समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

चित्रकला

रेखा चित्रों के जरिये प्रवासी मजदूरों की पीडा़ को अभिव्यक्त करता चित्रकार राकेश कुमार दिवाकर

समकालीन जनमत
कोरोना लाकडाउन ने लाखों लोगों को एक झटके में बेरोजगार, बेबस और लाचार कर दिया है. इसका सबसे गंभीर असर गरीबों , मजदूरों व निम्न...
कविता

पंकज की कविताएँ जाति-संरचना के कठोर सच की तीखी बानगी हैं

समकालीन जनमत
सुशील मानव पंकज चौधरी की कविताएँ दरअसल विशुद्ध जाति विमर्श (कास्ट डिस्कोर्स) की कविताएँ हैं। जो अपने समय की राजनीति, संस्कृति ,समाज, अर्थशास्त्र न्याय व्यवस्था...
स्मृति

नंदकिशोर नवल : हिन्दी आलोचना की एक असमाप्त यात्रा 

आशुतोष कुमार
नवल जी हिन्दी की साहित्यिक सम्वेदना और सुरुचि को उत्पीडित साधारण-जन के संघर्ष की जरूरतों के मुताबिक़ ढालने वाले आलोचकों में अग्रणी रहे हैं.  संघर्ष...
सिनेमा

सामंती मूल्यबोध से आधुनकि मूल्यों की टकराहट को दर्ज करती ‘माया दर्पण’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर निर्देशक कुमार शाहनी की माया दर्पण । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश आनंद...
कहानीसाहित्य-संस्कृति

लाल्टू की चार कहानियों का पाठ

समकालीन जनमत
(समकालीन जनमत  द्वारा चलाई जा रही फ़ेसबुक लाइव श्रंखला के तहत 12 मई 2020 की शाम हिंदी रचनाकार लाल्टू ने अपनी चार कहानियों  ‘काश कि...
नाटक

रंगनायक द लेफ्ट थिएटर का नया प्रयोग, फेसबुक लाइव पर नाटक का मंचन

समकालीन जनमत के फेसबुक पेज पर 12 मई से 23 मई तक चलने वाले लाइव साहित्यिक कार्यक्रम में 12 मई को दोपहर 2 बजे रंगनायक...
स्मृति

असगर अली इंजीनियर : सच्चा धर्मनिरपेक्ष, नायाब विद्वान और निर्भीक एक्टिविस्ट

फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ एकजुटता ही आज डा़ असग़र अली इंजीनियर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी....
स्मृति

मैंने कैफ़ी आज़मी को देखा है, सुना है और जाना है

“बस इक झिझक है यही हाल ए दिल सुनाने में, कि तेरा जिक्र भी आएगा इस फसाने में।” जिस समय कैफ़ी साहब का इंतकाल (10...
कविता

कोरोना समय में कविता :  ‘लहू से सनी रोटियां दुनिया देख रही है ’

समकालीन जनमत
लखनऊ. यह समय अभिधा का है। जो व्यंजना में कविता की बात करते हैं, कहीं न कहीं उनके अवचेतन में डर है। सत्ता का आतंक...
कविता

उर्दू-हिंदी की साझा संस्कृति के शायर संजय कुमार कुंदन

समकालीन जनमत
ख़ुर्शीद अक़बर संजय कुमार कुन्दन उर्दू-हिन्दी के ऐसे एकमात्र कवि-शायर हैं , जो साझा- संस्कृति के सशक्त प्रतिनिधि ( नुमाइनदा) की हैसियत रखते हैं और...
सिनेमा

हिंदी सिनेमा में 1857 का विद्रोह

मुकेश आनंद
भारतीय इतिहास की इस महत्त्वपूर्ण घटना को सही इतिहास-दृष्टि और अपेक्षित कला कौशल के साथ हिंदी सिनेमा द्वारा व्यक्त किया जाना अभी शेष है....
कविता

‘ फ्री कालिंग है पर बातचीत के हालात नहीं हैं ‘

समकालीन जनमत
आठ मई की शाम समकालीन जनमत द्वारा आयोजित फ़ेसबुक लाइव में जब कवि पंकज चतुर्वेदी अपने कविता पाठ के लिए प्रस्तुत हुए तो काफ़ी देर...
पुस्तक

क्या हमें भी कोई शाहूजी महाराज जैसा शासक मिलेगा

समकालीन जनमत’ फेसबुक लाइव के जरिए आज सुधीर सुमन ने चर्चित कथाकार संजीव के उपन्यास ‘प्रत्यंचा’ के कुछ महत्वपूर्ण अंशों का पाठ किया। विशाखापट्टनम के...
स्मृति

शशिभूषण द्विवेदी का जाना एक बड़ी संभावना का असमय अंत है : जनवादी लेखक संघ

शशिभूषण जी अत्यंत प्रतिभाशाली और संभावनाशाली कहानीकार थे. उनकी ‘ब्रह्मह्त्या’, ‘एक बूढ़े की मौत’, ‘कहीं कुछ नहीं’, ‘खिड़की’, ‘शिल्पहीन’ जैसी कई कहानियां खूब पढ़ी और...
सिनेमास्मृति

रवीन्द्रनाथ और हिंदुस्तानी सिनेमा

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के जन्मदिवस पर प्रदीप दाश रवीन्द्रनाथ टैगोर ने साहित्य की सभी विधाओं में लिखा लेकिन सबसे पहले वह एक कवि ही थे....
चित्रकला

रवीन्द्र नाथ टैगोर की पेंटिंग्स

आज गुरुदेव के जन्मदिन के अवसर उनकी स्मृति को नमन करते हुए प्रस्तुत है उन्हीं की बनाई कुछ दुर्लभ पेंटिंग्स. ये पेंटिंग्स समकालीन जनमत के...
स्मृति

‘ गोरा ’ में खचित जटिल समय

उन्नीसवीं सदी की आखिरी चौथाई की समूची हलचल का साक्ष्य इस उपन्यास से हासिल होता है. समय को रवींद्रनाथ ने केवल तारीख के रूप में...
सिनेमा

बढ़ती साम्प्रदायिक कट्टरता के बीच एक विवेकशील समाज बनाने की अपील है ‘नसीम’

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है मशहूर लेखक और निर्देशक सईद मिर्ज़ा की नसीम । समकालीन जनमत केेे लिए मुकेश...
जनमतसिनेमा

‘ चारुलता ‘ की मार्फ़त सत्यजित राय की सिनेमाई नज़र पर कुछ गुफ़्तगू

आशीष कुमार
सत्यजित राय की ' चारुलता ' को देखना, समझना और लिखना न सिर्फ सिनेमा की बारीकियों से वाक़िफ होना है बल्कि किरदारों के अन्तर्जगत में...
सिनेमा

टॉय लैंड: अमानवीयता के बर’अक्स लिखी गई विडम्बना की मार्मिक कविता

टॉय लैंड– (जर्मन Spielzeug Land) निर्देशक – योखें अलेक्सेंडर फ्रेयदंक समय-14 मिनट कलाकार– जूलिया ज्लेगा, सेड्रिक एइच, तमय बोलुट उज्त’वान आदि दूसरे विश्व युद्ध के...
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