समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

स्मृति

बरनवाल साहब : मेरे प्रेरक, मेरे गुरु

शिवमूर्ति.
वीरेन्द्र कुमार बरनवाल साहब 1969 में गनपत सहाय डिग्री कालेज सुल्तानपुर में अंग्रेज़ी के प्रवक्ता बन कर आये. इलाहाबाद में रह कर पढ पाना मेरे...
जनमतपुस्तक

सत्य का अनवरत अन्वेषण हैं राकेश रेणु के ‘इसी से बचा जीवन’ की कविताएँ

सुशील मानव
  कविता क्या है और इसका काम क्या है- इस पर अनेक बातें हैं, अनेक परिभाषाएं हैं। लेकिन मौजूदा समय सत्य पर संकट का समय...
कविता

कठिन भरपाइयों की कोशिश हैं अमर की कविताएँ

समकालीन जनमत
विनोद विट्ठल मनुष्य ने सामुदायिकता और साझा करने के विरल मूल्यों से जो कुछ हासिल किया था उस सबको कोरोना-काल में बुरी तरह से खो...
पुस्तक

गाथा इक सूरमे दी : जन नायक कामरेड बलदेव सिंह मान पर एक खोज खोज पूर्ण पुस्तक

समकालीन जनमत
सुखदर्शन नत्त  पंजाब के नक्सलवादी आन्दोलन से उभर कर सामने आये जन नायक और राजनैतिक नेताओं की पहली पंक्ति में आने वाले कामरेड बलदेव सिंह...
साहित्य-संस्कृति

‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ की शुरुआत नूर ज़हीर के संस्मरणों और कहानी पाठ से

समकालीन जनमत
प्रगतिशील महिलाओं की संस्था कोरस ने 7 जून को शाम 6 बजे से अपने साप्ताहिक फेसबुक लाइव कार्यक्रम ‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ की शुरुआत की।...
कहानी

वीभत्स- पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’

समकालीन जनमत
वीभत्स पांडेय बेचन शर्मा  ‘उग्र’ शौच-फरागत से निपटकर सुमेरा जाट घर की ओर लौटा आ रहा था। अब सबेरा और खुल गया था। पास-पड़ोस के...
साहित्य-संस्कृति

कहानी पाठ और परिचर्चा

समकालीन जनमत
कहानी पाठ और परिचर्चा कहानी- वीभत्स लेखक- पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र कार्यक्रम रिपोर्ट- मोहम्मद उमर रविवार, यानी 7 जून 2020 को महादेवी वर्मा पुस्तकालय, प्रयागराज...
व्यंग्य

जुमला मजबूत तो देश मजबूत !

देश में व्यापार,कारोबार,रोजगार सब लॉकडाउन है. यदि कुछ चल रहा है तो वो है  लॉकडाउन से उपजा गरीबों-मजदूरों का हाहाकार ! इसी बीच बिहार में...
स्मृति

शांति स्वरूप बौद्ध का निधन वंचित समाज और बौद्धिक सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है

समकालीन जनमत
2 अक्टूबर 1949 को दिल्ली में जन्मे बहुजन साहित्य के मिशनरी प्रकाशक और प्रचारक शांति स्वरूप बौद्ध का शनिवार को कोरोना संक्रमण के कारण निधन...
कविताजनमत

रोहित ठाकुर प्रकृति की पुकार के कवि हैं

समकालीन जनमत
जसवीर त्यागी “नए ब्रांड का प्रेम उतारा था बाज़ार में /जिसने पहले/ लॉन्च किये हैं उसी कंपनी ने/ हत्या के नए उपकरण/ दाल-भात लिट्टी चोखे...
स्मृति

संघर्ष और स्वप्न का कवि रामेश्वर प्रशान्त

समकालीन जनमत
साहित्य की दुनिया में ऐसे भी रचनाकार हैं जिनकी साहित्य साधना जन संघर्ष का हिस्सा होती हैं। वे आत्मप्रचार से दूर रहते हैं। रामेश्वर प्रशान्त...
कहानी

पढ़िए शर्ली जैक्सन की मशहूर कहानी ‘ लाटरी ’

समकालीन जनमत
अमरीकी लेखिका शर्ली जैक्सन डरावनी और रहस्मय रचनाओं के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं। उन्होंने लगभग दो दशक के रचनाकाल में छह उपन्यास,...
पुस्तक

मोनिका कुमार की ‘आश्‍चर्यवत्’ कविता की नई सरणी है

कुमार मुकुल
आलोक धन्वा ने एक बातचीत में मोनिका कुमार की कविताओं की चर्चा की थी, तब तक उनकी कविताएं पढ़ी नहीं थीं मैंने। हां, फेसबुक पर...
स्मृति

असाधारण का वैभव और साधारण का सौंदर्य : बासु चटर्जी

आशीष कुमार
अनायास नहीं, कुछ संबंध सायास भी जुड़ते हैं । मुकम्मल याद नहीं मुझे, लेकिन पहली बार टेलीविजन पर ‘रजनीगंधा’ देखा था। उस समय तक मैं...
सिनेमा

लाभ-लोभ की प्रवृत्ति पर जीवन की सहज वृत्ति को स्थापित करती है मणि कौल की ‘दुविधा’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक मणि कौल की दुविधा । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद द्वारा...
पुस्तक

उन्नीसवीं सदी के विदेशी अखबारों में कबीर

कबीर के बारे में ब्रिटेन के अखबारों में जितना छपा है उतना शायद तब, किसी अन्य समाज सुधारक के बारे में नहीं छपा. कबीर के...
पुस्तक

औपनिवेशिक भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन

गोपाल प्रधान
2020 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से अली रज़ा की किताब ‘रेवोल्यूशनरी पास्ट्स: कम्युनिस्ट इंटरनेशनलिज्म इन कोलोनियल इंडिया’ का प्रकाशन हुआ । लेखक को एक मुखबिर...
पुस्तक

टिकटशुदा रुक्का: अंत ही शुरुआत है

समकालीन जनमत
ममता सिंह नवीन जोशी द्वारा लिखित टिकटशुदा रुक्का उपन्यास पर बात करने के लिए जाने क्यों पहले अंत की बात करने का मन होता है,...
कहानी

एक कहानी-‘आली’

दुर्गा सिंह
आली धान की फसल लदरी हुई फैली थी। पीली धरती, पीली धूप। शाम के वक्त इस क्षेत्र का दृश्य देखने लायक होता है। ताल का...
कविता

‘जॉर्ज फ्लॉयड हम भी साँस नहीं लेे पा रहे हैं’

समकालीन जनमत
25 मई 2020 को अमेरिका मिनेपॉलिस शहर में अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के 46 वर्षीय जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद के बाद पूरा अमेरिका सुलग उठा...
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