समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

   प्रगतिशील साहित्य के पक्ष में बहस का एक तेवर : केदारनाथ अग्रवाल का आलोचनात्मक लेखन

गोपाल प्रधान
केदारनाथ अग्रवाल के आलोचनात्मक लेखन पर उनके जीवनकाल में ध्यान नहीं दिया गया । रामविलास शर्मा भी उनके गद्य की तारीफ़ उनकी चिट्ठियों के प्रसंग...
स्मृति

दलितों की प्रगतिशील परंपरा के संवाहक मुकेश मानस

ऐसे समय में जब फासीवादी ताकतें मजबूत हो रही हैं मुकेश मानस जैसे जनपरस्त प्रगतिशील योद्धा का जाना दलितों की प्रगतिशील धारा के लिए एक...
स्मृति

मुकेश मानस का जाना साहित्यिक समाज के लिए बड़ी क्षति -जन संस्कृति मंच

राम नरेश राम
प्रगतिशील दलित साहित्यकार, जनसंघर्षों में हम सबके साथी मुकेश मानस नही रहे। वे सत्यवती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर थे। जब भी...
पुस्तक

एक देश बारह दुनिया: समकालीन भारत में विकास के विरोधाभासों का रेखाचित्र

समकालीन जनमत
नीरज  एक स्वतंत्र देश के तौर पर भारत के लिए 75 वर्षों का अरसा कोई लंबा समय तो नहीं है। लेकिन, यह भी सच है...
कविताजनमत

कमला भसीन के गीत और कविताएँ जेंडर जागरूकता की असरदार अपील हैं

समकालीन जनमत
(समकालीन जनमत का ‘समकालीन हिंदी कविता’ का यह अंक लोकप्रिय नारीवादी -मानवाधिकार कार्यकर्ता और लेखिका कमला भसीन को समर्पित है, 75 वर्ष की उम्र में...
स्मृति

‘ कमला अब तारों के साथ नाच रही होंगी और उन्हीं की झंकार से नए गीत बना रही होंगी ’

कविता कृष्णन
मेरे लिए कमला से सबसे बड़ी चीज सीखने वाली ये थी कि नारीवादी और प्रगतिशील आंदोलनों को कैसे इतने सहज शब्दों में कहें, अभिव्यक्त करें...
स्मृति

महिला आंदोलन की अगुआ के रूप में हमारी स्मृतियों में हमेशा रहेंगी कमला भसीन

उमा राग
कमला भसीन का जाना समूचे नारीवादी आंदोलन और मानवाधिकार आंदोलन के लिए एक कभी न भरे जा पाने वाले वैक्यूम की तरह है। कमला भसीन...
साहित्य-संस्कृति

गोरख पांडेय : साक्षात्कारों के आईने से

समकालीन जनमत
      “ कविता और प्रेम—दो ऐसी चीज़ें हैं, जहाँ मनुष्य होने का मुझे बोध होता है.”   “कविता को दमन के ज़रिए ख़त्म...
पुस्तक

‘उड़ता बनारस’: स्थापत्य में फ़ासीवाद                                       

गोपाल प्रधान
सुरेश प्रताप की किताब ‘ उड़ता बनारस ’ हमसे वर्तमान शासन के कुछ कारनामों को गहरी निगाह से देखने की मांग करती है । पिछले...
कविता

कल्पना झा की कविताएँ जो कुछ भी सुंदर है उसे बचा ले जाने की कोशिश हैं

समकालीन जनमत
आनंद गुप्ता रंगकर्मी एवं अभिनेत्री कल्पना झा की कविताओं में स्त्री मन की गहरी समझ है. इनकी कविताओं से गुजरते हुए हम स्त्रियों के दुख...
पुस्तक

विभाजन की विभीषिका और उत्तराखंड के इतिहास की गुमशुदगी की परत में लिपटा एक बयान

के के पांडेय
यह कथा सानीउडियार क्षेत्र, जिला बागेश्वर (पहले अल्मोड़ा) उत्तराखंड के एक व्यक्ति हाजी अब्दुल शकूर की है। उनका खानदान उन्नीस सौ ईस्वी से कुछ पहले...
स्मृति

‘ रचना, विचार और आन्दोलन के साथी थे सुरेश पंजम ’

समकालीन जनमत
लखनऊ। नागरिक परिषद व पीपुल्स यूनिटी फोरम के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यकार, शिक्षक व सामाजिक चिंतक डा. एस. के. पंजम की याद में 19 सितम्बर...
कविता

अनामिका अनु की कविताएँ स्त्री विमर्श को कई कोणों से देखती हैं

समकालीन जनमत
विशाखा मुलमुले   अनामिका अनु जी मूलतः बिहार की रहवासी हैं व कर्मभूमि से केरल की हैं। मैं जब उनकी कविताएँ पढ़ती हूँ तो कविता...
स्मृति

‘ जब भी समाज में अंधेरा गहराता है, विचार के गर्भ से उठती है आंधी ’

समकालीन जनमत
 काॅ. बृजबिहारी पांडे की स्मृति सभा में जुटे देश के विभिन्न हिस्सों के वामपंथी नेता पटना। भूमिहीन गरीब किसानों के ऐतिहासिक नक्सलबाड़ी उभार के दौर के...
पुस्तक

स्मृतियों के कथ्य में जीवनानुभव की अभिव्यक्ति

समकालीन जनमत
राम विनय शर्मा ‘ग़ाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल’ पत्रकार और लेखक उर्मिलेश के संस्मरणों का संकलन है। ‘प्रमुखतः इसमें साहित्य-संस्कृति और मीडिया से सम्बद्ध लोगों, प्रसंगों...
कविता

सतीश छिम्पा की कविताएँ अपने समय से किये गए बेचैन सवाल हैं

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी सतीश जी राजस्थान के रहने वाले हैं. इनके तीन कविता संग्रह ‘लहू उबलता रहेगा’ (फिलिस्तीन के मुक्ति संघर्ष के लिए), ‘लिखूंगा तुम्हारी कथा’, ‘आधी...
यात्रा वृतान्त

रौशनी झरोखों से भी आती है

के के पांडेय
भट्ट जी, इसी नाम से पुकारते हैं हम उन्हें. वैसे उनका पूरा नाम खीमानंद भट्ट है. अल्मोड़ा में रहते हैं. वे न तो अल्मोड़ा की...
कहानी

स्लोवेनियन कहानीकार लिली पोटपारा की कहानी ‘ चाबी ’

समकालीन जनमत
( ‘ चाबी  ‘लिली पोटपारा द्वारा लिखित स्लोवेनियन भाषा की कहानी है। लिली पोटपरा स्लोवेनियन साहित्य की एक प्रसिद्ध व पुरस्कृत लेखिका व अनुवादिका हैं।...
स्मृति

भविष्य के समाज की ताबीज

गोपाल प्रधान
नहीं जानता कि महान व्यक्ति किस तरह के होते हैं लेकिन कामरेड बृजबिहारी पांडे बिना शक महान थे। उनका अहैतुक स्नेह मुझे समय समय पर...
Fearlessly expressing peoples opinion