समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (9)

दिनेश अस्थाना
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
कविता

धर्मेश चौबे की कविताएँ दो दुनियाओं के बीच क्षरित होने की मार्मिक अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी   “घर केवल ईंट पत्थर और गारे का जोड़ भर नहीं होते जो ईश्वर की कोई भी चुनी हुई कौम ढहा दे तो...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (8)

समकालीन जनमत
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
साहित्य-संस्कृति

इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में युवा कवियों ने पढ़ी कविता

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में परिवेश व आइसा द्वारा आज़ादी की बरसी की पूर्व संध्या पर परिसर के बरगद लॉन में युवा कवियों के कविता पाठ का...

आम अवाम की वास्तविक मुक्ति के लिए जीवनपर्यंत समर्पित रहे गोपाल सिंह नेपाली

समकालीन जनमत
दरभंगा। सुप्रसिद्ध इंकलाबी कवि गोपाल सिंह नेपाली की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के तत्वावधान में 11 अगस्त को विभागाध्यक्ष प्रो.उमेश कुमार की...
कविता

पवन कुमार वर्मा की कविताएँ समकालीनता का स्वीकार प्रस्तुत करती हैं

समकालीन जनमत
आलोक रंजन   युवा कवि पवन कुमार वर्मा की कविताएँ सामने हैं और सामने है हमारे समय की असलियतों की अभिव्यक्ति भी। इन कविताओं को...
कविता

रौशन कुमार की कविताएँ जेएनयू से अर्जित सामाजिक परिवर्तन की उम्मीद से निर्मित हैं

समकालीन जनमत
नीलम युवा कवि रौशन कुमार की कविताएँ ‘ भूख हड़ताल ‘, ‘ नजीब तुम ज़िंदा हो ‘…,  ‘ क्या है जे एन यू ‘, ‘...
पुस्तक

हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘दाता पीर’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण दाता पीर एक सुनार का बेटा था। चाँद के टुकड़े जैसा सुंदर। उसने आवाज़ लगाई कि कुछ गढ़वा लो, कुछ बनवा लो। उसने...
साहित्य-संस्कृति

याद -ए- रफ़ी : मानवीय उत्सवों के गायक थे मोहम्मद रफ़ी

उमा राग
शहंशाह-ए-तरन्नुम मोहम्मद रफ़ी के देहावसान के 45 वर्ष हो चले लेकिन उनके मुख्य धारा हिंदी गानों के अतिरिक्त ग़ज़ल, भजन, देशभक्ति गीत, क़व्वाली और अन्य...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर बच्चों ने बनाया चित्र

समकालीन जनमत
राजकुमार सोनी  रायपुर. जन संस्कृति मंच रायपुर और शिवम् एजुकेशन एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में 31 जुलाई को कथा और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की...
पुस्तक

‘गहन है यह अंधकारा’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण कोई भी भाषा हो वह दुर्जनों की ज़बान से बोले जाते समय कसमसाती होगी। जो ग़लत और झूठ बोला जा रहा है और...
कविता

अवंतिका सिंह की कविता यात्रा संभावनाओं भरी नई सुबह की तलाश में है।

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता अवंतिका सिंह की कविताएँ सामाजिक यथार्थ एवं उसकी विडंबनाओ का बोध कराती हुई हमसे संवाद करती है। अवंतिका एक ऐसा संसार रचना चाहती...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

‘कुन्द’ जी स्वयं में एक लाइब्रेरी हैं

जन संस्कृति मंच, आज़मगढ़ इकाई, ‘लेखक के घर चलो’ अभियान के अंतर्गत आज़मगढ़ के साहित्य जगत में प्रतिष्ठित जगदीश प्रसाद बरनवाल ‘कुन्द’ के घर पहुंची।...
स्मृति

रतन थियम को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि

महान भारतीय नाटककार, निर्देशक, डिज़ाइनर, संगीतकार, चित्रकार, अभिनेता और लेखक रतन थियम के निधन पर जन संस्कृति मंच हार्दिक श्रद्धांजलि देता है। उनके निधन से...
कविता

अरुण देव की कविताएँ मृत्‍यु की लौकिकता का संसार रचती हैं

समकालीन जनमत
पंकज चौधरी मृत्‍यु के बाद जीवन को समाप्‍त मान लिया जाता है। माना जाता है कि मृत्‍यु के बाद जीवन की तमाम गतिविधियाँ और कारोबार...
पुस्तक

पवन करण के कविता संग्रह ‘स्त्री मुग़ल’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
अलका बाजपेयी ‘स्त्री मुगल’ ( राधाकृष्ण प्रकाशन, 2023) पवन करण जी की 100 कविताओं का एक संग्रह है जो कि मुग़ल साम्राज्य के भीतर रहने...
साहित्य-संस्कृति

फासीवाद को सांस्कृतिक चुनौती : जसम सम्मेलन की पांच बड़ी उपलब्धियां

आशुतोष कुमार
ऐसी कई बातें हैं जिनके लिए जन संस्कृति मंच का 17वां राष्ट्रीय सम्मेलन याद किया जाएगा। यह सम्मेलन 12 और 13 जुलाई 2025 को रांची...
साहित्य-संस्कृति

जसम का राष्ट्रीय सम्मेलन : फासीवाद की विभाजनकारी संस्कृति के खिलाफ एकता, सृजन और संघर्ष का संकल्प

समकालीन जनमत
मशहूर रंगकर्मी जहूर आलम अध्यक्ष तथा लेखक व पत्रकार मनोज कुमार सिंह महासचिव चुने गए रॉंची। जन संस्कृति मंच का 17वां राष्ट्रीय सम्मेलन 12 व...
पुस्तक

विमल कुमार के काव्य संग्रह ‘मृत्यु की परिभाषा बदल दो’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण इस दौर में कवि विमल कुमार की सक्रिय रचनात्मक निरंतरता उल्लेखनीय और आश्वस्तिकारी है। ‘सपने में एक औरत’ से बातचीत से बरास्ते ‘जंगल...
कविता

उद्देश्य कुमार की कविताएँ मध्यवर्गीय जीवन की एकरसता से जूझती हैं

समकालीन जनमत
अनुराग यादव एक रचनाकार अगर वास्तव में समाज को एक नया नज़रिया, सोचने समझने का एक नया तरीका प्रदान करना चाहता है उसे अपनी दृष्टि...
Fearlessly expressing peoples opinion