समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविताजनमत

समय के छद्म को उसकी बहुस्‍तरियता में उद्घाटित करतीं कल्पना मनोरमा

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल लालसा सन्यास के पद गुनगुनाये चाटुकारी जब रचे उपसर्ग प्रत्यय तुष्ट होकर अहम सजधज मुस्कुराये। वर्तमान समय की राजनीतिक उलटबांसी और उससे पैदा...
कविताजनमत

स्‍त्री और प्रकृति की नूतन अस्तित्‍वमानता को स्‍वर देतीं ऋतु मेहरा की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल    ऋतु मेहरा की कविताएँ आपाधापी भरे जीवन और प्रकृति के विस्‍तृत वितान के मध्‍य एक तालमेल बिठाने का प्रयास करती कविताएं हैं।...
ख़बरनाटकसाहित्य-संस्कृति

आरा में शूद्रक कृत नाटक “ मृच्छकटिक ” की शानदार प्रस्तुति

समकालीन जनमत
जितेन्द्र कुमार आरा. आरा की नाट्य इकाई “भूमिका ” द्वारा शूद्रक कृत नाटक “मृच्छकटिकम् “का हिंदी रुपांतरण का मंचन आरा नागरी प्रचारिणी सभागार में जारी...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

कवि व लेखक सुधीर सक्सेना को केदारनाथ अग्रवाल सम्मान

समकालीन जनमत
लम्बी कविताओं के कवि हैं सुधीर सक्सेना – स्वप्निल श्रीवास्तव कविताओं में मनुष्य और मनुष्यता की पहचान – कौशल किशोर बाँदा . ‘ मुक्तिचक्र ‘...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

डॉ प्रभा दीक्षित की तीन किताबों का कानपुर में लोकार्पण

समकालीन जनमत
डाॅ प्रभा की ग़ज़लें एहसास और यकीन की – कौशल किशोर आम आदमी के संघर्ष को वाणी – कमल किशोर श्रमिक कानपुर। साहित्यकार डॉ प्रभा...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

जन संस्कृति मंच ने प्रसिद्ध कथाकार स्वयंप्रकाश को दी श्रद्धाजंलि

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच दुर्ग-भिलाई इकाई द्वारा दिनांक 8 दिसंबर 2019 को नेहरू सांस्कृतिक भवन, सेक्टर-1, भिलाई में प्रसिद्ध कथाकार के आकस्मिक निधन पर भावभीनी श्रद्धाजंलि...
ख़बरचित्रकलाजनमत

आंतरिक सौंदर्य की अभिव्यक्ति का तीन दिवसीय मेला

सुशील मानव
पेंटिंग, स्कल्पचर, फोटोग्राफ, प्रिंट्स जैसे विजुअल आर्ट के तमाम माध्यमों के जरिए समाजिक जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से अभिव्यक्ति एक्सप्रेशन का साझा वार्षिक प्रदर्शनी कार्यक्रम...
कविताजनमत

भगवान स्वरूप कटियार की कविताएँ : जीवन को बचाने के लिए ज़रूरी है प्रेम

समकालीन जनमत
कौशल किशोर ‘आज हम सब/हो गए हैं/अपनी-अपनी सरहदों में जी रहे हैं छोटे-छोटे उपनिवेश और एक-दूसरे के लिए/पैदा कर रहे हैं भय, आतंक, दहशत/और गुलामी...
साहित्य-संस्कृति

कथा लेखन पार्टी लाइन से नहीं तय होता – संजीव कुमार

लखनऊ में रेवान्त मुक्तिबोध सहित्य सम्मान  लखनऊ. लखनऊ के कैफी आजमी एकेडमी के सभागार में 9 दिसम्बर को  आयोजित सम्मान समारोह में वर्ष 2019 का...
जनमतशख्सियतस्मृति

आम आदमी की हमसफ़र कहानियों के कहानीकार स्वयं प्रकाश

समकालीन जनमत
रत्नेश विष्वक्सेन आम आदमी की हमसफर कहानियों के कहानीकार स्वयं प्रकाश जी का इस तरह चले जाना उदास करता है।उनकी रिक्तता को उनकी कहानियां भरेंगी...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

जन मुद्दों पर फिल्म निर्माण और प्रदर्शन का तंत्र बनाने का संदेश दे गया 11वां पटना फिल्मोत्सव

सुधीर सुमन
अंतिम दिन बच्चों की फिल्में दिखाई गईं और नाटक ‘नया सत्य’ का मंचन हुआ पटना. हिरावल-जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय प्रतिरोध का सिनेमा: पटना...
ख़बरसाहित्य-संस्कृति

फिल्मोत्सव के दूसरे दिन भारतीय कला-संगीत की सुदीर्घ परंपराओं और उसके साझे स्वरूप का जादू दिखा

सुधीर सुमन
‘रसन पिया’: हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विलक्षण व्यक्तित्व से रूबरू हुए दर्शक पटना. ख्याल गायिकी के लिए मशहूर, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विलक्षण संगीतकार और...
जनमतशख्सियतस्मृति

एक हमदर्द दोस्त की तरह मिलीं स्वयंप्रकाश की कहानियाँ

सुधीर सुमन
स्वयं प्रकाश से मिलने का इत्तिफाक नहीं हुआ, पर उनकी कहानियां इत्तिफाकन जिंदगी के बेहद बेचैन वक्तों में मेरे करीब आईं और मुझे किसी हमदर्द...
जनमतशख्सियतस्मृति

क्या तुमने कभी स्वयं प्रकाश को देखा है ?

समकालीन जनमत
प्रवीण कुमार क्या तुमने कभी स्वयं प्रकाश को देखा है ? हाँ ! मेरा यही जवाब है . देखा है और तीन बार मुलाकात भी...
कविताशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

बरेली में वीरेन डंगवाल के स्मारक का लोकार्पण

समकालीन जनमत
साहित्य अकादेमी सम्मान से पुरस्कृत विख्यात हिन्दी कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में बरेली में एक स्मारक का लोकार्पण आज किया गया. हिन्दी के जाने-माने...
जनमतशख्सियतस्मृति

स्वयं प्रकाश की कहानियाँ: कुछ नोट्स

समकालीन जनमत
रेखा सेठी स्वयं प्रकाश जी का जाना हिंदी कहानी में एक युग के अंत का सूचक है। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए एक पुराना लेख साझा...
कविताजनमत

सुघोष मिश्र की कविता वर्तमान की जटिलताओं से उपजे द्वंद्व की अभिव्यक्ति है

समकालीन जनमत
आलोक रंजन सुघोष मिश्र की कविताओं को पढ़कर लगा कि उनकी कविताओं से परिचय कराना सरल कार्य नहीं है । इसके पीछे का एक सीधा...
जनमतशख्सियतस्मृति

हमारे समय का सबसे ज़िंदादिल कथाकार चला गया

समकालीन जनमत
मिहिर पंड्या ‘अशोक और रेणु की असली कहानी’, ‘क्या तुमने कभी सरदार भिखारी देखा है’ जैसी अनेक अविस्मरणीय कहानियाँ लिखने वाले महत्वपूर्ण कथाकार स्वयंप्रकाश जी...
साहित्य-संस्कृतिसिनेमा

अन्याय का सामना करने का औजार है सिनेमा : मैक्सिन विलियम्सन

सुधीर सुमन
अडानी और आस्ट्रेलिया सरकार के खिलाफ जंग जारी रहेगी : फिल्मोत्सव में आस्टे्रलियन फिल्मकार ने कहा 11वें त्रिदिवसीय पटना फिल्मोत्सव का आगाज पटना. ‘‘कलाकार की...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

अभी चलता हूँ ज़रा ख़ुद को सँभालूँ तो चलूँ: असरार-उल-हक़ ‘मजाज़’ को याद करते हुए

विष्णु प्रभाकर
(19 अक्टूबर 1911 – 5 दिसम्बर 1955) साल 1911। इसी साल दो बच्चे पैदा हुए, आगे चलकर जिन्होंने अपनी शायरी से उर्दू अदब में खूब...
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