समकालीन जनमत

Category : जनमत

जनमत

मितान : मित्रता की समृद्ध छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा

पीयूष कुमार मित्रता वह शै है, जिसके आगे सारे रंग बेनूर हैं। मनुष्य को सारे रिश्ते जन्म के साथ मिल जाते हैं पर मित्रता का...
कविताजनमत

स्मृति और प्रेम का कवि कुंदन सिद्धार्थ

समकालीन जनमत
जैसे पूरा गांव ही कमरे में समा गया हो! जब भी कोई शहर से लौटकर गाँव आता तो सारे लोग उसे घेरकर घण्टों शहर की...
ख़बरजनमत

‘ पत्रकारिता अपना सबसे आदर्श लक्ष्य तब हासिल करती है, जब वो सच को साहस से बोलती है ’

समकालीन जनमत
  रवीश कुमार को ‘ रैमॉन मैगसेसे ‘ पुरस्कार मशहूर पत्रकार एनडीटीवी के रवीश कुमार को प्रतिष्ठित ‘ रैमॉन मैग्सेसे ‘ पुरस्कार 2019 देने की...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

अमर नदीम : हिन्दी ग़ज़ल का नया अंदाज़

आशुतोष कुमार
आज कॉमरेड Amar Nadeem का जन्मदिन है.   यों तो वे हमारे शहर अलीगढ़ के रहने वाले थे, लेकिन जान पहचान उनसे फेसबुक पर ही...
जनमत

हतभागे किसान: प्रेमचन्द

समकालीन जनमत
(प्रेमचन्द ने यह लेख 19 दिसम्बर 1932 में लिखा था। उनके इस लेख के साथ समकालीन जनमत प्रेमचंद पर अपनी यह शृंखला समाप्त करता है। इस...
जनमतशख्सियतस्मृति

नायक विहीन समय में प्रेमचंद

समकालीन जनमत
प्रो. सदानन्द शाही कुछ तारीखें कागज के कैलेण्डरों पर दर्ज होती हैं और याद रखी जाती हैं या पर कुछ तारीखें ऐसी भी होती हैं...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद की दलित स्त्रियाँ: वैभव सिंह

समकालीन जनमत
वैभव सिंह प्रेमचंद जितना पुरुष-जीवन का अंकन करने वाले कथाकार हैं, उतना ही स्त्रियों के जीवन के भी विविध पक्षों को कथा में व्यक्त करते...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद के स्त्री पात्र: प्रो.गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
प्रेमचंद का साहित्य प्रासंगिक होने के साथ साथ ज़ेरे बहस भी रहा है । दलित साहित्य के लेखकों ने उनके साहित्य को सहानुभूति का साहित्य...
जनमतशख्सियतस्मृति

किसान आत्म-हत्याओं के दौर में प्रेमचंद – प्रो. सदानन्द शाही

समकालीन जनमत
 प्रो.सदानन्द शाही किसानों की आत्म हत्यायें हमारे समाज की भयावह सचाई है। भारत जैसे देश में किसान आत्महत्यायें कर रहे हैं यह शर्मशार कर देने...
जनमत

‘ बुद्धिजीवी और कलाकार की खाल ओढ़े हत्या-सत्ता-समर्थकों की हम भर्त्सना करते हैं ’

चार लेखक संगठनों का साझा बयान लेखक-कलाकार हमेशा से सत्ता के विरोध में रहे हैं, लेकिन मोदीराज में सत्ता के विरोध का विरोध एक स्थायी...
जनमतशख्सियतस्मृति

सदगति : ‘ग़म क्या सिर के कटने का’*

समकालीन जनमत
प्रो. सदानन्द शाही सदगति दलित पात्र दुखी की कहानी है। दुखी ने बेटी की शादी तय की है। साइत विचरवाने के लिए पं0. घासीराम को बुलाने...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

बच्चों की निगाह में प्रेमचंद

समकालीन जनमत
[2016 में 31 जुलाई को जसम के कार्यक्रम  ‘मशाल-ए-प्रेमचंद’ में बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी से  कुछ तस्वीरें ]...
जनमतशख्सियतस्मृति

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया : गजानन माधव मुक्तिबोध

समकालीन जनमत
एक छाया-चित्र है । प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं । प्रसाद गम्भीर सस्मित । प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य । विभिन्न विचित्र प्रकृति...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद ने ‘अछूत की शिकायत’ को कथा-कहानी में ढाला

डॉ रामायन राम
  1914 में हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका सरस्वती में हीरा डोम की कविता अछूत की शिकायत प्रकाशित हुई थी,जिसमे कवि ने अछूतों के साथ होने...
जनमतशख्सियतस्मृति

नई पीढ़ी को भी उम्दा साहित्य के संस्कार देने वाले प्रेमचंद

अभिषेक मिश्र
कहा जाता है ‘साहित्य समाज का दर्पण है’। साहित्यकारों से भी यही अपेक्षा रखी जाती है। पर धीरे-धीरे आजादी मिलने से पूर्व और इसके बाद...
जनमतज़ेर-ए-बहस

मिया काव्यः चक्रव्यूह में फंसे समुदाय की आवाज़

राम पुनियानी
  गत 10 जुलाई 2019 को दस असमिया कवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इनमें से अधिकांश मुसलमान हैं और उस साहित्यिक धारा के...
जनमतशख्सियतस्मृति

रेलवे स्टेशन पर प्रेमचन्द

समकालीन जनमत
डॉ. रेखा सेठी अभी हाल ही में नयी दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर मुझे प्रेमचन्द की लोकप्रियता का नया अनुभव हुआ। स्टेशन के लगभग हर...
कविताजनमत

प्रतिरोध का रसायन तैयार करती उस्मान ख़ान की कविताएँ

समकालीन जनमत
खुशियाँ अच्छी हैं बहुत, मगर  इसमें भी अतिश्योक्ति है! उस्मान की कविताओं का संसार, एक ऐसा संघन संसार है जहाँ एक हाथ को नहीं सूझता दूसरा...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

साहित्य का उद्देश्य: प्रेमचंद

समकालीन जनमत
[1936 में प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन लखनऊ में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण] यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय घटना है।...
जनमतस्मृति

प्रेमचंद के फटे जूते: हरिशंकर परसाई

समकालीन जनमत
प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने...
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