समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

साहित्य का सन्नाटा टूट रहा है

कौशल किशोर
साहित्य समाज से निरपेक्ष नहीं होता है। समाज में होने वाली हलचलों, घटनाओं-परिघटनाओं आदि का उस पर असर होता है। 2021 के साल में जहाँ...
साहित्य-संस्कृति

जसम ने पटना, आरा, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय में कार्यक्रम कर सफ़दर हाशमी को याद किया

समकालीन जनमत
जनसंस्कृति मंच ने क्रांतिकारी रंगकर्मी सफ़दर हाशमी के शहादत दिवस पर पटना , आरा , दरभंगा , समस्तीपुर , बेगूसराय में गोष्ठी, नुक्कड़ नाटक, जनगीत...
कविता

हेमंत देवलेकर की कविताएँ बदल रहे समय पर गहन दृष्टि से उपजे सवाल हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवि हेमंत देवलेकर की कविताओं से गुजरना वह सुखद अहसास है जो मौसम की बारीकियों को समझने, समय को बीतते हुए महसूसने...
कविता

सौम्या सुमन की कविताएँ अनसुने-अनकहे के दरमियान प्रेम के सहज सौन्दर्य की बानगी हैं

समकालीन जनमत
प्रभात मिलिंद मेरे विचार में कविताओं को पानी की शांत सतह पर गिरते हुए एक सूखे पत्ते की तरह होना चाहिए– दृश्य में एकदम स्पंदनहीन...
पुस्तक

शिक्षा और स्वतंत्रता- बेल हुक्स की किताब ‘टीचिंग टु ट्रान्सग्रेस: एजुकेशन ऐज द प्रैक्टिस आफ़ फ़्रीडम’

गोपाल प्रधान
1994 में रटलेज से बेल हुक्स की किताब ‘टीचिंग टु ट्रान्सग्रेस: एजुकेशन ऐज द प्रैक्टिस आफ़ फ़्रीडम’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका ने किताब की...
पुस्तक

कमला सिंघवी की किताब ‘दाम्पत्य के दायरे’ के बहाने कुछ बातें

समकालीन जनमत
निकिता हाल ही में मैंने “कमला सिंघवी” की पुस्तक “दाम्पत्य के दायरे” पढ़ा, जिसे पढ़ते समय एक स्थान पर बैठे हुए ही मानो मैंने एक...
कहानी

हेमंत कुमार की कहानी ‘धरमदास की गाय’

समकालीन जनमत
हेमन्त कुमार कातिक महीने की सांझ ढलने वाली थी। दीपावली बीत चुकी थी, छठ आने वाली थी। बहुत धीमी पुरवैया के चलते मौसम मे थोड़ी...
पुस्तक

ज़ीरो माइल पटना : तीन धाराओं से बनी किताब

समकालीन जनमत
पटना, 21 दिसंबर। जिस तरह पटना तीन नदियों से घिरा है उसी तरह संजय कुंदन की किताब भी कहानी, उपन्यास और कविताओं से मिलाकर बनी...
सिनेमा

एनएफ़एआई, सीएफ़एसआई, एनएफ़डीसी को बंद करना भारतीय फिल्म-इतिहास और धरोहर पर तुषारापात होगा

समकालीन जनमत
देश के प्रमुख फ़िल्मकारों द्वारा फिल्म प्रभाग और भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (एनएफ़एआइ) समेत कई फिल्म संस्थाओं का विलय/बंद किये जाने के सरकार के प्रयास...
कहानी

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी: पितृसत्ता, जमींदारी और स्त्री

दुर्गा सिंह
निराला ने समाज में स्त्रियों की स्थिति पर कई कहानियाँ लिखी हैं। सभी स्त्रियाँ विचार और चेतना तथा सामाजिक रुप से एक ही स्तर पर...
पुस्तक

एक भारत ऐसा भी

गोपाल प्रधान
भाषा सिंह की किताब ‘अदृश्य भारत: मैला ढोने के बजबजाते यथार्थ से मुठभेड़’ का प्रकाशन 2012 में पेंगुइन बुक्स से हुआ। किताब को एकाधिक अर्थों...
कविता

ज्योति की कविताएँ चुप्पी का सौंदर्य बयां करती हैं

अनुपम सिंह
ज्योति तिवारी को मैं पिछले लगभग पाँच वर्षों से जानती हूँ। ज्योति भी मुझे जानती हों ज़रूरी नहीं। वैसे तो वह ज़्यादातर निष्क्रिय ही  दिखाई...
कविता

प्रियंका दुबे की कविताएँ भारत की नई स्त्री की प्रेमाभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
देवेश पथ सारिया इक्कीसवीं सदी के इक्कीस वर्षों में भारत के आम जनजीवन में बहुत फ़र्क़ आया है। इसका सबसे अधिक असर भारतीय मध्यमवर्ग पर...
साहित्य-संस्कृति

‘ साहित्य के संयुक्त मोर्चे में मूल्य सर्वोपरि है ’

समकालीन जनमत
इलाहाबाद। अंजुमन रूहे अदब में प्रगतिशील लेखक संघ एवं इप्टा, जनवादी लेखक संघ,जन संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को ‘ स्मरण : अमृत...
कविता

उमेश पंकज की कविताएँ जनता की अदम्य शक्ति और साहस की बानगी हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   ‘बिजलियों की गड़गड़ाहट/और बारिश की बूंदों में/परिलक्षित होता है मालिक का शोर/और मजदूरों का मार्मिक विलाप/न जाने यह कैसी विडंबना है/उषा काल...
साहित्य-संस्कृति

लेखकों-संस्कृतिकर्मियों को अपने युग के नायकों को पहचानना होगा : प्रो. प्रधान

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच, बिहार का पांचवां राज्य सम्मेलन संपन्न ‘‘कोई शब्दों में नये अर्थ भरता है, तो कोई शब्दों के अर्थ को विकृत करता है।...
साहित्य-संस्कृति

जनचेतना की मशाल ‘विप्लवी पुस्तकालय गोदरगावां’ साहित्यिक तीर्थस्थल है

कौशल किशोर
फणीश्वर नाथ रेणु ने कहा था कि भारत के सामाजिक जीवन को जानना है तो लेखकों को गांवों की ओर जाना चाहिए। जन संस्कृति मंच,...
सिनेमा

जाति आधारित राज्य की हिंसा बयान करती है ‘जय भीम’

नितिन राज
“गणतंत्र को बचाने के लिए कभी-कभी तानाशाही की जरूरत पड़ती है।” यह टीजे गानवेल की फिल्म जय भीम में एक पुलिस अधिकारी के शब्द है,...
कविता

अणु शक्ति सिंह की कविताएँ स्त्री जीवन की जटिलताओं का मार्मिक विस्तार हैं

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय स्त्री के एकाकीपन के अनेक संस्तर होते हैं-जटिल और पीड़ादायक। एक अनचाहे शून्य से भरी हुई स्त्री एक सुलगता सवाल है जिसे हल...
पुस्तक

सोपान जोशी की किताब ‘जल थल मल’-आधुनिक जीवन का ज्ञानकोश

गोपाल प्रधान
राजकमल से 2018 के बाद 2020 में छपी सोपान जोशी की किताब ‘जल थल मल’ को देखने के बाद हूक सी पैदा होती है कि...
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