समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

सुमन कुमार सिंह की कविताएँ वंचित तबकों का यथार्थ बयान करती हैं

अवंतिका सिंह सुमन कुमार सिंह की कविताएँ समकालीन भारतीय समाज का दर्पण हैं। इन कविताओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विडंबनाओं, आम आदमी की...
साहित्य-संस्कृति

हम असली मुद्दे और विरासत भूल जाएं, इसके लिए स्मृतियां मैन्युफैक्चर की जा रही हैं- प्रणय कृष्ण

समकालीन जनमत
लखनऊ, 15 सितंबर। ” देश में स्मृतियों का गृह युद्ध चल रहा है। सत्ता चाहती है कि उमर खालिद जैसे लोग, जो बरसों से जेल...
कवितास्मृति

इज़ाडोरा डंकन को उनकी पुण्यतिथि पर के. मंजरी श्रीवास्तव की काव्यात्मक श्रद्धांजलि

समकालीन जनमत
विश्व के महान व्यक्तित्वों (ख़लील जिब्रान, ग़ालिब, मीर, रूमी, इक़बाल, पाब्लो नेरुदा, इज़ाडोरा) के जीवन और विचारों को भारत के समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्थापित करते...
कविता

संतोष पटेल की कविताएँ मानवीय संघर्ष और अस्मिता के विस्तार तक ले जाती हैं

समकालीन जनमत
नीलाम्बुज सरोज संतोष पटेल की कविताएँ हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हैं। उनका कविता संग्रह ‘कारक के चिह्न’ केवल साहित्यिक सौंदर्य का उत्सव नहीं, बल्कि...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (11)

समकालीन जनमत
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
साहित्य-संस्कृति

विघ्नकर्ता से विघ्नहर्ता, शूद्र गणनायक से देवता बनने का सफ़र

सुशील मानव
दलितों के बीच गणेशोत्सव मनाने, मूर्तियां स्थापित करने के लिये सत्ताधारी पार्टी व संगठन द्वारा फंडिंग के आरोपों के बीच गणेश कौन हैं, इसे लेकर...
कविता

गौरव सिंह की कविताएँ नेपथ्य में खो गए जीवन-रागों को आवाज़ देती हैं

समकालीन जनमत
प्रो. रामेश्वर राय कविता समय से तटस्थ नहीं होती, लेकिन समय के साथ उसका रिश्ता इतिहास और सूचना-तंत्र से भिन्न होता है। कविता में दर्ज़...
पुस्तक

स्मिता सिन्हा के कविता संग्रह ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
जावेद आलम ख़ान छलकती पीड़ा को रोककर बेआवाज़ प्रार्थना है ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’। स्मिता सिन्हा का यह संग्रह अपने नाम को सार्थक करता है।...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (10)

समकालीन जनमत
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
साहित्य-संस्कृति

करमा महोत्सव के पूर्व संध्या पर घुटूवा में गहदम झुमइर का आयोजन ,नृत्य-गीत में जीवंत हुई झारखंड की मूल संस्कृति 

समकालीन जनमत
बाल विकास विद्यालय (रूगडी़बोर) बरकाकाना (घुटूवा गांव) में 31 अगस्त को झारखंड जन संस्कृति मंच की ओर से करमा  महोत्सव की पूर्व संध्या पर  गहदम...
कविता

रत्नेश कुमार की कविताएँ सामाजिक सरोकारों और मानव मूल्यों का यथार्थ चित्रण हैं

रौशन कुमार रत्नेश की कविताएँ मानव जीवन में होने वाली उथल-पुथल समेत समकालीन वक्त की समस्याओं एवं चुनौतियों को ज़रूरी ढंग से रेखांकित करतीं हैं।...
साहित्य-संस्कृति

बदल रहे शब्दों के अर्थ को बचाना कविता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है : दिनेश कुशवाह

कवि-लेखक-संस्कृतिकर्मी अजय कुमार की स्मृति में मऊ में विचार गोष्ठी और काव्य-संध्या का आयोजन  मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ और जन संस्कृति मंच द्वारा संयुकर...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

मैं लेखन के लिए ही बना हूँ

  ‘लेखक से मिलिए’ अभियान के अंतर्गत जन संस्कृति मंच, आज़मगढ़ इकाई 17 अगस्त 2025 को प्रतिष्ठित लेखक पंकज गौतम के घर पहुंची। पंकज गौतम...
पुस्तक

उषा राय के कविता संग्रह ‘भीमा कोरेगाँव तथा अन्य कविताएँ’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण ●यह कास का फूल है इसके पत्ते हाथ चीर देते हैं घाव भले ही भर जाये पर कसक रह जाती है बड़ा खुद्दार...
कविता

नीलाम्बुज सरोज की कविताएँ जन आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
सुमन कुमार सिंह समकालीन हिंदी कविता का स्वर बहुरंगी है। यह रंग ठीक ‘हिंदी-सा’ है। यह इसलिए भी कि यह देश के हर कोने, हर...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (9)

दिनेश अस्थाना
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
कविता

धर्मेश चौबे की कविताएँ दो दुनियाओं के बीच क्षरित होने की मार्मिक अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी   “घर केवल ईंट पत्थर और गारे का जोड़ भर नहीं होते जो ईश्वर की कोई भी चुनी हुई कौम ढहा दे तो...
संस्मरण

नागफ़नी का दोस्त (8)

समकालीन जनमत
( भानु कुमार दुबे ‘मुंतज़िर मिर्ज़ापुरी’ एक तरक्कीपसंद शायर रहे हैं। उनका जन्म 26 सितंबर 1953 को हुआ था।  दो साल पहले 28 जनवरी 2023...
साहित्य-संस्कृति

इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में युवा कवियों ने पढ़ी कविता

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में परिवेश व आइसा द्वारा आज़ादी की बरसी की पूर्व संध्या पर परिसर के बरगद लॉन में युवा कवियों के कविता पाठ का...

आम अवाम की वास्तविक मुक्ति के लिए जीवनपर्यंत समर्पित रहे गोपाल सिंह नेपाली

समकालीन जनमत
दरभंगा। सुप्रसिद्ध इंकलाबी कवि गोपाल सिंह नेपाली की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के तत्वावधान में 11 अगस्त को विभागाध्यक्ष प्रो.उमेश कुमार की...
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