समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

बच्चों की मृत्यु पर प्रतिरोध की कविताएँ

समकालीन जनमत
1. मरते हुए बच्चों के देश में जन्म दिन – देवेंद्र आर्य मेरे अनाम अपरिचित बच्चों कितना त्रासद है यह जन्मदिन इधर मर रहा है बचपन...
साहित्य-संस्कृति

‘ कबीर और नागार्जुन ने सामाजिक- राजनीतिक अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा किया ’

दरभंगा. आज जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन के जयंती समारोह का आयोजन लोहिया चरण सिंह महाविद्यालय, दरभंगा के डॉ...
कविताजनमत

संघर्ष और जीवट का कवि प्रभात

समकालीन जनमत
चरण सिंह पथिक हिंदी कविता की युवा पीढ़ी में कुछ ऐसे नाम हैं जो अपनी अलग कहन के लिए जाने जाते हैं। उनमें से प्रभात...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

वर्ण और जाति को समझने की मार्क्सवादी कोशिश

समकालीन जनमत
नवीन बाबू ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की एम फिल की उपाधि के लिए जो शोध प्रबंध जमा किया उसके लिए उन्होंने जाति का...
कविता

शोभा सिंह की कविताएं गहन जीवन अनुभूति से युक्त, सघन बिम्बधर्मी और बहुरंगी हैं

लखनऊ. कवि, संस्कृतिकर्मी व सोशल एक्टिविस्ट शोभा सिंह की कर्म भूमि लखनऊ है लेकिन अब ज्यादातर उनका समय दिल्ली में गुजर रहा है। लेकिन एक...
कविता

कुमार अरुण की कविताओं की भाषा के तिलिस्म में छुपा यथार्थ 

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल माँ को समन्दर देखने की बड़ी इच्छा कि आखिर कितना बड़ा होता होगा अरे बड़ा कितना जितना हमारे पैसों और जरूरतों के बीच...
कविताजनभाषा

‘ई बिकट अंधेरे जुग मा ना, मनई मनई का देखि सके’

समकालीन जनमत
शैलेन्द्र कुमार शुक्ल आधुनिक अवधी कविता के सबसे लोकप्रिय और मशहूर कवि चंद्रभूषण त्रिवेदी ‘रमई काका’ (1914-1982) हैं। उनकी कविताओं की लोकप्रियता को लेकर आलोचकों...
चित्रकला

कलाकृतियों के अवलोकन और कविता पाठ के साथ हुआ कला कार्यशाला और प्रदर्शनी का समापन

आरा ( बिहार ). स्थानीय इंद्र लोक भवन में , कला कम्‍यून, जसम भोजपुर द्‍वारा आयोजित तीन दिवसीय समकालीन कला कार्यशाला सह प्रदर्शनी के अंतिम...
चित्रकला

कार्यशाला में सृजित कला कृतियां प्रदर्शित की गईं, समकालीन कला के स्वरूप पर चर्चा हुई

समकालीन जनमत
आरा (बिहार). स्थानीय इंद्रलोक भवन आरा में , कला कम्‍यून भोजपुर द्‍वारा आयोजित , समकालीन कला कार्यशाला में सृजित कला कृतियां दो जून को प्रदर्शित...
चित्रकला

आरा में कला कम्यून ने कला कार्यशाला और कला प्रदर्शनी का आयोजन किया

समकालीन जनमत
आरा (बिहार). स्थानीय इन्‍द्रलोक भवन में ,कला कम्‍यून ,जसम ,भोजपूर आरा द्‍वारा आयोजित कला कार्यशाला सह कला प्रदर्शनी एक जून से प्रारंभ हुई.  उद्घाटन गाजीपुर...
कविता

गणेश की कविताओं की इमेजरी महज़ काव्य उपादान नहीं उनके कवि-व्यक्तित्व की अंतर्धाराएँ हैं

समकालीन जनमत
  निरंजन श्रोत्रिय अनूठे बिम्बों से युक्त काव्य-भाषा किसी कवि के अनुभूत जगत, संज्ञान, प्रश्नाकुलता, प्रतिभा, अभिप्राय, सरोकार और संवेदनों का प्रकट रूप होती है।...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

सामाजिक चेतना का जनवादीकरण ज़रूरी- ईश मिश्र

समकालीन जनमत
भगवान स्वरूप कटियार की किताब ‘जनता का अर्थशास्त्र’ का लोकार्पण लखनऊ। कवि व लेखक भगवान स्वरूप कटियार की किताब ‘जनता का अर्थशास्त्र’ का लोकार्पण यहां...
व्यंग्यसाहित्य-संस्कृति

हस्तिनापुर के कृष्ण

राजन विरूप
जब कृष्ण से पूछा गया तुम किसके साथ हो? तब कृष्ण ने कहा कि मैं हस्तिनापुर के साथ हूँ. कृष्ण का साथ मिला फिर क्या...
नाटकसाहित्य-संस्कृति

राजेश कुमार का नाटक अदृश्य भारत को दृश्यमान करता है

समकालीन जनमत
इप्टा के स्थपना दिवस पर राजेश कुमार के नाटक ‘मूक नायक’ का पाठ लखनऊ. राजेश कुमार अपने सामाजिक व राजनीतिक नाटकों के लिए ख्यात है।...
ख़बरस्मृति

चित्रकार- कथाकार हरिपाल त्यागी की याद में स्मृति सभा

समकालीन जनमत
गाँधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली  में आयोजित स्मृति सभा (फ़ोटो : राजीव त्यागी ) प्रख्यात चित्रकार और साहित्यकार हरिपाल त्यागी का 1 मई 2019 को...
कविता

अनुराधा सिंह की कविताओं में ‘प्रेम एक विस्तृत संकल्पना’

समकालीन जनमत
अनुपम सिंह अपने समकालीनों पर लिखते समय, उन पर कोई निर्णयात्मक वाक्य लिखना खतरा उठाने जैसा होता है. या कहें भविष्य में उसके ख़ारिज और...
कविता

बृजराज सिंह की कविता आधे के इनकार की कविता है

यूँ तो कविता का काम बहुधा व्यंजना से चलता है पर कविता को अभिधा से भी बहुत परहेज नहीं रहा है. आधुनिक कविता के लिए...
साहित्य-संस्कृति

आजमगढ़ में समकालीन कथा साहित्य पर विमर्श, छह कहानियों का पाठ

आजमगढ़. गाथांतर, पुरवाई पत्रिका तथा जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन आज़मगढ़ में विज़डम इंटरनेशनल स्कूल ( गोरखपुर रोड ,...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

‘डॉ.अम्बेडकर : चिंतन के बुनियादी सरोकार’ ‘यह सामाजिक गैरबराबरी पैदा करने वाली मशीनरी की पहचान कराने वाली किताब है’

राम नरेश राम
रमणिका फाउंडेशन की मासिक गोष्ठी 11/05/2019 / दिल्ली. यह सामाजिक गैरबराबरी पैदा करने वाली मशीनरी की पहचान कारने वाली किताब है- गोपाल प्रधान रमणिका फाउंडेशन...
मीडियासाहित्य-संस्कृति

संपादक महोदय, वे विकास नहीं, विनाश पुरुष हैं. आप मोदीभक्ति करते रहिए

कुमार परवेज़
मीडिया की मोदीभक्ति अब दलाली के घृणित स्तर पर गिर गई है. भोजपुर में उन्हें लड़ाई ‘ विकास बनाम जातिवाद ‘ की दिखती है. मतलब,...
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