समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

सिनेमा

फ़िल्म समीक्षा- स्पाइडर मैन: फ़ार फ्रॉम होम

अभिषेक मिश्र
स्पाइडर मैन मेरा पसंदीदा कॉमिक चरित्र है, लाखों करोड़ों अन्य लोगों का भी। पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसके प्रशंसकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। बच्चों और...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

नरेन्द्र सिंह नेगी की गीत यात्रा:व्यावसायिकता पर भारी जनसरोकार

(2018 के संगीत नाटक अकादमी सम्मान की घोषणा में उत्तराखंड की दो शख्सियतों के नाम भी हैं. ये नाम हैं लोकगायक,कवि,गीतकार नरेन्द्र सिंह नेगी और...
सिनेमा

मासूमियत भरी उम्मीद जगाती: फ़िल्म हामिद

अभिषेक मिश्र
कश्मीर, कश्मीर की स्थिति, वहाँ के लोगों आदि को लेकर विभिन्न माध्यमों ने आपकी सोच को विभिन्न नजरिये से प्रभावित किया होगा। इसके बारे में...
जनमतपुस्तक

‘बैठकर काशी में अपना भूला काशाना’ : मिर्ज़ा ग़ालिब

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल ‘चिराग़-ए-दैर (मंदिर का दीया)’ मिर्ज़ा ग़ालिब की बनारस पर केंद्रित कविताओं का संकलन है जिसका मूल फारसी से सादिक ने अनुवाद किया है। चिराग़-ए-दैर की...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

आखिरी दौर की डायरी और एक कहानी -मधुकर सिंह

(मधुकर जी ने अपने आखिरी दिनों में अपनी डायरी में राजनीति, खेल, फिल्म आदि पर कुछ टिप्पणियां और साहित्य-संस्कृति से जुड़ी यादों के साथ-साथ कुछ...
कहानी

एक राजा था जो सीताफल से डरता था: प्रवीण कुमार

समकालीन जनमत
योगेंद्र आहूजा हिंदी कहानी के लिये पिछले तीन दशक रोमांचक रहे हैं । इस दौरान कहानी की दुनिया में ऐसी खलबली, उत्तेजना और बेचैनी देखी...
कविताजनमत

विनोद विट्ठल की कविताएँ: स्मृति के कोलाज में समय का चेहरा

उमा राग
लीना मल्होत्रा प्रथम दृष्टया विनोद विट्ठल की कविताएँ सूचनाओं से भरपूर दिखती हैं, किन्तु गहरे उतरने पर उन सूचनाओं से लिपटी स्मृतियाँ, स्मृतियों में छिपे...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

अवध किसान आंदोलन की स्मृतियों को ताज़ा करती हुई राजीव कुमार पाल की पुस्तक “एका” का विमोचन

समकालीन जनमत
लखनऊ। एक सदी पूर्व जनमानस को झकझोर देने वाले अवध किसान आंदोलन की स्मृतियाँ अब जनमानस में धुंधली सी पड़ती जा रही हैं। इन्ही स्मृतियों...
कविताजनमत

‘जीवन की सरलता का प्रतिनिधित्व करती हैं रविंदर की कविताएँ’

समकालीन जनमत
आलोक रंजन रविंदर कौर सचदेवा की कविताएँ सरलता को स्थापित करने के संघर्ष की कविताएँ हैं जो पहचान , प्रेम और दुनियादारी के अलग अलग...
कविताजनमत

जीने की जगह तलाशतीं सविता भार्गव की कविताएँ

समकालीन जनमत
अनुपम सिंह आजकल जब भी समय मिलता है ,कविताएँ लिखने से अधिक कविताओं के विषय में सोचती हूँ. कोई कविता क्यों अच्छी लगती हैं और...
कविता

केदार सम्मान से सम्मानित हुए कवि शंभु बादल

उमाशंकर सिंह परमार लखनऊ/बांदा। मशहूर जनकवि केदारनाथ अग्रवाल के निर्वाण दिवस के अवसर पर 22 जून को ‘जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान’, विमोचन और कविता पाठ...
जनमतस्मृति

खैनी खिलाओ न यार! उर्फ़ मौत से चुहल (सखा, सहचर, सहकर्मी, कॉमरेड महेश्वर की एक याद)

रामजी राय
अपने प्रियतर लोगों- कृष्णप्रताप (के.पी.), गोरख, कामरेड विनोद मिश्र, महेश्वर पर चाहते हुए भी आज तक कुछ नहीं लिख सका। पता नहीं क्यों? इसकी वज़ह...
जनमतपुस्तक

लोकतंत्र और मार्क्स-एंगेल्स

गोपाल प्रधान
 2000 में स्टेट यूनिवर्सिटी आफ़ न्यू यार्क प्रेस से अगस्त एच निम्ज़, जूनियर की किताब ‘ मार्क्स ऐंड एंगेल्स: देयर कंट्रीब्यूशन टु द डेमोक्रेटिक ब्रेकथ्रू...
कवितास्मृति

क्रांति के कवि, कहानीकार एवं एक्टिविस्ट नवारुण

समकालीन जनमत
मीता दास  नवारुण दा क्रांति के कवि, कहानीकार एवं एक्टिविस्ट थे, विशेषकर नवारुण दा उस घराने के कवि हैं जो लोग मनुष्य के बीच या उनके...
कविता

बच्चों की मृत्यु पर प्रतिरोध की कविताएँ

समकालीन जनमत
1. मरते हुए बच्चों के देश में जन्म दिन – देवेंद्र आर्य मेरे अनाम अपरिचित बच्चों कितना त्रासद है यह जन्मदिन इधर मर रहा है बचपन...
साहित्य-संस्कृति

‘ कबीर और नागार्जुन ने सामाजिक- राजनीतिक अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा किया ’

दरभंगा. आज जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन के जयंती समारोह का आयोजन लोहिया चरण सिंह महाविद्यालय, दरभंगा के डॉ...
कविताजनमत

संघर्ष और जीवट का कवि प्रभात

समकालीन जनमत
चरण सिंह पथिक हिंदी कविता की युवा पीढ़ी में कुछ ऐसे नाम हैं जो अपनी अलग कहन के लिए जाने जाते हैं। उनमें से प्रभात...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

वर्ण और जाति को समझने की मार्क्सवादी कोशिश

समकालीन जनमत
नवीन बाबू ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की एम फिल की उपाधि के लिए जो शोध प्रबंध जमा किया उसके लिए उन्होंने जाति का...
कविता

शोभा सिंह की कविताएं गहन जीवन अनुभूति से युक्त, सघन बिम्बधर्मी और बहुरंगी हैं

लखनऊ. कवि, संस्कृतिकर्मी व सोशल एक्टिविस्ट शोभा सिंह की कर्म भूमि लखनऊ है लेकिन अब ज्यादातर उनका समय दिल्ली में गुजर रहा है। लेकिन एक...
कविता

कुमार अरुण की कविताओं की भाषा के तिलिस्म में छुपा यथार्थ 

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल माँ को समन्दर देखने की बड़ी इच्छा कि आखिर कितना बड़ा होता होगा अरे बड़ा कितना जितना हमारे पैसों और जरूरतों के बीच...
Fearlessly expressing peoples opinion