Author : राजन विरूप

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राजन विरूप दिल्ली विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं. प्रगतिशील छात्र आंदोलन से गहरा जुड़ाव रखते हैं. साहित्य में रूचि और स्वतंत्र लेखन कार्य से जुड़े हैं.
जेरे बहस

हिंदी कविता में हिंदुत्व का प्रिस्क्रिप्शन

राजन विरूप
“दुर्भाग्यवश, हिंदी-साहित्य के अध्ययन और लोक-चक्षु-गोचर करने का भार जिन विद्वानों ने अपने ऊपर लिया है, वे भी हिंदी साहित्य का संबंध हिंदू जाति के...
व्यंग्य साहित्य-संस्कृति

हस्तिनापुर के कृष्ण

राजन विरूप
जब कृष्ण से पूछा गया तुम किसके साथ हो? तब कृष्ण ने कहा कि मैं हस्तिनापुर के साथ हूँ. कृष्ण का साथ मिला फिर क्या...