साहित्य-संस्कृति शमशेर जयंती: कवि के पास जाने के लिए उड़ान चाहिएके के पांडेयJanuary 19, 2025January 20, 2025 by के के पांडेयJanuary 19, 2025January 20, 20250327 शामली जिले में 12 जनवरी को कवि शमशेर बहादुर सिंह की जयंती (जन्मदिन 13 जनवरी 1911) पर उनके पैतृक गांव एलम में सालाना जलसा आयोजित...
जनमत खोई चीज़ों का शोक: जीवन की स्मृतियों से झकझोर खायी कविताएँसमकालीन जनमतFebruary 6, 2022February 6, 2022 by समकालीन जनमतFebruary 6, 2022February 6, 2022075 अनुपम सिंह समकालीन हिंदी कविता में सविता सिंह प्रकृति के क़रीब रहने वाली कवियों में से हैं। सविता सिंह प्रकृति के प्रत्येक क्रियाकलाप को अनिवार्य...
कविता ज्योति की कविताएँ चुप्पी का सौंदर्य बयां करती हैंअनुपम सिंहDecember 19, 2021December 19, 2021 by अनुपम सिंहDecember 19, 2021December 19, 20210262 ज्योति तिवारी को मैं पिछले लगभग पाँच वर्षों से जानती हूँ। ज्योति भी मुझे जानती हों ज़रूरी नहीं। वैसे तो वह ज़्यादातर निष्क्रिय ही दिखाई...
कविताजनमत जीने की जगह तलाशतीं सविता भार्गव की कविताएँसमकालीन जनमतJune 30, 2019June 30, 2019 by समकालीन जनमतJune 30, 2019June 30, 20195 3932 अनुपम सिंह आजकल जब भी समय मिलता है ,कविताएँ लिखने से अधिक कविताओं के विषय में सोचती हूँ. कोई कविता क्यों अच्छी लगती हैं और...
कविता बच्चों की मृत्यु पर प्रतिरोध की कविताएँसमकालीन जनमतJune 19, 2019June 26, 2019 by समकालीन जनमतJune 19, 2019June 26, 20197 4877 1. मरते हुए बच्चों के देश में जन्म दिन – देवेंद्र आर्य मेरे अनाम अपरिचित बच्चों कितना त्रासद है यह जन्मदिन इधर मर रहा है बचपन...
कविता अनुराधा सिंह की कविताओं में ‘प्रेम एक विस्तृत संकल्पना’समकालीन जनमतMay 26, 2019June 1, 2019 by समकालीन जनमतMay 26, 2019June 1, 20195 4171 अनुपम सिंह अपने समकालीनों पर लिखते समय, उन पर कोई निर्णयात्मक वाक्य लिखना खतरा उठाने जैसा होता है. या कहें भविष्य में उसके ख़ारिज और...
कविताजनमत ‘गगन गिल ‘मातृमूलक’ दुःखों और उदासियों को रचने वाली कवयित्री हैं’समकालीन जनमतMay 5, 2019May 5, 2019 by समकालीन जनमतMay 5, 2019May 5, 201913883 अनुपम सिंह गगन गिल ने कविता में अपने ज़िम्मे जो काम लिया है, वह है स्त्री की पारम्परिक नियति को उद्घाटित करना. प्रकृति में इतने...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपटराम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 2018 by राम नरेश रामJune 26, 2018June 26, 201802086 अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँसमकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 2019 by समकालीन जनमतJune 24, 2018June 19, 20192 3476 (अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...