समकालीन जनमत

Category : जनमत

जनमतज़ेर-ए-बहसस्मृति

प्रेमचंद साहित्य में दलित विमर्श: प्रो. चमनलाल

समकालीन जनमत
प्रो. चमनलाल प्रेमचंद के दलित विमर्श को लेकर हिन्दी लेखकों में काफी विवाद है। प्रेमचंद के जीवनकाल के दौरान भी उनके साहित्य को लेकर विवाद...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

प्रेमचंद जी:  महादेवी वर्मा

समकालीन जनमत
प्रेमचंदजी से मेरा प्रथम परिचय पत्र के द्वारा हुआ. तब मैं आठवीं कक्षा की विद्यार्थिनी थी. मेरी “दीपक” शीर्षक एक कविता शायद “चाँद” में प्रकाशित...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

‘सांप्रदायिकता और संस्‍कृति’ : प्रेमचंद (प्रेमचंद पर शृंखला की शुरुआत)

समकालीन जनमत
31 जुलाई को कथाकार प्रेमचंद का जन्‍मदिन है। समकालीन जनमत अपने पाठकों के लिए आज से 31 जुलाई तक प्रेमचंद पर एक विशेष शृंखला की शुरुआत...
जनमतपुस्तक

आक्सफ़ोर्ड की मार्क्स सहायिका

गोपाल प्रधान
2019 में आक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से मैट विडाल, टोनी स्मिथ, तोमास रोट्टा और पाल प्रेव के संपादन में ‘द आक्सफ़ोर्ड हैंडबुक आफ़ कार्ल मार्क्स’ का...
जनमत

मनीष और अमिता : ‘ नक्सली दम्पत्ति ’ की कहानी मेरी जुबानी

सीमा आज़ाद
यह सरकार अपनी अल्पसंख्यक, दलित, महिला, आदिवासी, पर्यावरण विरोधी सत्ता को कायम रखने के लिए दो तरह के काम कर रही है। एक ओर तो...
जनमत

बैंक राष्ट्रीयकरण का स्वर्ण जयन्ती वर्ष : बैंकों के निजीकरण का मुखर और सक्रिय विरोध जरूरी

19 जुलाई 2019 को बैंक राष्ट्रीयकरण का स्वर्ण जयंती दिवस था। 1969 के पहले केवल स्टेट बैंक आफ इंडिया राष्ट्रीयकृत बैंक था। 1 जुलाई 1955...
कविताजनमत

अरमान आनंद की कविताएँ भावुक बयान ही नहीं प्रतिबद्धता और बदलाव की छटपटाहट भी हैं

डॉ रामायन राम
कविता के क्षेत्र में आये हर युवतर और नए कवि का मौलिक स्वर रोमांस होता है।रुमानियत उनकी संवेदना का मूल सेंसर होता है।अपने समय की...
जनमत

पाठ्यपुस्तकों में आरएसएसः राष्ट्र और राष्ट्र निर्माण की विरोधाभासी अवधारणाएँ

राम पुनियानी
  राष्ट्रवाद एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केन्द्र में है. पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा कि किस तरह सरकार के आलोचकों को राष्ट्रद्रोही...
जनमतशख्सियत

मानवीय मूल्यों और अधिकारों के कवि राजेश जोशी

समकालीन जनमत
विवेक निराला 18 जुलाई, राजेश जोशी का जन्मदिनहै। राजेश जोशी आज की कविता के उन महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरों में हैं, जिनसे समकालीन कविता की पहचान बनी है।...
जनमतज़ेर-ए-बहस

तबरेज़ अंसारी, जय श्रीराम और नफ़रत-जनित हत्याएँ

राम पुनियानी
संयुक्त राष्ट्रसंघ मानवाधिकार परिषद् की 17वीं बैठक में, भारत में मुसलमानों और दलितों के विरुद्ध नफरत-जनित अपराधों और मॉब लिंचिंग का मुद्दा उठाया गया। यद्यपि प्रधानमंत्री मोदी...
जनमतपुस्तक

‘बैठकर काशी में अपना भूला काशाना’ : मिर्ज़ा ग़ालिब

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल ‘चिराग़-ए-दैर (मंदिर का दीया)’ मिर्ज़ा ग़ालिब की बनारस पर केंद्रित कविताओं का संकलन है जिसका मूल फारसी से सादिक ने अनुवाद किया है। चिराग़-ए-दैर की...
ग्राउन्ड रिपोर्टजनमत

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन की दो दिवसीय हड़ताल

समकालीन जनमत
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन शिक्षक समुदाय के विभिन्न सवालों को लेकर निरंतर संघर्ष के मोर्चे पर डटा हुआ है। आइए जानते हैं DUTA के संघर्ष...
ग्राउन्ड रिपोर्टजनमत

रोटी के सपने आँखों में लिए, ज़िन्दा जलते दिल्ली के मज़दूर !!

अभिषेक कुमार झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र में हुए हादसे की जांच करने गई ऐक्टू दिल्ली की टीम द्वारा जारी रिपोर्ट रोटी के सपने आँखों में लिए,...
जनमत

बिहार में जल संकट और उसके समाधान के रास्ते

ज्ञात आकड़ों के अनुसार बिहार राज्‍य में लगभग 79.46 लाख हेक्‍टेयर भूमि कृषि योग्‍य है जिसमें से केवल 56.03 लाख हेक्‍टेयर भूमि पर ही खेती...
कविताजनमत

विनोद विट्ठल की कविताएँ: स्मृति के कोलाज में समय का चेहरा

उमा राग
लीना मल्होत्रा प्रथम दृष्टया विनोद विट्ठल की कविताएँ सूचनाओं से भरपूर दिखती हैं, किन्तु गहरे उतरने पर उन सूचनाओं से लिपटी स्मृतियाँ, स्मृतियों में छिपे...
कविताजनमत

‘जीवन की सरलता का प्रतिनिधित्व करती हैं रविंदर की कविताएँ’

समकालीन जनमत
आलोक रंजन रविंदर कौर सचदेवा की कविताएँ सरलता को स्थापित करने के संघर्ष की कविताएँ हैं जो पहचान , प्रेम और दुनियादारी के अलग अलग...
कविताजनमत

जीने की जगह तलाशतीं सविता भार्गव की कविताएँ

समकालीन जनमत
अनुपम सिंह आजकल जब भी समय मिलता है ,कविताएँ लिखने से अधिक कविताओं के विषय में सोचती हूँ. कोई कविता क्यों अच्छी लगती हैं और...
जनमत

बजट 2019 : निर्मला सीतारमन के सामने सुस्त अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, ग्रामीण संकट की चुनौतियाँ

आगामी बजट नई मोदी सरकार का पहला पूर्णकालीन बजट होने जा रहा है। दिलचस्प यह है कि आमचुनावों के पहले जिन मुद्दों पर चर्चा हो...
जनमतस्मृति

खैनी खिलाओ न यार! उर्फ़ मौत से चुहल (सखा, सहचर, सहकर्मी, कॉमरेड महेश्वर की एक याद)

रामजी राय
अपने प्रियतर लोगों- कृष्णप्रताप (के.पी.), गोरख, कामरेड विनोद मिश्र, महेश्वर पर चाहते हुए भी आज तक कुछ नहीं लिख सका। पता नहीं क्यों? इसकी वज़ह...
जनमतपुस्तक

लोकतंत्र और मार्क्स-एंगेल्स

गोपाल प्रधान
 2000 में स्टेट यूनिवर्सिटी आफ़ न्यू यार्क प्रेस से अगस्त एच निम्ज़, जूनियर की किताब ‘ मार्क्स ऐंड एंगेल्स: देयर कंट्रीब्यूशन टु द डेमोक्रेटिक ब्रेकथ्रू...
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