समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

सिनेमा

एनएफ़एआई, सीएफ़एसआई, एनएफ़डीसी को बंद करना भारतीय फिल्म-इतिहास और धरोहर पर तुषारापात होगा

समकालीन जनमत
देश के प्रमुख फ़िल्मकारों द्वारा फिल्म प्रभाग और भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (एनएफ़एआइ) समेत कई फिल्म संस्थाओं का विलय/बंद किये जाने के सरकार के प्रयास...
कहानी

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी: पितृसत्ता, जमींदारी और स्त्री

दुर्गा सिंह
निराला ने समाज में स्त्रियों की स्थिति पर कई कहानियाँ लिखी हैं। सभी स्त्रियाँ विचार और चेतना तथा सामाजिक रुप से एक ही स्तर पर...
पुस्तक

एक भारत ऐसा भी

गोपाल प्रधान
भाषा सिंह की किताब ‘अदृश्य भारत: मैला ढोने के बजबजाते यथार्थ से मुठभेड़’ का प्रकाशन 2012 में पेंगुइन बुक्स से हुआ। किताब को एकाधिक अर्थों...
कविता

ज्योति की कविताएँ चुप्पी का सौंदर्य बयां करती हैं

अनुपम सिंह
ज्योति तिवारी को मैं पिछले लगभग पाँच वर्षों से जानती हूँ। ज्योति भी मुझे जानती हों ज़रूरी नहीं। वैसे तो वह ज़्यादातर निष्क्रिय ही  दिखाई...
कविता

प्रियंका दुबे की कविताएँ भारत की नई स्त्री की प्रेमाभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
देवेश पथ सारिया इक्कीसवीं सदी के इक्कीस वर्षों में भारत के आम जनजीवन में बहुत फ़र्क़ आया है। इसका सबसे अधिक असर भारतीय मध्यमवर्ग पर...
साहित्य-संस्कृति

‘ साहित्य के संयुक्त मोर्चे में मूल्य सर्वोपरि है ’

समकालीन जनमत
इलाहाबाद। अंजुमन रूहे अदब में प्रगतिशील लेखक संघ एवं इप्टा, जनवादी लेखक संघ,जन संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को ‘ स्मरण : अमृत...
कविता

उमेश पंकज की कविताएँ जनता की अदम्य शक्ति और साहस की बानगी हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   ‘बिजलियों की गड़गड़ाहट/और बारिश की बूंदों में/परिलक्षित होता है मालिक का शोर/और मजदूरों का मार्मिक विलाप/न जाने यह कैसी विडंबना है/उषा काल...
साहित्य-संस्कृति

लेखकों-संस्कृतिकर्मियों को अपने युग के नायकों को पहचानना होगा : प्रो. प्रधान

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच, बिहार का पांचवां राज्य सम्मेलन संपन्न ‘‘कोई शब्दों में नये अर्थ भरता है, तो कोई शब्दों के अर्थ को विकृत करता है।...
साहित्य-संस्कृति

जनचेतना की मशाल ‘विप्लवी पुस्तकालय गोदरगावां’ साहित्यिक तीर्थस्थल है

कौशल किशोर
फणीश्वर नाथ रेणु ने कहा था कि भारत के सामाजिक जीवन को जानना है तो लेखकों को गांवों की ओर जाना चाहिए। जन संस्कृति मंच,...
सिनेमा

जाति आधारित राज्य की हिंसा बयान करती है ‘जय भीम’

नितिन राज
“गणतंत्र को बचाने के लिए कभी-कभी तानाशाही की जरूरत पड़ती है।” यह टीजे गानवेल की फिल्म जय भीम में एक पुलिस अधिकारी के शब्द है,...
कविता

अणु शक्ति सिंह की कविताएँ स्त्री जीवन की जटिलताओं का मार्मिक विस्तार हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय स्त्री के एकाकीपन के अनेक संस्तर होते हैं-जटिल और पीड़ादायक। एक अनचाहे शून्य से भरी हुई स्त्री एक सुलगता सवाल है जिसे हल...
पुस्तक

सोपान जोशी की किताब ‘जल थल मल’-आधुनिक जीवन का ज्ञानकोश

गोपाल प्रधान
राजकमल से 2018 के बाद 2020 में छपी सोपान जोशी की किताब ‘जल थल मल’ को देखने के बाद हूक सी पैदा होती है कि...
साहित्य-संस्कृति

राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में ‘ महामारी की त्रासदी और हम ’ का लोकार्पण

समकालीन जनमत
मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में 22 नवंबर को आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रिका ‘ अभिनव कदम ‘ द्वारा करोना महामारी पर प्रकाशित पुस्तक ‘...
साहित्य-संस्कृति

हिंदी कवि अंचित और मराठी कवि संदीप जगदाले को दिया जाएगा पहला ‘ केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान ’

समकालीन जनमत
वाराणसी। प्रेमचंद साहित्य संस्थान द्वारा प्रकाशित साखी पत्रिका ने कवि अंचित (हिन्दी )और संदीप जगदाले (मराठी)  को पहला  ‘केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान’ देने की घोषणा...
साहित्य-संस्कृति

संजीव का कथा-साहित्य स्वाधीन भारत की सत्ता के खिलाफ चार्जशीट है : रविभूषण

हिन्दी के प्रसिद्ध कथाकार संजीव के उम्र के 75वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर ‘संजीव अमृत महोत्सव समिति’ के बैनर से पूरे देश...
कहानीसाहित्य-संस्कृति

श्यामा: औपनिवेशिक भूमि-व्यवस्था, वर्णवाद के बीच अंतरजातीय प्रेम की कहानी

दुर्गा सिंह
निराला की कहानी ‘श्यामा’, हिंदी की एक महत्वपूर्ण कहानी है। यह कहानी  एक ब्राह्मण  लड़के और लोध जाति की लड़की के प्रेम की कहानी है।...
सिनेमा

आदिवासियों के स्वाभिमान की लड़ाई और सौंदर्य विधान की स्थापना का कलात्मक प्रयास है ‘जय भीम’

समकालीन जनमत
महेश कुमार तमिल फिल्म ‘जय भीम’ जस्टिस चंद्रू के 1993 के एक केस पर आधारित है. यह फ़िल्म अपनी वैचारिक पृष्ठभूमि, यथार्थपरक प्रस्तुति और अस्मितावादी...
साहित्य-संस्कृति

सुआ नृत्य : छत्तीसगढ़ी लोक का आलोक

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार कार्तिक का अंधियारी पाख लग गया है। खेतों में कटने को खड़े धान पर घाम की तपिश कम हो रही है। सिलयारी के...
कविता

शेफाली की कविताएँ जीवन की सुंदरता से संवाद हैं

समकालीन जनमत
अरुणाभ सौरभ शेफाली की कविताएँ उस युवा पीढ़ी की आवाज़ हैं जिसके सपने, मूल्य और संवेदना को यह व्यवस्था और तंत्र निरंतर तोड़ रहा है।...
पुस्तक

हिंदुत्व के उत्थान से उपजी निराशा

गोपाल प्रधान
अभय कुमार दुबे की किताब ‘हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति’ का प्रकाशन वाणी प्रकाशन से 2019 में हुआ । शीर्षक ही बिना किसी लाग लपेट...
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