त्री संघर्ष पुरुषों के विरुद्ध नहीं विपरीत विचारधारा के खिलाफ है।) रोली शंकर ‘उन्होंने चिट्ठी मरोड़ी/और मुझे कोंच दिया काल-कोठरी में/अपनी कलम से मैं लगातार/खोद रही...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

गोरख स्मृति दिवस पर व्याख्यान और काव्य पाठ का आयोजन

विष्णु प्रभाकर
इलाहाबाद. 29 जनवरी को परिवेश और जन संस्कृति मंच की तरफ से गोरख स्मृति व्याख्यान और काव्यपाठ का आयोजन किया गया. प्रो. अवधेश प्रधान ने...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

गोरख की याद में कोरस का ‘सुनना मेरी भी दास्ताँ’

समकालीन जनमत
गोरख स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर 28 जनवरी को कालिदास रंगालय परिसर में कोरस ने कृष्णा सोबती को समर्पित करते हुए गोरख संगीत और...
कविता

कविता के सोलह दस्तावेज़ : गोरख की भोजपुरी कविताएँ

मृत्युंजय
गोरख का काव्य-संसार गहन द्वंद्वात्मक है। उसमें 70 के दशक का उद्दाम वेग और 80 के दशक का ठहराव एक साथ है। सधी हुई दिल...
कविता

‘ गोरख की यादें, उनकी रचनाएँ हम सबको जीने की वजह देती हैं ’

समकालीन जनमत
जलेश्वर उपाध्याय कविता और प्रेम दो ऐसी चीजें हैं जहाँ मनुष्य होने का मुझे बोध होता है। प्रेम मुझे समाज से मिलता है और मैं...
सिनेमा

‘ठाकरे’ नवाजुद्दीन की विस्फोटक प्रतिभा की विफलता का स्मारक क्यों है ?

आशुतोष कुमार
अगर आप बाल ठाकरे और उनकी राजनैतिक शैली के प्रति पहले से ही भक्तिभाव से भरे हुए नहीं हैं, तो फिल्म ‘ ठाकरे ‘ आपको...
नाटक

‘ गगन दमामा बाज्यो ‘ देख दर्शक इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाने लगे

बलिया.  उत्तर प्रदेशीय मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ जनपद शाखा बलिया और संकल्प साहित्यक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया के संयुक्त तत्वाधान में 26 जनवरी को...
कवितास्मृति

गोरख के काव्य में सादगी, अभिधा का सौंदर्य है-चन्द्रेश्वर

गोरख पाण्डेय की स्मृति में लखनऊ में कार्यक्रम शीर्षस्थ कथा लेखिका कृष्णा सोबती को श्रद्धांजलि दी गई लखनऊ. हिन्दी कविता की जो सुदीर्घ परम्परा है,...
सिनेमा

सिनेमाई उत्सव से निकली बहसें

     ओंकार सिंह सिनेमा हमेशा से ही कुछ कहने, सुनने व दिखाने का सशक्त माध्यम रहा है। एक गतिमान समाज के लिये यह जरूरी है...
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