समकालीन जनमत

Category : जनमत

कविताजनमत

‘सफ़र है कि ख़त्म नहीं होता’ : सोनी पाण्डेय की कविताएँ

समकालीन जनमत
मदन कश्यप हिन्दी में स्त्री कवयित्रियों की सांकेतिक उपस्थिति तो आदिकाल से रही है। लेकिन 1990 की दशक में जो बदलाव आया उसका एक सकारात्माक...
जनमत

नज़रबंद कश्मीर का सच, आँखों देखी

समकालीन जनमत
कश्मीर की जमीनी हकीकत की पड़ताल करके लौटी फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट नई दिल्ली. सैन्य पहरे में क़ैद कश्मीर की जमीनी हकीकत की पड़ताल...
जनमतशख्सियतस्मृति

दलित साहित्य को शिल्प और सौंदर्यबोध देने वाले भाषा के मनोवैज्ञानिक थे मलखान सिंह

सुशील मानव
परसों शाम को फोन पर बात हुई, मैंने पूछा था, सर नया क्या लिख रहे हैं इन दिनों। उन्होंने जवाब में कहा था- “ये मेरे...
जनमत

जम्मू व कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात : सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया)

 भारत सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 व 35ए, जो 1947 में भारत और कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के बीच कश्मीर के भारत के...
जनमतज़ेर-ए-बहस

‘ 370 को लेकर आरएसएस आंबेडकर के नाम पर फैला रही झूठ ‘

समकालीन जनमत
 आर. राम अनुच्छेद 370 को लेकर संसद और संसद के बाहर एक झूठ फैलाया जा रहा है कि डॉ आंबेडकर ने अनुच्छेद 370 को लागू...
जनमतज़ेर-ए-बहस

जम्मू-कश्मीर और ‘नफ़रत का महोत्सव’

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन जम्मू-कश्मीर से जुड़े केंद्र सरकार के ताज़ा फ़ैसलों पर सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया देखिए तो लगेगा कि हिंदुस्तान ने जैसे जम्मू-कश्मीर पर कोई जीत...
जनमतशख्सियतस्मृति

उजले दिनों की उम्मीद का कवि वीरेन डंगवाल

समकालीन जनमत
मंगलेश डबराल ‘इन्हीं सड़कों से चल कर आते हैं आततायी/ इन्हीं सड़कों से चल कर आयेंगे अपने भी जन.’ वीरेन डंगवाल ‘अपने जन’ के, इस...
जनमतशख्सियतस्मृति

कटरी की रुक्मिनी: कविता का अलग रास्ता

डॉ रामायन राम
वीरेन डंगवाल 70 के दशक की चेतना के कवि हैं। कविता के क्षेत्र मे उनका प्रवेश 70 के दशक में हुआ । यह वह समय...
जनमतयात्रा वृतान्त

जित देखूँ तित लाल… (प्राग यात्रा-संस्मरण)

समकालीन जनमत
डॉ. रेखा उप्रेती सामान बाँध लिया है| वियना में बिताया यह दिन किसी नायाब तोहफे सा हमारी झोली में आ गिरा है और अब प्राग...
जनमत

मितान : मित्रता की समृद्ध छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा

पीयूष कुमार मित्रता वह शै है, जिसके आगे सारे रंग बेनूर हैं। मनुष्य को सारे रिश्ते जन्म के साथ मिल जाते हैं पर मित्रता का...
कविताजनमत

स्मृति और प्रेम का कवि कुंदन सिद्धार्थ

समकालीन जनमत
जैसे पूरा गांव ही कमरे में समा गया हो! जब भी कोई शहर से लौटकर गाँव आता तो सारे लोग उसे घेरकर घण्टों शहर की...
ख़बरजनमत

‘ पत्रकारिता अपना सबसे आदर्श लक्ष्य तब हासिल करती है, जब वो सच को साहस से बोलती है ’

समकालीन जनमत
  रवीश कुमार को ‘ रैमॉन मैगसेसे ‘ पुरस्कार मशहूर पत्रकार एनडीटीवी के रवीश कुमार को प्रतिष्ठित ‘ रैमॉन मैग्सेसे ‘ पुरस्कार 2019 देने की...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

अमर नदीम : हिन्दी ग़ज़ल का नया अंदाज़

आशुतोष कुमार
आज कॉमरेड Amar Nadeem का जन्मदिन है.   यों तो वे हमारे शहर अलीगढ़ के रहने वाले थे, लेकिन जान पहचान उनसे फेसबुक पर ही...
जनमत

हतभागे किसान: प्रेमचन्द

समकालीन जनमत
(प्रेमचन्द ने यह लेख 19 दिसम्बर 1932 में लिखा था। उनके इस लेख के साथ समकालीन जनमत प्रेमचंद पर अपनी यह शृंखला समाप्त करता है। इस...
जनमतशख्सियतस्मृति

नायक विहीन समय में प्रेमचंद

समकालीन जनमत
प्रो. सदानन्द शाही कुछ तारीखें कागज के कैलेण्डरों पर दर्ज होती हैं और याद रखी जाती हैं या पर कुछ तारीखें ऐसी भी होती हैं...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद की दलित स्त्रियाँ: वैभव सिंह

समकालीन जनमत
वैभव सिंह प्रेमचंद जितना पुरुष-जीवन का अंकन करने वाले कथाकार हैं, उतना ही स्त्रियों के जीवन के भी विविध पक्षों को कथा में व्यक्त करते...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद के स्त्री पात्र: प्रो.गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
प्रेमचंद का साहित्य प्रासंगिक होने के साथ साथ ज़ेरे बहस भी रहा है । दलित साहित्य के लेखकों ने उनके साहित्य को सहानुभूति का साहित्य...
जनमतशख्सियतस्मृति

किसान आत्म-हत्याओं के दौर में प्रेमचंद – प्रो. सदानन्द शाही

समकालीन जनमत
 प्रो.सदानन्द शाही किसानों की आत्म हत्यायें हमारे समाज की भयावह सचाई है। भारत जैसे देश में किसान आत्महत्यायें कर रहे हैं यह शर्मशार कर देने...
जनमत

‘ बुद्धिजीवी और कलाकार की खाल ओढ़े हत्या-सत्ता-समर्थकों की हम भर्त्सना करते हैं ’

चार लेखक संगठनों का साझा बयान लेखक-कलाकार हमेशा से सत्ता के विरोध में रहे हैं, लेकिन मोदीराज में सत्ता के विरोध का विरोध एक स्थायी...
जनमतशख्सियतस्मृति

सदगति : ‘ग़म क्या सिर के कटने का’*

समकालीन जनमत
प्रो. सदानन्द शाही सदगति दलित पात्र दुखी की कहानी है। दुखी ने बेटी की शादी तय की है। साइत विचरवाने के लिए पं0. घासीराम को बुलाने...
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