समकालीन जनमत

Category : ज़ेर-ए-बहस

ज़ेर-ए-बहस

जब कवि के गीत अस्त्र बन जाते हैं

वरवर राव तेलगु भाषा में कविता करते हैं. वे पी.एच.डी हैं. उनके पी.एच.डी. थीसिस का विषय था- तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष और इतिहास. 40 साल तक...
ज़ेर-ए-बहस

क्लीनिकल ट्रायल पूरा हुए बिना वैक्सीन को 15 अगस्त तक बाजार में लाने की घोषणा का मकसद क्या है ?

आईसीएमआर व भारत बायोटेक द्वारा तैयार की जा रही कोरोना वैक्सीन को 15 अगस्त तक बाजार में लाने की घोषणा की जा चुकी है जबकि...
ज़ेर-ए-बहस

अमेरिका में जातीय भेदभाव

अमेरिका में पिछले दिनों भारी उथल-पुथल रही. एक अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस द्वारा हत्या किए जाने का मामला सामने आने के बाद अश्वेतों के...
ज़ेर-ए-बहस

हम पितृसत्ता के खिलाफ हैं, पुरुषों के नहीं: कमला भसीन

समकालीन जनमत
(‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ शृंखला के अंतर्गत रविवार 28 जून को कोरस के फेसबुक पेज से प्रसिद्ध नारीवादी कार्यकर्ता, कवि और समाज विज्ञानी कमला भसीन...
ज़ेर-ए-बहस

कोरोना काल में महिलाओं की दुनिया : घर और बाहर

समकालीन जनमत
डॉ.दीना नाथ मौर्य गायत्री अपने पति और बच्चों के साथ मुम्बई के धारावी इलाके में पिछले 20 सालों से रहती हैं। मूल रूप से उत्तर-प्रदेश...
कहानीज़ेर-ए-बहस

‘नमक का दरोगा’ में नमक का किरदार

Chandan Pandey
‘नमक का दरोगा’ कहानी को कैसे पढ़ा जाये, यह प्रश्न यदा-कदा कौंध जाता है. पिछले दिनों कथाकार उमाशंकर चौधरी ने इस कहानी के अंत पर...
ज़ेर-ए-बहस

हिंदी कविता में हिंदुत्व का प्रिस्क्रिप्शन

राजन विरूप
“दुर्भाग्यवश, हिंदी-साहित्य के अध्ययन और लोक-चक्षु-गोचर करने का भार जिन विद्वानों ने अपने ऊपर लिया है, वे भी हिंदी साहित्य का संबंध हिंदू जाति के...
ज़ेर-ए-बहस

सभी आवाज़ों को मजबूत करना, सभी गीतों को ताकत देना तथा सवाल खड़े करना ही कला का सच्चा काम है: टी.एम. कृष्णा

समकालीन जनमत
टी. एम. कृष्णा (अवधेश जी द्वारा मुझे हिन्दी में बोलने के लिए बोला गया है लेकिन मेरा हिन्दी तो बहुत खराब है मैं हिंगलिश बोलूँगा।...
ज़ेर-ए-बहस

क्या सरकार ने कोविड-19 को गंभीरता से लेना छोड़ दिया है ?

सुशील मानव
लॉकाडाउन का एक तरह से खात्मा हो गया है. दुकान, बाज़ार, संस्थान, प्रतिष्ठान सब खुल गए हैं. मंदिर- मस्जिद भी खुल गए हैं. गंगा समेत...
ज़ेर-ए-बहस

उत्तराखंड में रोजगार पर रोक क्यों ?

उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2020-21 में  नियुक्तियों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. नियुक्तियों पर रोक लगाने के पीछे वही घिसा-पिटा तर्क है...
ज़ेर-ए-बहस

जिंदगी मायने रखती है !

जनार्दन
इस समय पूरी दुनिया कोरोना संकट से गुजर रही है। कोरोना ने पूरी दुनिया को प्रयोगशाला में बदल दिया है। हर शय लिटमस टेस्ट से...
ज़ेर-ए-बहस

मोदी सरकार के 6 साल- देश के लिए बड़ी विपदा साबित हुई है यह सरकार

कोरोना संकट से निपटने में मोदी सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है...
ज़ेर-ए-बहसस्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
ज़ेर-ए-बहस

दिल्ली पुलिस ने बदला ‘आपदा’ को ‘अवसर’ में

समकालीन जनमत
संजीव कुमार हत्यारों के लिए, हत्यारों के साथ, सदैव! दिल्ली पुलिस ने जिस तरह आपदा को अवसर में बदला है, वह अभूतपूर्व है. कल ‘पिंजरा...
ज़ेर-ए-बहस

मजदूरों की यातना का समाधान है-भूमि सुधार !

समकालीन जनमत
डॉ. आर. राम   महामारी और तालाबंदी से बेरोजगार होकर सड़कों पर बदहाल हालत में पैदल अपने घरों को जाते हुये मरते-खपते   मजदूरों की तस्वीरें...
ज़ेर-ए-बहस

क्या शराब की बिक्री से ही सम्भव होती है कर्मचारियों की तनख्वाह ?

एक जमाने में पंकज उदास की गायी यह गज़ल काफी लोकप्रिय हुई थी : हुई मंहगी बहुत शराब थोड़ी-थोड़ी पिया करो लॉकडाउन में शराब की...
ज़ेर-ए-बहस

“ सभी मॉडल व्यर्थ साबित हुए हैं, अलबत्ता उनमें कुछ उपयोगी हैं ”

समकालीन जनमत
‘केरल मॉडल’ अगर कामयाब हुआ तो ज़रूरी नहीं कि सारे मॉडल पास होंगे। आख़िर जॉर्ज बॉक्स ने कहा भी तो है “सभी मॉडल व्यर्थ साबित...
ज़ेर-ए-बहस

भूख, भोजन, चोरी, आत्महत्या और अपराध बोध

सुशील मानव
क्या आपने किसी अडानी, अंबानी, माल्या, मोदी, टाटा, बिड़ला को किसी अपराधबोध या ग्लानिबोध से भरे देखा, सुना है क्या ?...
ज़ेर-ए-बहस

महाजनी सभ्यता और महामारी के सबक

समकालीन जनमत
डॉ. दीना नाथ मौर्य सभ्यता के विकासक्रम में मानव जाति पर समय-समय पर आयी प्राकृतिक आपदाओं के ऐतिहासिक अनुभव से यह सीख ली जा सकती...
ज़ेर-ए-बहस

डराने के बजाय स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने पर ध्यान दे उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले दिनों उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने का जो अनुमान जाहिर किया,वह भयावह है. मुख्यमंत्री तो...
Fearlessly expressing peoples opinion